Sheikh Hasina India news: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना बीते डेढ़ साल से भारत में ‘राजनीतिक शरण’ में हैं। 2024 में बांग्लादेश में हुए जनविद्रोह के बाद उन्हें प्रधानमंत्री पद से हटना पड़ा और वे देश छोड़कर रातोंरात नई दिल्ली पहुंच गईं। अब बांग्लादेश की अंतरिम सरकार उनके खिलाफ नरसंहार के आरोपों में मुकदमा चला रही है और लगातार भारत से हसीना को प्रत्यर्पित करने की मांग कर रही है।

हालांकि भारत सरकार की ओर से अब तक इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। लेकिन सोमवार को विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने इस संवेदनशील मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि “यह एक न्यायिक और कानूनी प्रक्रिया है। इसके लिए भारत और बांग्लादेश की सरकारों के बीच आपसी बातचीत और परामर्श जरूरी है। हम इस विषय को देख रहे हैं और बांग्लादेशी अधिकारियों के साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं।”

क्या होगा शेख हसीना का भविष्य?
विदेश सचिव की इस टिप्पणी से यह साफ हो गया है कि भारत फिलहाल शेख हसीना को लेकर कोई जल्दबाज़ी में फैसला नहीं लेने जा रहा है। हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि यदि दोनों देशों के बीच समझौता होता है, तो प्रत्यर्पण की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
बता दें कि बांग्लादेश के अंतरिम प्रधानमंत्री मुहम्मद यूनुस ने कई बार भारत से शेख हसीना को वापस भेजने की मांग की है। यूनुस का दावा है कि देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बहाल करने और न्याय सुनिश्चित करने के लिए हसीना की वापसी जरूरी है।
चुनाव की तैयारी में बांग्लादेश
वहीं बांग्लादेश में फरवरी 2026 में आम चुनाव प्रस्तावित हैं। अंतरिम सरकार द्वारा चुनाव की घोषणा पर भारत ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा,”हम इस बात से प्रसन्न हैं कि बांग्लादेश में अंतरिम सरकार ने चुनाव की घोषणा की है। भारत चाहता है कि यह चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी हो। हर नागरिक को मतदान का अधिकार मिलना चाहिए।”
भारत की संतुलित कूटनीति
भारत ने अब तक शेख हसीना को लेकर कोई स्पष्ट पक्ष नहीं लिया है, जो एक राजनयिक संतुलन की ओर इशारा करता है। भारत न तो बांग्लादेश की अंतरिम सरकार को नाराज़ करना चाहता है, और न ही हसीना जैसी अनुभवी नेता के मामले में जल्दबाज़ी करना चाहता है।शेख हसीना की प्रत्यर्पण प्रक्रिया अब एक कूटनीतिक और न्यायिक मसला बन चुकी है। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि निर्णय बातचीत और परामर्श के बाद ही लिया जाएगा। आने वाले हफ्तों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भारत बांग्लादेश के अनुरोध को स्वीकार करता है या हसीना को राजनीतिक शरण जारी रखता है।










