President Murmu Bastar Visit : छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के आगमन पर उत्साह और गरिमामय माहौल देखने को मिला। जगदलपुर स्थित मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति का आत्मीय स्वागत किया गया। इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, कृषि मंत्री राम विचार नेताम, वन मंत्री केदार कश्यप और संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल मौजूद रहे। सभी ने राष्ट्रपति का अभिनंदन कर उनके बस्तर प्रवास का स्वागत किया। राष्ट्रपति के आगमन को क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने किया अभिनंदन
राष्ट्रपति के स्वागत कार्यक्रम में बस्तर के जनप्रतिनिधियों के साथ वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी भी उपस्थित रहे। बस्तर सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप, कांकेर सांसद भोजराज नाग और जगदलपुर के महापौर संजय पांडेय ने भी राष्ट्रपति का स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया। राष्ट्रपति का यह दौरा बस्तर की ऐतिहासिक पहचान, आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक आयोजनों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार में होंगी शामिल
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जगदलपुर में विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा महोत्सव के महत्वपूर्ण आयोजन मुरिया दरबार में शामिल होने पहुंची हैं। बस्तर दशहरा अपनी विशिष्ट परंपराओं, जनजातीय संस्कृति और लंबे आयोजन काल के लिए देश-दुनिया में अलग पहचान रखता है। इस पर्व में धार्मिक आस्था के साथ-साथ स्थानीय समुदायों की सामाजिक और सांस्कृतिक भागीदारी भी महत्वपूर्ण होती है। राष्ट्रपति की उपस्थिति से इस आयोजन का महत्व और बढ़ गया है। उनके प्रवास को बस्तर की परंपराओं, जनजातीय विरासत और क्षेत्र की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को सामने लाने का अवसर माना जा रहा है।
क्या है मुरिया दरबार की ऐतिहासिक परंपरा?
मुरिया दरबार बस्तर दशहरा की सदियों पुरानी ऐतिहासिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह आयोजन जगदलपुर स्थित सिरासार भवन में किया जाता है, जहां विभिन्न क्षेत्रों से मांझी, चालकी और अन्य पारंपरिक प्रतिनिधि जुटते हैं। बस्तर की सामाजिक व्यवस्था में इन प्रतिनिधियों की विशेष भूमिका रही है। ऐतिहासिक रूप से यह दरबार स्थानीय समुदायों और तत्कालीन शासक के बीच संवाद का माध्यम हुआ करता था। यहां लोग अपनी समस्याएं, मांगें और क्षेत्र से जुड़े विषय प्रस्तुत करते थे। समय के साथ इस परंपरा का स्वरूप बदला, लेकिन इसका सांस्कृतिक महत्व आज भी कायम है।
जनजातीय समाज की समस्याओं और अपेक्षाओं का मंच है मुरिया दरबार
आज मुरिया दरबार केवल एक ऐतिहासिक आयोजन नहीं, बल्कि जनजातीय समाज की आवाज सामने रखने का महत्वपूर्ण मंच भी है। विभिन्न क्षेत्रों के पारंपरिक प्रतिनिधि इस अवसर पर समुदायों की समस्याओं, अपेक्षाओं और सामाजिक मुद्दों को सामने रखते हैं। बस्तर की विशिष्ट परंपराओं में शामिल यह आयोजन स्थानीय लोगों की भागीदारी और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करता है। राष्ट्रपति की मौजूदगी में इस ऐतिहासिक मंच पर होने वाला कार्यक्रम क्षेत्र की परंपराओं और जनजातीय समाज के महत्व को राष्ट्रीय स्तर पर रेखांकित करने का अवसर प्रदान करता है।
बस्तर की संस्कृति और विरासत के लिए क्यों अहम है राष्ट्रपति का दौरा?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का बस्तर आगमन क्षेत्र की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं के लिए विशेष महत्व रखता है। बस्तर दशहरा यहां की सांस्कृतिक पहचान का प्रमुख प्रतीक है, जिसमें धार्मिक अनुष्ठानों के साथ पारंपरिक सामाजिक व्यवस्थाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। मुरिया दरबार में राष्ट्रपति की सहभागिता से इस विरासत को व्यापक पहचान मिलने की उम्मीद है। यह दौरा बस्तर की सांस्कृतिक विविधता, जनजातीय परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहर को देश के सामने प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर है।
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