Congo Rainforest : दुनिया में नई प्राइमेट प्रजाति की खोज बेहद दुर्लभ मानी जाती है। अब अफ्रीका के कांगो के घने जंगलों में वैज्ञानिकों ने एक ऐसे बंदर की पहचान की है, जो अपनी अनोखी शारीरिक बनावट और अलग आवाज के कारण चर्चा में है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस प्रजाति को समझने के लिए कई वर्षों तक खोज अभियान चलाया गया। यह अध्ययन हाल ही में प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल PLOS One में प्रकाशित हुआ है।

साल 2008 में पहली बार कैमरे में कैद हुआ बंदर
इस बंदर की पहली तस्वीर साल 2008 में लोमामी नेशनल पार्क में खींची गई थी। हालांकि, तस्वीर स्पष्ट नहीं होने के कारण उस समय इसकी पहचान नहीं हो सकी। वर्ष 2018 में इसी तरह का एक बंदर दोबारा कैमरे में दिखाई दिया। इसके बाद फ्लोरिडा अटलांटिक यूनिवर्सिटी के मानवविज्ञानी जूनियर अंबोको ने इसकी खोज का अभियान शुरू किया। शोधकर्ताओं ने पार्क के आसपास बसे 52 गांवों के लोगों को बंदर की तस्वीरें दिखाईं।

स्थानीय शिकारियों ने बताए बंदर के नाम
शोधकर्ताओं को पता चला कि 52 गांवों में से केवल आठ गांवों के लोग ही इस बंदर को पहचान पाए। इनमें ज्यादातर जंगल में शिकार करने वाले लोग थे, जिन्हें स्थानीय वन्यजीवों की जानकारी थी। बलंगा समुदाय के लोग इसे लिकवेली कहते हैं, जबकि मितुकु समुदाय में इसे कसाब नकोनी नाम से जाना जाता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, कसाब नकोनी का अर्थ डालियां हिलाने वाला बताया गया है, जो बंदर की छलांग लगाने की शैली से जुड़ा है।
1,700 वर्ग किलोमीटर में चला खोज अभियान
वैज्ञानिकों ने 2018 से 2022 के बीच व्यापक सर्वेक्षण किया। इस दौरान लोमामी और लुआलाबा नदियों के बीच लगभग 1,700 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में बंदर को 114 बार देखा गया। ये बंदर आमतौर पर एक से 20 के समूह में नजर आते हैं। लंबे सर्वेक्षण से शोधकर्ताओं को उनके व्यवहार, आवास और शारीरिक विशेषताओं को समझने में मदद मिली।
चमकदार काला शरीर और चेहरे पर नारंगी निशान
इस बंदर का शरीर चमकदार काले रंग का है। इसके मुंह और नाक के आसपास नारंगी रंग का विशिष्ट निशान दिखाई देता है, जबकि गालों की त्वचा धूसर होती है। चेहरे की बनावट ऐसी लगती है, जैसे उसने मास्क पहन रखा हो। शरीर के पिछले हिस्से पर सफेद बालों का धब्बा भी इसकी पहचान है। इसका वजन लगभग सात किलोग्राम बताया गया है।

अनोखी आवाज ने वैज्ञानिकों का ध्यान खींचा
इस प्रजाति की पहचान केवल इसके चेहरे से नहीं होती, बल्कि इसकी आवाज भी अलग है। यह गहरी और तेज दहाड़ के साथ खर्राटे जैसी आवाज निकालता है। शोधकर्ता केट डेटवाइलर के मुताबिक, इसकी विशिष्ट आवाज इसे दूसरे कोलोबस बंदरों से अलग पहचानने में मदद करती है।
डीएनए जांच से हुई प्रजाति की पहचान
वैज्ञानिकों ने उपलब्ध नमूनों के डीएनए का अन्य बंदरों के आनुवंशिक आंकड़ों और खोपड़ी संबंधी जानकारी से मिलान किया। इस विश्लेषण के आधार पर शोधकर्ताओं ने इसे कोलोबस कॉन्गोएंसिस नाम की अलग प्रजाति के रूप में पहचाना। इसके निकट संबंधियों में ब्लैक कोलोबस बंदर शामिल हैं, जो लगभग 1,200 किलोमीटर दूर कैमरून और गैबॉन में पाए जाते हैं।
नई प्रजाति के सामने अस्तित्व का खतरा
शोधकर्ताओं के अनुसार, इस बंदर का सीमित आवास और जंगलों का नष्ट होना इसके भविष्य के लिए चिंता का विषय है। टीम ने इसे IUCN की रेड लिस्ट में संकटग्रस्त प्रजाति के रूप में शामिल करने पर विचार करने की मांग की है। कांगो का वर्षावन जैव विविधता का महत्वपूर्ण केंद्र है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि आगे के शोध से यहां छिपी अन्य अज्ञात प्रजातियों का भी पता चल सकता है।
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