China J-20A Fighter Jet: चीन ने अपने अत्याधुनिक फिफ्थ जनरेशन स्टील्थ फाइटर जेट J-20A को दुनिया के सामने पेश कर दिया है, जिसे ‘माइटी ड्रैगन’ के नाम से भी जाना जाता है। यह जेट चीन की वायुसेना की ताकत को नए आयाम देगा और सीधे तौर पर अमेरिका के F-22 Raptor और F-35 Lightning II को चुनौती देता है। इस डेवेलपमेंट से अमेरिकी रक्षा रणनीतिकारों की चिंता बढ़ना तय है।

J-20A में लगे हैं पावरफुल WS-15 इंजन
चीन ने इस फाइटर जेट को अपने पुराने J-20 वेरिएंट से अपग्रेड किया है। J-20A में दो Shenyang WS-15 आफ्टरबर्निंग टर्बोफैन इंजन लगाए गए हैं, जो इसे अत्यधिक गति, ताकत और रेंज प्रदान करते हैं। यह इंजन F-22 और F-35 के इंजन से भी ज्यादा पावरफुल माने जा रहे हैं।

इस अपग्रेड के बाद J-20A अब लंबी दूरी की उड़ानों और मिशनों को बिना रुकावट अंजाम देने में सक्षम हो गया है। इसमें स्टील्थ टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया गया है, जिससे यह रडार की पकड़ में नहीं आता, खासकर जब इसे सामने से देखा जाए।
हथियारों की जबरदस्त क्षमता
‘नेशनल सिक्योरिटी जनरल’ की रिपोर्ट के अनुसार, J-20A में हथियारों की भारी रेंज कैरी करने की क्षमता है। यह जेट लॉन्ग रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल जैसे PL-15 और संभावित रूप से भविष्य की PL-21 मिसाइलों को कैरी कर सकता है। इसके अलावा साइड बे में कम दूरी की मिसाइलें रखी जा सकती हैं, जिन्हें बंद बे से भी दागा जा सकता है। यह इसे दुश्मन के रडार से बचाकर अटैक करने में सक्षम बनाता है।
एयर-रिफ्यूलिंग से बढ़ी क्षमता
J-20A की एक और बड़ी खासियत है इसकी एयर-रिफ्यूलिंग क्षमता। इसमें लगभग 12,000 किलोग्राम ईंधन की क्षमता है और यह लगभग 2,000 किलोमीटर तक की कॉम्बैट रेंज को कवर कर सकता है। रिफ्यूलिंग की वजह से यह फाइटर जेट लंबी लड़ाइयों में भी टिके रह सकता है।
अमेरिका के लिए नई चुनौती
चीन के इस अत्याधुनिक फाइटर जेट की तैनाती अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से एक नई चुनौती पेश करती है। जहां अमेरिका F-22 और F-35 को अपनी सैन्य शक्ति का आधार मानता है, वहीं चीन का J-20A एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है।J-20A फाइटर जेट चीन की तेजी से बढ़ती सैन्य क्षमताओं का प्रतीक है। इसकी उन्नत तकनीक, स्टील्थ डिजाइन, लंबी रेंज और भारी हथियार क्षमता इसे अमेरिका के स्टील्थ फाइटर्स के बराबर या कई मामलों में उनसे आगे ले जाती है। आने वाले समय में यह जेट एशिया की सामरिक स्थिरता और वैश्विक वायु शक्ति समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
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