Cyclone Arnab : बंगाल की खाड़ी में विकसित चक्रवाती तूफान ‘अर्णब’ के संभावित प्रभाव को देखते हुए सरगुजा संभाग के किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण छत्तीसगढ़ में बारिश, तेज हवाएं, गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। उपलब्ध मौसम चेतावनी के अनुसार, 27 से 29 अक्टूबर के दौरान प्रदेश में भारी से अत्यंत भारी वर्षा हो सकती है। ऐसे में किसानों को खरीफ फसलों, खेतों और कृषि उपज की सुरक्षा के लिए पहले से जरूरी तैयारियां करने की आवश्यकता है।

धान की कटाई और मड़ाई में बरतें सावधानी
वर्तमान समय में सरगुजा क्षेत्र में धान की फसल अलग-अलग पकाव अवस्थाओं में हो सकती है। किसानों को सलाह दी गई है कि पूरी तरह पक चुकी फसल की कटाई मौसम की अनुकूल स्थिति देखकर करें। यदि खेत में फसल काटकर रखी गई है या मड़ाई के बाद धान तैयार है, तो उसे बारिश से बचाना जरूरी है। कृषि उपज को ऊंचे और सुरक्षित स्थान पर रखें तथा तिरपाल से ढककर पानी से बचाएं। भंडारण से पहले धान को पर्याप्त रूप से सुखाना भी जरूरी है, ताकि नमी से अनाज की गुणवत्ता खराब न हो।

खेतों में जल निकासी की व्यवस्था रखें दुरुस्त
लगातार बारिश होने पर खेतों में पानी भर सकता है, जिससे फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। किसानों को खेतों की निकास नालियों की सफाई करने और अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है। विशेष रूप से दलहनी फसलों, सब्जियों और बागवानी फसलों में जलभराव रोकना जरूरी है। समय रहते पानी की निकासी करने से फसलों की जड़ों को नुकसान पहुंचने की आशंका कम की जा सकती है। किसान अपने खेतों की स्थिति का आकलन कर आवश्यक इंतजाम पहले से कर लें।
सब्जियों और बागवानी फसलों को तेज हवाओं से बचाएं
तेज हवाओं की आशंका को देखते हुए सब्जियों की बेलों और कमजोर पौधों को उचित सहारा देने की सलाह दी गई है। तैयार फल और सब्जियों को सुरक्षित स्थान पर रखना भी जरूरी है, ताकि बारिश और हवा से उपज को नुकसान न पहुंचे। प्रतिकूल मौसम के दौरान अनावश्यक रूप से कीटनाशक या फफूंदनाशी का छिड़काव करने से बचना चाहिए। मौसम साफ होने के बाद किसान फसलों का निरीक्षण करें और रोग या नुकसान के संकेत मिलने पर कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेकर आवश्यक कदम उठाएं।
गरज-चमक और बिजली गिरने के दौरान सुरक्षा जरूरी
किसानों को सलाह दी गई है कि गरज-चमक या बिजली गिरने की आशंका के समय खुले खेतों में काम न करें। मौसम खराब होने पर सुरक्षित स्थान पर रहना प्राथमिकता होनी चाहिए। कृषि यंत्रों, बीज, खाद और अन्य जरूरी सामग्री को भी सुरक्षित जगह पर रखें। किसानों को भारत मौसम विज्ञान विभाग की नवीनतम चेतावनियों और स्थानीय कृषि मौसम सलाह पर नजर बनाए रखने की जरूरत है। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार कृषि कार्यों की योजना बनाने से संभावित नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।

कृषि विशेषज्ञों ने मौसम आधारित खेती पर दिया जोर
कृषि मौसम विशेषज्ञ यमलेश निषाद ने किसानों से अपील की है कि वे मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार कृषि कार्यों की योजना बनाएं और तैयार फसल तथा अनाज को बारिश से सुरक्षित रखें। सह संचालक अनुसंधान डॉ. के. एल. पैन्करा के मार्गदर्शन में किसानों को मौसम आधारित कृषि सलाह अपनाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। इसका उद्देश्य प्रतिकूल मौसम के कारण फसलों और कृषि उपज को होने वाले संभावित नुकसान को कम करना है।
स्थानीय मौसम चेतावनियों पर लगातार रखें नजर
किसानों को सलाह दी गई है कि वे मौसम विभाग और स्थानीय कृषि विशेषज्ञों की सूचनाओं का नियमित रूप से पालन करें। धान की कटाई, मड़ाई, जल निकासी और अनाज के सुरक्षित भंडारण को प्राथमिकता दें। समय रहते की गई तैयारी से बारिश और तेज हवाओं के दौरान फसल नुकसान का जोखिम घटाया जा सकता है।

