Women Unemployment India: देश में बेरोजगारी की समस्या को लेकर मोदी सरकार फिर से चिंता में है। हाल ही में केंद्र सरकार के खुद के एक सर्वेक्षण रिपोर्ट ने यह सामने रखा है कि देश में कुल बेरोजगारी दर तो कम हो रही है, लेकिन युवतियों के बीच बेरोजगारी की दर में तेज़ी से बढ़ोतरी हो रही है। केंद्रीय मंत्रालय द्वारा जारी ‘पिरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे’ (PLFS) के अनुसार, अगस्त महीने में शहरी क्षेत्रों में 15 से 29 साल उम्र की महिलाओं में बेरोजगारी दर 25.7 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो समान आयु वर्ग के पुरुषों की तुलना में करीब 10 प्रतिशत अधिक है। ग्रामीण इलाकों में भी महिलाओं की रोजगार दर पुरुषों से काफी कम है।

बेरोजगारी के आंकड़ों ने बढ़ाई सरकार की चिंता
हाल ही में केंद्र सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय ने देश में बेरोजगारी की ताजा रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट के अनुसार, देश की कुल बेरोजगारी दर अगस्त में 5.1 प्रतिशत दर्ज हुई, जबकि जुलाई में यह दर 5.2 प्रतिशत थी। मतलब पिछले पांच महीनों में यह सबसे कम दर है। हालांकि, इसी रिपोर्ट में महिलाओं की बेरोजगारी की संख्या ने चिंता बढ़ा दी है।

‘पिरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे’ के मुताबिक, शहरी क्षेत्रों में 15 से 29 वर्ष की उम्र की महिलाओं की बेरोजगारी दर अगस्त में 25.7 प्रतिशत पहुंच गई, जबकि इसी आयु वर्ग के पुरुषों की बेरोजगारी दर करीब 15.7 प्रतिशत ही है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी 15 से 29 वर्ष की महिलाओं की तुलना में पुरुषों की रोजगार दर ज्यादा है। इसी दौरान युवा वर्ग में कुल बेरोजगारी दर 12.6 प्रतिशत रही, जबकि महिलाओं के लिए यह दर 14.3 प्रतिशत दर्ज हुई है।
सरकार के रोजगार के वादे अधूरे, बढ़ती बेरोजगारी चिंता का विषय
बीजेपी ने सत्ता में आने के बाद देश में हर साल 2 करोड़ नौकरियां देने का वादा किया था, लेकिन पिछले 11 वर्षों में यह वादा पूरी तरह पूरा नहीं हो पाया। लगातार बेरोजगारी की बढ़ती समस्या और खासकर महिलाओं के रोजगार के अवसरों की कमी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। देश में बेरोजगारी के भयावह आंकड़े बार-बार सार्वजनिक हो रहे हैं, लेकिन उसका कोई प्रभावी समाधान नजर नहीं आ रहा।
महिलाओं के रोजगार संकट पर विशेष ध्यान न देना और उनके लिए पर्याप्त रोजगार के अवसर उपलब्ध न कराना, देश की आर्थिक प्रगति और सामाजिक न्याय के लिए खतरा है। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि रोजगार के क्षेत्र में महिलाओं के लिए समान अवसर देना जरूरी है, जिससे वे आर्थिक रूप से स्वावलंबी बन सकें और देश के विकास में योगदान दे सकें।
केंद्रीय रिपोर्ट के मुताबिक, कुल मिलाकर देश में बेरोजगारी की दर तो कम हुई है, लेकिन युवाओं खासकर महिलाओं के रोजगार की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में महिलाओं की बेरोजगारी अधिक होने से उनकी आर्थिक स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है। सरकार के लिए यह बड़ी चुनौती है कि वह युवाओं और खासकर महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करे और उनकी भागीदारी को बढ़ावा दे। न केवल बेरोजगारी को कम करना, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना ही देश की विकास यात्रा को आगे बढ़ाने का रास्ता है।










