Zambia Lungu Body Controversy
Zambia Lungu Body Controversy : जाम्बिया के पूर्व राष्ट्रपति एडगर लुंगू के अंतिम संस्कार को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक अंतरराष्ट्रीय कानूनी लड़ाई में बदल गया है। दक्षिण अफ्रीका में रखे उनके पार्थिव शरीर को लेकर जाम्बिया सरकार और उनके परिजनों के बीच ठन गई है। जाम्बिया के अटॉर्नी जनरल ने बुधवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर सनसनीखेज दावा किया कि दक्षिण अफ्रीका की एक अदालत के आदेश के बाद सरकार ने लुंगू के शव को अपने नियंत्रण में ले लिया है। इसके तुरंत बाद, शव को प्रिटोरिया स्थित पुराने अंतिम संस्कार गृह से हटाकर किसी अज्ञात सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया। सरकार की इस कार्रवाई ने कूटनीतिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
लुंगू के परिवार ने सरकार के इस कदम को अवैध बताते हुए इसका पुरजोर विरोध किया है। परिवार का तर्क है कि एक अन्य आपातकालीन अदालत ने पहले ही आदेश दिया था कि शव को उसी स्थान पर रखा जाए जहां जून 2025 में उनकी मृत्यु के बाद से वह रखा हुआ था। दो अलग-अलग अदालतों के विरोधाभासी फैसलों ने स्थिति को और अधिक पेचीदा बना दिया है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि किस अदालत का आदेश अंतिम माना जाएगा। यह कानूनी खींचतान लुंगू और जाम्बिया के वर्तमान राष्ट्रपति हाकाइंडे हिचिलेमा के बीच दशकों पुराने राजनीतिक द्वेष का परिणाम मानी जा रही है, जो मौत के बाद भी थमने का नाम नहीं ले रही है।
विवाद की जड़ में वह गहरी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता है जो जाम्बिया की सत्ता के शीर्ष पर रही है। राष्ट्रपति हाकाइंडे हिचिलेमा की सरकार चाहती है कि लुंगू का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ जाम्बिया की राजधानी में पूर्व नेताओं के लिए आरक्षित कब्रिस्तान में किया जाए। इसके विपरीत, लुंगू के परिवार का दावा है कि पूर्व राष्ट्रपति की यह स्पष्ट अंतिम इच्छा थी कि हिचिलेमा उनके शव के करीब न आएं और न ही उनके अंतिम संस्कार में किसी भी प्रकार की भूमिका निभाएं। परिवार का आरोप है कि सरकार उनकी भावनाओं और मृत व्यक्ति की वसीयत का अनादर कर रही है। इससे पहले जून में भी सरकार ने दक्षिण अफ्रीका में आयोजित प्रार्थना सभा को कानूनी बाधा डालकर रुकवा दिया था।
एडगर लुंगू 2015 से 2021 तक जाम्बिया के राष्ट्रपति रहे, और उनका कार्यकाल राजनीतिक उथल-पुथल से भरा रहा। 2017 में जब लुंगू सत्ता में थे, तब उन्होंने वर्तमान राष्ट्रपति हाकाइंडे हिचिलेमा को देशद्रोह के आरोपों में गिरफ्तार करवाकर चार महीने तक जेल में रखा था। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण हिचिलेमा को रिहा करना पड़ा था। 2021 के चुनावों में पासा पलटा और हिचिलेमा ने लुंगू को हराकर सत्ता छीन ली। इसके बाद लुंगू ने आरोप लगाया था कि नई सरकार उन्हें परेशान कर रही है और उन्हें उनके घर में ही नजरबंद रखने की कोशिश की जा रही है। 5 जून 2025 को 68 वर्ष की आयु में दक्षिण अफ्रीका के अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई, लेकिन उनके पीछे की कड़वाहट आज भी जाम्बिया के राजनीतिक भविष्य को प्रभावित कर रही है।
वर्तमान में स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण बनी हुई है और शव के स्थान को लेकर संशय बना हुआ है। जाम्बिया सरकार इसे अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय गौरव का विषय मान रही है, जबकि परिवार इसे निजी स्वतंत्रता और अंतिम इच्छा का उल्लंघन बता रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस विवाद का समाधान अब केवल दक्षिण अफ्रीका की उच्च अदालतों के माध्यम से ही संभव है। जब तक कानूनी स्पष्टता नहीं आती, तब तक जाम्बिया के पूर्व राष्ट्रपति का शव एक ठंडे बस्ते में पड़ा रहेगा। यह घटना दिखाती है कि कैसे सत्ता की जंग कभी-कभी मृत्यु के बाद भी खत्म नहीं होती और सम्मान की आड़ में राजनीतिक स्कोर सेट किए जाते हैं।
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