India Japan Defence Relations : जापान अपनी लंबी दूरी की मिसाइलों के संचालन और प्रशिक्षण के लिए भारत की सैन्य सुविधाओं का उपयोग करने की संभावनाएं तलाश रहा है। जापान के ग्राउंड सेल्फ-डिफेंस फोर्स के प्रमुख जनरल मसयोशी अराई ने 27 अक्टूबर को बताया कि इस विषय पर समन्वय के लिए अधिकारियों को भारत भेजा गया है। हालांकि, अभी किसी संयुक्त लाइव-फायर अभ्यास, मिसाइल प्रणाली या प्रशिक्षण की तारीख को अंतिम रूप नहीं दिया गया है।

लंबी दूरी की मिसाइलों के प्रशिक्षण में क्या है चुनौती?
जापान अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने के लिए लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों पर ध्यान दे रहा है। ऐसी मिसाइलों के लिए केवल हथियारों की उपलब्धता पर्याप्त नहीं होती, बल्कि उनके संचालन, तैनाती और सुरक्षित परीक्षण का अभ्यास भी जरूरी होता है। जापान के अधिकारियों के अनुसार, लंबी दूरी की मिसाइलों के लिए उपयुक्त प्रशिक्षण क्षेत्र उपलब्ध कराना एक महत्वपूर्ण चुनौती है। इसी वजह से जापान घरेलू प्रशिक्षण सुविधाओं के साथ विदेशी विकल्पों पर भी विचार कर रहा है।

भारत की सैन्य सुविधाओं में जापान की दिलचस्पी
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जापानी रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने अक्टूबर के मध्य में भारत की कुछ परीक्षण सुविधाओं और फायरिंग रेंज का निरीक्षण किया था। संभावित प्रशिक्षण में सतह से समुद्र में मौजूद लक्ष्यों पर हमला करने वाली मिसाइलों और छोटे हमलावर ड्रोन से जुड़ी गतिविधियों पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, किस मिसाइल प्रणाली का इस्तेमाल होगा और अभ्यास कहां आयोजित किया जाएगा, इस बारे में अभी आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।
राजनाथ सिंह और शिंजिरो कोइजुमी की अहम मुलाकात
इस बीच, भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 28 अक्टूबर 2026 को फिलीपींस के सेबू में जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी से मुलाकात की। यह बैठक 13वें आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ADMM-Plus) के इतर हुई। दोनों नेताओं ने भारत-जापान के बीच जारी रक्षा सहयोग की समीक्षा की और रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के नए अवसरों पर चर्चा की।
समुद्री सुरक्षा और रक्षा तकनीक पर भी चर्चा
भारत के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने, समुद्री बारूदी सुरंगों का मुकाबला करने की क्षमताओं को बेहतर बनाने और नौसैनिक जहाजों के निर्माण एवं डिजाइन में संभावित संयुक्त सहयोग पर विचार किया। इस दौरान जापान की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की उत्पादन क्षमताओं का लाभ उठाने की संभावनाएं भी चर्चा में रहीं। दोनों देशों ने वायुसेनाओं के बीच सहयोग की प्रगति की भी समीक्षा की।

राजनाथ सिंह ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर क्या कहा?
मुलाकात के बाद राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग की समीक्षा की और भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने के नए रास्तों पर सार्थक चर्चा की। उन्होंने स्वतंत्र, खुले और शांतिपूर्ण इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को महत्वपूर्ण बताया।
क्या भारत में जल्द मिसाइल अभ्यास होगा?
भारत और जापान के बीच रक्षा संबंधों में सहयोग बढ़ रहा है, लेकिन संभावित मिसाइल प्रशिक्षण को अभी अंतिम मंजूरी मिलने की पुष्टि नहीं हुई है। अभ्यास का स्थान, समय, हथियारों का प्रकार और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाएं तय होना बाकी हैं। दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा और सैन्य तकनीक पर बढ़ती बातचीत इस घटनाक्रम को महत्वपूर्ण बनाती है। आगे की आधिकारिक घोषणाओं से स्पष्ट होगा कि भारत में जापानी मिसाइलों का वास्तविक परीक्षण या प्रशिक्षण कब और किस रूप में संभव हो पाएगा।

