Yogini Ekadashi : सनातन हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को सभी व्रतों में सर्वश्रेष्ठ और अत्यंत फलदायी माना गया है। हिंदू पंचांग के अनुसार, पूरे वर्ष में कुल 24 एकादशी तिथियां आती हैं, और प्रत्येक एकादशी का अपना एक विशिष्ट महत्व, पौराणिक कथा और फल होता है। आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को योगिनी एकादशी के पावन नाम से जाना जाता है। यह व्रत जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित होता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी भक्त इस दिन पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ भगवान विष्णु की आराधना करते हैं, उनके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास हमेशा बना रहता है। इसके साथ ही, जीवन के सभी कष्टों, पापों और मानसिक चिंताओं से मुक्ति मिलती है। पौराणिक शास्त्रों में ऐसा उल्लेख मिलता है कि योगिनी एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को 88 हजार ब्राह्मणों को गरिमापूर्ण भोजन कराने के समान असीम पुण्य फल की प्राप्ति होती है, जो इसे बेहद कल्याणकारी बनाता है।

योगिनी एकादशी 2026: मुख्य तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त
साल 2026 में योगिनी एकादशी की सही तिथि को लेकर ज्योतिषीय गणना के अनुसार पंचांग स्पष्ट संकेत देता है। हिंदू पंचांग के मुताबिक, आषाढ़ महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का प्रारंभ 09 जुलाई 2026 को शाम 07 बजकर 46 मिनट पर होने जा रहा है। वहीं, इस पवित्र तिथि का समापन अगले दिन यानी 10 जुलाई 2026 को शाम 04 बजकर 52 मिनट पर होगा। सनातन धर्म में उदया तिथि के सिद्धांत को सर्वोपरि माना जाता है, जिसके अनुसार सूर्योदय के समय जो तिथि मौजूद होती है, उसी दिन व्रत और उत्सव मनाया जाता है। अतः उदया तिथि की मान्यताओं को देखते हुए योगिनी एकादशी का पावन व्रत 10 जुलाई 2026, दिन शुक्रवार को पूरे देश में श्रद्धापूर्वक रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए भक्त दिनभर उपवास रखेंगे।
व्रत की सफलता के लिए पारण का समय और आवश्यक नियम
किसी भी एकादशी व्रत की पूर्णता और उसका वास्तविक फल तभी प्राप्त होता है, जब उसका पारण (व्रत खोलना) शास्त्र सम्मत नियमों और सही समय पर किया जाए। शास्त्रों के निर्देशानुसार, एकादशी व्रत का पारण हमेशा अगले दिन यानी द्वादशी तिथि के भीतर ही संपन्न किया जाना चाहिए। वर्ष 2026 की इस योगिनी एकादशी व्रत को खोलने का शुभ समय 11 जुलाई 2026 को सुबह 05 बजकर 49 मिनट से शुरू होकर सुबह 08 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। सभी व्रतियों को इसी निश्चित समयावधि के भीतर विधि-विधान से अपना व्रत खोलना चाहिए। पारण के दिन सुबह स्नान के बाद ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को दान-दक्षिणा देने के बाद ही स्वयं भोजन ग्रहण करना उत्तम माना जाता है।
श्री हरि विष्णु को प्रसन्न करने की सरल और संपूर्ण पूजा विधि
योगिनी एकादशी के पावन अवसर पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए शास्त्रों में एक सुगम पूजा विधि का वर्णन किया गया है, जिसका पालन हर भक्त को करना चाहिए:
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प्रातः काल की शुरुआत: एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में जल्दी उठें, घर की सफाई करें और स्नान आदि करके पवित्र व स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद हाथ में जल लेकर व्रत का अटूट संकल्प लें।
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पूजा स्थल की शुद्धि: अपने घर के मंदिर या पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें और पूरे स्थान को पवित्र गंगाजल छिड़ककर शुद्ध कर लें।
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प्रतिमा की स्थापना: पूजा स्थान पर एक साफ चौकी बिछाकर उस पर भगवान विष्णु और धन की देवी माता लक्ष्मी की सुंदर प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
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दिव्य अर्पण: भगवान श्री हरि विष्णु को प्रिय तुलसी दल (तुलसी के पत्ते), पीले पुष्प, फल, धूप और सुगन्धित दीप अर्पित करें। याद रखें कि विष्णु जी की पूजा में तुलसी का विशेष महत्व है।
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पाठ और कथा: भगवान को सात्विक चीजों का श्रद्धापूर्वक भोग लगाएं। इसके बाद शांत मन से बैठकर विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें और एकादशी व्रत की पौराणिक महात्म्य कथा का श्रवण या पठन करें।
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आरती और क्षमा प्रार्थना: पूजा के अंत में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कर्पूर से आरती करें। पूजा में हुई किसी भी अनजानी भूल के लिए भगवान से क्षमा याचना करें और प्रसाद वितरित करें।
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