PSU Bank Privatisation : केंद्र सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में अपनी हिस्सेदारी घटाने और बैंकिंग सेक्टर में एकीकरण की संभावनाओं पर विचार कर रही है। द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार की अगली रणनीति के तहत चार सरकारी बैंकों में हिस्सेदारी कम की जा सकती है। IDBI Bank की रणनीतिक बिक्री को मंजूरी मिलने के बाद यह कदम बैंकिंग क्षेत्र में विनिवेश की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, इन प्रस्तावों को लेकर अंतिम सरकारी फैसला सामने आना अभी बाकी है।
इन चार सरकारी बैंकों पर सरकार की नजर
रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 75 प्रतिशत तक लाने पर विचार कर रही है। इसका मतलब यह नहीं है कि इन चारों बैंकों को पूरी तरह निजी हाथों में सौंपने का निर्णय लिया जा चुका है। फिलहाल चर्चा सरकारी हिस्सेदारी कम करने और सार्वजनिक निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने की है।
OFS के जरिए बेचे जा सकते हैं सरकारी शेयर
सरकार इन बैंकों में अपनी हिस्सेदारी कम करने के लिए ऑफर फॉर सेल (OFS) का विकल्प अपना सकती है। इस प्रक्रिया में मौजूदा शेयरधारक बाजार के माध्यम से अपने शेयर बेचते हैं। यदि प्रस्ताव आगे बढ़ता है, तो आम निवेशकों और अन्य सार्वजनिक शेयरधारकों के लिए इन बैंकों में निवेश के अवसर बढ़ सकते हैं। हालांकि, शेयर बिक्री का समय, मात्रा और कीमत बाजार की परिस्थितियों तथा संबंधित मंजूरियों पर निर्भर करेगी।
हिस्सेदारी घटाने के पीछे क्या है वजह?
सरकार की संभावित योजना के पीछे शेयर बाजार के न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता नियमों का अनुपालन एक प्रमुख वजह हो सकती है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के सामान्य नियमों के मुताबिक, सूचीबद्ध कंपनियों में कम से कम 25 प्रतिशत सार्वजनिक हिस्सेदारी आवश्यक होती है। सरकारी हिस्सेदारी 75 प्रतिशत तक आने पर इन बैंकों में सार्वजनिक निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ाने का रास्ता खुल सकता है। इससे बाजार में उपलब्ध शेयरों की संख्या और कारोबार पर भी असर पड़ सकता है।
IDBI Bank की ₹52,878 करोड़ की डील चर्चा में
सरकारी विनिवेश रणनीति में IDBI Bank का मामला महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट के मुताबिक, 14 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने Fairfax Financial Holdings से जुड़ी कनाडाई इकाई को बैंक की 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने के लिए रणनीतिक खरीदार के रूप में मंजूरी दी थी। प्रस्तावित सौदे का मूल्य ₹52,878.08 करोड़ बताया गया है। इसमें केंद्र सरकार की 30.48 प्रतिशत और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल है।
सौदे के बाद सरकार और LIC के पास कितनी हिस्सेदारी बचेगी?
प्रस्तावित लेनदेन पूरा होने के बाद केंद्र सरकार के पास IDBI Bank की 15 प्रतिशत और LIC के पास 19 प्रतिशत हिस्सेदारी बचने की बात कही गई है। हालांकि, सौदे को अंतिम रूप देने के लिए आवश्यक नियामकीय प्रक्रियाएं पूरी करना जरूरी होगा। इसलिए मंजूरी मिलने और वास्तविक लेनदेन पूरा होने के बीच अंतर समझना महत्वपूर्ण है।
दो अन्य बैंकों के निजीकरण की भी चर्चा
रिपोर्ट में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकिंग ढांचे के अगले चरण में दो अन्य बैंकों के संभावित निजीकरण का भी उल्लेख है। पहले सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन ओवरसीज बैंक के नाम संभावित उम्मीदवारों के तौर पर सामने आए थे। लेकिन अभी किसी बैंक के पूर्ण निजीकरण को अंतिम निर्णय नहीं माना जाना चाहिए। आने वाले समय में सरकारी घोषणाओं और नियामकीय कदमों से इस रणनीति की वास्तविक दिशा स्पष्ट होगी।
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