Abhijeet Dipke : कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक इंटरव्यू में अपने संगठन के आंदोलन, शांतिपूर्ण प्रदर्शन, गिरफ्तारी और सरकार की भूमिका से जुड़े कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। दिल्ली में जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन और रिजीम चेंज यानी सत्ता परिवर्तन की चर्चाओं को लेकर उनसे सवाल पूछे गए। नेपाल, बांग्लादेश और फ्रांस जैसे देशों में हुए घटनाक्रमों की तरह भारत में भी हिंसा या दंगे के जरिए सत्ता परिवर्तन की कोशिश किए जाने की आशंका पर दीपके ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक और ऐतिहासिक विरासत दूसरे देशों से अलग है।
जंतर-मंतर प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई पर क्या बोले?
अभिजीत दीपके ने दावा किया कि जंतर-मंतर पर हुए बड़े विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों की ओर से हिंसा नहीं की गई। उनके मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को सामने रखने के लिए शांतिपूर्ण तरीके अपनाए, जबकि पुलिस ने उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की। दीपके ने आरोप लगाया कि छात्रों को जिस तरह से कार्रवाई का सामना करना पड़ा, वह उचित नहीं था। हालांकि, पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शन से जुड़े इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित पक्षों के बयानों और आधिकारिक रिकॉर्ड को देखना जरूरी है।
मीम्स के जरिए सरकार का विरोध कर रहे थे छात्र
दीपके के अनुसार, आंदोलन में शामिल छात्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार के खिलाफ मीम्स बनाकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विरोध का यह तरीका अपनी बात रखने का माध्यम था। उनके बयान के मुताबिक, आंदोलन को हिंसक रूप देने के बजाय छात्र व्यंग्य और सोशल मीडिया सामग्री के जरिए अपनी मांगें सामने रख रहे थे। उन्होंने भारत में नेपाल, बांग्लादेश या फ्रांस जैसी स्थिति पैदा होने की आशंकाओं पर असहमति जताई और कहा कि देश की सामाजिक तथा राजनीतिक परिस्थितियों को दूसरे देशों से सीधे जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
गांधी और आंबेडकर की विरासत का किया जिक्र
अभिजीत दीपके ने अपने विचार रखते हुए महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव आंबेडकर का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीयों ने बचपन से गांधी के अहिंसक आंदोलन और आंबेडकर के विचारों के बारे में पढ़ा है। उनके मुताबिक, भारत का स्वतंत्रता आंदोलन बड़े पैमाने पर अहिंसा और शांतिपूर्ण संघर्ष की प्रेरणा देता है। दीपके ने जोर देकर कहा कि देश की ऐतिहासिक विरासत अलग है और विरोध जताने के लिए हिंसा का रास्ता अपनाना जरूरी नहीं है। उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन को अपनी राजनीतिक और सामाजिक मांगें उठाने का माध्यम बताया।
सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी पर जताई नाराजगी
इंटरव्यू में दीपके ने सौरव दास और आशुतोष रांका के जेल में रहने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि जब दोनों जेल में थे, तब वह सोचते थे कि उन्हें भी जेल में बंद कर दिया जाए। दीपके ने आरोप लगाया कि तिरंगा लहराने के मामले में दोनों को सात दिन तक जेल में रखा गया। उन्होंने सवाल किया कि आखिर उनके खिलाफ ऐसी कार्रवाई क्यों की गई। यह दीपके का पक्ष है; मामले में आरोपों, कानूनी प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों के जवाब को अलग से समझना महत्वपूर्ण है।
अपनी गिरफ्तारी और ज्ञानेश कुमार को लेकर उठाए सवाल
अभिजीत दीपके ने अपनी गिरफ्तारी का जिक्र करते हुए दावा किया कि उन्हें फ्लाइट से हिरासत में लिया गया और रास्ते में भी उन्हें रोका गया। उन्होंने कहा कि उनके साथ की गई कार्रवाई के पीछे सरकार की मंशा पर सवाल उठते हैं। दीपके ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि सरकार उन्हें बचाने के लिए यह कदम उठा रही थी। उन्होंने सवाल किया कि ज्ञानेश कुमार सरकार के लिए इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं। इन आरोपों पर संबंधित सरकारी पक्ष का जवाब और गिरफ्तारी से जुड़े आधिकारिक विवरण सामने आने पर ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
CJP आंदोलन को लेकर आगे क्या होगा?
दीपके के बयान ने शांतिपूर्ण विरोध, पुलिस कार्रवाई, राजनीतिक जवाबदेही और गिरफ्तारी जैसे मुद्दों पर बहस को फिर चर्चा में ला दिया है। हालांकि, उनके आरोपों को अंतिम तथ्य मानने के बजाय उपलब्ध दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर परखना जरूरी है। इस पूरे घटनाक्रम में आंदोलनकारियों की मांगों, पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी के कानूनी आधार से जुड़े सवाल महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
Read More : Iran Israel War: ईरान की नई तैयारी से बढ़ा तनाव, ट्रंप ने नेतन्याहू की योजना रोकी