Youth Unemployment India : 2014 में सत्ता में आने से पहले भाजपा ने हर साल 2 करोड़ रोजगार देने का वादा किया था। लेकिन 11 वर्षों के बाद भी यह वादा जमीनी हकीकत में तब्दील नहीं हो पाया। विपक्ष का आरोप है कि मोदी सरकार ‘जुमलों’ से आगे नहीं बढ़ी है और बेरोजगारी की स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई है। अब खुद सरकार के आंकड़े बता रहे हैं कि बेरोजगारी की दर विशेष रूप से युवाओं में बेहद गंभीर हो चुकी है।
केंद्रीय सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, जून 2025 में 15-29 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं में बेरोजगारी दर बढ़कर 15.3 प्रतिशत हो गई है। मई में यह आंकड़ा 15 प्रतिशत था। यह लगातार दूसरा महीना है जब बेरोजगारी दर में वृद्धि देखी गई है, जिससे युवाओं के बीच रोजगार को लेकर गहरी निराशा झलक रही है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 18.8 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो कि बेहद गंभीर स्थिति को दर्शाता है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 13.8 प्रतिशत पाई गई है, जो पहले की तुलना में थोड़ी ज्यादा है। इन आंकड़ों से साफ है कि रोजगार संकट सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों में भी नौजवानों को काम मिलना मुश्किल हो रहा है।
विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का कहना है कि केंद्रीय सांख्यिकी मंत्रालय की परिभाषा ही असल तस्वीर को छिपाने वाली है। उनके अनुसार यदि कोई व्यक्ति पूरे सप्ताह में केवल एक घंटा भी काम करता है, तो उसे “बेरोजगार” की श्रेणी में नहीं गिना जाता। इससे स्पष्ट है कि बड़ी संख्या में युवा ऐसे हैं जिन्हें पूरे समय या नियमित रोजगार नहीं मिल रहा, फिर भी वे सरकारी आंकड़ों में “रोजगार प्राप्त” माने जा रहे हैं।
सरकार के आंकड़े इस ओर भी इशारा करते हैं कि अब युवा काम की तलाश में भी रुचि नहीं ले रहे हैं। मई में जहां 15-29 आयु वर्ग के 42.1 प्रतिशत युवा काम कर रहे थे या नौकरी की तलाश में थे, जून में यह आंकड़ा घटकर 41 प्रतिशत रह गया है। यानी 59 प्रतिशत युवा न तो काम कर रहे हैं, न ही रोजगार की तलाश में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंकड़ा युवा आबादी में बढ़ती निराशा का स्पष्ट संकेत है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बेरोजगारी सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक संकट भी है। लंबे समय से काम न मिलने की स्थिति में युवा वर्ग में कुंठा, मानसिक तनाव और अपराध की ओर रुझान जैसे खतरे बढ़ सकते हैं। शिक्षा हासिल करने के बाद भी यदि नौजवानों को उचित रोजगार न मिले तो देश की उत्पादकता और आर्थिक विकास पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है।
विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की रोजगार नीतियों को पूरी तरह विफल बताया है। उनका आरोप है कि ‘मेक इन इंडिया’, ‘स्टार्टअप इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ जैसे अभियानों के नाम पर जनता को बड़े-बड़े सपने दिखाए गए, लेकिन रोजगार की असल समस्या हल नहीं हो सकी। वहीं सरकार की तरफ से अब तक इस नई रिपोर्ट पर कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है।
जून 2025 के ये सरकारी आंकड़े एक बार फिर यह उजागर करते हैं कि देश का युवा वर्ग गंभीर बेरोजगारी संकट से गुजर रहा है। सरकार के वादों और जमीनी हकीकत के बीच गहरी खाई साफ नजर आ रही है। जहां एक ओर सरकारी तंत्र इस स्थिति को कम करके आंक रहा है, वहीं विपक्ष इसे देश के भविष्य के लिए एक खतरनाक संकेत मान रहा है। विशेषज्ञों की राय में यह समय केवल नीतियों की घोषणा का नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर ठोस कदम उठाने का है, ताकि देश का युवा अपनी ऊर्जा को निर्माण और विकास में लगा सके, न कि हताशा में।
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