Russia GPS Jamming: रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप के आसमान में एक नई और गंभीर समस्या उभर रही है – GPS सिग्नल जामिंग। हाल ही में स्पेन की रक्षा मंत्री मार्गारीटा रोबल्स के सैन्य विमान का GPS सिस्टम उस समय फेल हो गया, जब विमान रूस के कलिनिनग्राद क्षेत्र के नज़दीक उड़ रहा था। इससे पहले EU प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन के विमान के साथ भी ऐसी ही घटना हो चुकी है।

अब सवाल यह है कि रूस की सीमाओं के पास ही GPS सिग्नल क्यों जाम होते हैं? क्या यह कोई रणनीतिक साजिश है या फिर सिर्फ तकनीकी संयोग?

क्या है GPS जैमिंग?
GPS (Global Positioning System) सैटेलाइट्स कमजोर रेडियो सिग्नल भेजते हैं, जिन्हें विमान या अन्य रिसीवर पकड़कर लोकेशन और दिशा की जानकारी देते हैं। लेकिन जब कोई जैमर उपकरण इन्हीं या करीब की फ्रीक्वेंसी पर ज़्यादा ताकतवर सिग्नल भेजता है, तो असली GPS सिग्नल दब जाते हैं। इसे GPS जैमिंग कहा जाता है।
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इससे रिसीवर सिग्नल खो देता है
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कभी गलत लोकेशन दिखाता है
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फ्लाइट्स को नेविगेशन में परेशानी होती है
रूस के खिलाफ क्यों उठ रहीं उंगलियां?
रूस के कलिनिनग्राद, ब्लैक सी, बाल्टिक सी और यूक्रेन से सटे इलाकों में GPS सिग्नल जाम होना आम बात बन चुकी है। EU और NATO देशों का आरोप है कि रूस जानबूझकर ये हरकतें कर रहा है।
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अप्रैल 2025 में ही 27.4% उड़ानों में दिक्कत आई – स्वीडन का दावा
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123,000 विमान प्रभावित हुए – ICAO की रिपोर्ट
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सैन्य और राजनीतिक विमानों को मुख्य रूप से निशाना बनाया गया
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस डिजिटल युद्ध (Electronic Warfare) के तहत इन तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है ताकि दुश्मन देश भ्रम और डर में रहें।
क्यों कर रहा है रूस ऐसा?
रूस के पास अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग सिस्टम हैं, जैसे कि:
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Krasukha सिस्टम
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Pole-21 जैमिंग प्लेटफॉर्म
इनका मकसद है:
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दुश्मन के विमानों की सटीक लोकेशन छिपाना
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ड्रोन और मिसाइल सिस्टम को भटकाना
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सामरिक भ्रम फैलाना
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शांति काल में भी रणनीतिक दबाव बनाना
क्या है इसका समाधान?
अभी अधिकांश देशों में GPS जैमिंग अवैध है, लेकिन युद्ध या टकराव के समय में कुछ देश इसका चुपचाप इस्तेमाल करते हैं। कई देशों ने अब अपने विमानों में:
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बैकअप नेविगेशन सिस्टम
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इंफ्रारेड और लेजर गाइडेंस तकनीक
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उन्नत इंर्शियल नेविगेशन सिस्टम (INS) लगाने शुरू कर दिए हैं।
GPS जैमिंग अब एक नई युद्ध नीति बन चुकी है, खासतौर पर रूस द्वारा अपने पड़ोसी देशों और यूरोपीय विरोधियों के खिलाफ। स्पेन की रक्षा मंत्री का ताज़ा मामला इस बात का प्रमाण है कि हवाई युद्ध अब केवल मिसाइलों और लड़ाकू विमानों का नहीं रहा, बल्कि तकनीकी नियंत्रण की लड़ाई बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस डिजिटल खतरे से निपटने के लिए मिलकर कदम उठाने की ज़रूरत है।
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