Mobile Network Fails in Lift
Why Mobile Network Fails in Lift: हम सभी ने कभी न कभी यह अनुभव किया है कि जैसे ही हम लिफ्ट के अंदर कदम रखते हैं, हमारे मोबाइल का सिग्नल अचानक गायब हो जाता है। चाहे वह आलीशान दफ्तर हो या ऊंची रिहायशी इमारत, लिफ्ट के भीतर जाते ही न तो कॉल लगती है और न ही इंटरनेट काम करता है। कई बार बेसमेंट में भी यही स्थिति बनी रहती है। टेलीकॉम कंपनियां आज दुनिया भर में एडवांस 5G नेटवर्क और गियर का इस्तेमाल कर रही हैं, इसके बावजूद लिफ्ट के भीतर सिग्नल की यह समस्या आज भी बरकरार है। आखिर इसके पीछे क्या विज्ञान काम करता है और क्यों मोबाइल नेटवर्क लिफ्ट की दीवारों को पार नहीं कर पाता?
मोबाइल सिग्नल दरअसल इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडियो तरंगें (Radio Waves) होती हैं। इन तरंगों को सुचारू रूप से यात्रा करने के लिए एक खुले माध्यम की आवश्यकता होती है। जब ये तरंगें लिफ्ट के पास पहुँचती हैं, तो उन्हें दो बड़ी बाधाओं का सामना करना पड़ता है। पहली बाधा है लिफ्ट के चारों ओर बनी मजबूत कंक्रीट और कड़े पत्थरों की दीवारें, जो सिग्नल की ताकत को काफी हद तक सोख लेती हैं। दूसरी और सबसे महत्वपूर्ण बाधा है लिफ्ट का केबिन, जो आमतौर पर स्टेनलेस स्टील या एल्युमीनियम जैसे धातुओं से बना होता है। विज्ञान की भाषा में इसे ‘फैराडे केज’ (Faraday Cage) जैसा प्रभाव कहा जाता है, जो बाहरी रेडियो तरंगों को अंदर आने से पूरी तरह ब्लॉक कर देता है।
स्टेनलेस स्टील का बॉक्स एक शीशे की तरह काम करता है, लेकिन प्रकाश के लिए नहीं बल्कि रेडियो तरंगों के लिए। जैसे ही मोबाइल सिग्नल लिफ्ट की धातु की सतह से टकराते हैं, वे अंदर जाने के बजाय वापस बाहर की तरफ रिफ्लेक्ट (परावर्तित) हो जाते हैं। धातु की यह परत सिग्नल को चारों ओर मोड़ देती है, जिससे लिफ्ट के अंदर मौजूद मोबाइल डिवाइस तक नेटवर्क की स्ट्रेंथ न के बराबर पहुँचती है। हालांकि, आधुनिक इमारतों में इस समस्या को दूर करने के लिए विशेष सिग्नल रिपीटर्स या इन-बिल्डिंग रिसीवर लगाए जाते हैं, लेकिन इनका खर्च काफी अधिक होता है, इसलिए यह सुविधा हर जगह उपलब्ध नहीं होती।
नेटवर्क की उपलब्धता इस बात पर भी निर्भर करती है कि लिफ्ट बिल्डिंग में कहाँ स्थित है। यदि लिफ्ट बिल्डिंग के बाहरी हिस्से या कांच वाली दीवार के पास है, तो वहाँ नेटवर्क बूस्टर की मदद से थोड़े सिग्नल मिल सकते हैं। ऐसे सिग्नल कॉल करने के लिए तो ठीक होते हैं, लेकिन डेटा यानी इंटरनेट चलाने के लिए पर्याप्त नहीं होते। वहीं, बिल्डिंग के बिल्कुल बीचों-बीच स्थित लिफ्ट में सिग्नल की समस्या सबसे ज्यादा होती है क्योंकि वहाँ रेडियो तरंगों को कई परतों वाली कंक्रीट की दीवारों को पार करना पड़ता है।
अगर आप लिफ्ट में फंस जाएं या वहां नेटवर्क न हो, तो भी आप कॉल कर सकते हैं, बशर्ते बिल्डिंग में वाई-फाई की सुविधा हो। आजकल अधिकांश स्मार्टफोन्स में ‘Wi-Fi Calling’ का फीचर आता है। इसे इस्तेमाल करने के लिए आपको फोन की ‘नेटवर्क सेटिंग्स’ में जाकर इस विकल्प को इनेबल करना होगा। इसके बाद, यदि आपके मोबाइल का सिग्नल चला जाता है लेकिन वाई-फाई उपलब्ध है, तो आपका फोन इंटरनेट के जरिए कॉल कनेक्ट कर देगा। यह फीचर आपातकालीन स्थितियों में और लिफ्ट जैसे डेड-जोन में बहुत मददगार साबित होता है। अतः तकनीक के इस दौर में लिफ्ट से बाहर निकलकर कॉल करने का इंतजार करने के बजाय आप वाई-फाई कॉलिंग का स्मार्ट चुनाव कर सकते हैं।
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