Bhutan GLOF Alert : हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर झील टूटने की एक गंभीर घटना ने भारत के पूर्वोत्तर और उत्तरी बंगाल के मैदानी इलाकों में चिंता बढ़ा दी है। भूटान के ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्र में स्थित शिंताफु तशो (Shinta Phu Tsho) झील का बांध टूटने से अचानक भारी मात्रा में पानी नीचे की ओर बहने लगा है। इस घटना के बाद असम और पश्चिम बंगाल के संवेदनशील इलाकों में हाई अलर्ट जारी किया गया है। प्रशासन ने नदियों के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने की सलाह दी है।

तक्त्सेमाखांग के पास हुई घटना, नदियों में तेजी से बढ़ रहा पानी
जानकारी के मुताबिक, यह घटना भूटान के तक्त्सेमाखांग के आसपास स्थित शिंताफु तशो झील में हुई। ग्लेशियर से जुड़ी इस झील के टूटने के बाद पानी और मलबे का तेज बहाव नीचे की ओर बढ़ रहा है। इससे भूटान से भारत की तरफ आने वाली नदी प्रणालियों में जलस्तर अचानक बढ़ने की आशंका है। विशेष रूप से मो छू और संकोश नदी के आसपास के क्षेत्रों पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। अधिकारियों को आशंका है कि पानी का तेज बहाव निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा कर सकता है।

अगले 5 से 6 घंटे अहम, लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह
राज्य मंत्री निशिथ प्रमाणिक ने बताया कि भूटान में ग्लेशियर झील फटने की सूचना मिली है। झील का पानी ओवरफ्लो होकर मो छू नदी में पहुंच रहा है और संकोश नदी की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि संकोश नदी और उसकी सहायक नदियों के किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क कर दिया गया है। स्थानीय निवासियों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। उनके अनुसार, अगले पांच से छह घंटों में पानी मैदानी इलाकों तक पहुंच सकता है। इस दौरान भारी बाढ़ आने की आशंका को देखते हुए राज्य आपदा प्रबंधन टीम को सक्रिय कर दिया गया है। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) को भी सूचित किया गया है।
असम के चार और बंगाल के दो जिलों में बाढ़ की चेतावनी
संभावित खतरे को देखते हुए असम और पश्चिम बंगाल का प्रशासन अलर्ट मोड में है। असम के कोकराझार, बक्सा, चिरांग और धुबरी जिलों में विशेष निगरानी की जा रही है। वहीं पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार जिलों में भी बाढ़ की चेतावनी जारी की गई है। राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल और स्थानीय प्रशासन ने चौबीसों घंटे काम करने वाले नियंत्रण कक्ष स्थापित किए हैं। अधिकारी लगातार नदियों के जलस्तर की जानकारी जुटा रहे हैं। अचानक पानी बढ़ने से फ्लैश फ्लड और नदी किनारों के कटाव का खतरा बना हुआ है।
कृषि भूमि, बस्तियों और बुनियादी ढांचे पर मंडरा रहा खतरा
नदियों में पानी का स्तर तेजी से बढ़ने पर सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले हजारों लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। नदी किनारे स्थित गांव, कृषि भूमि, सड़कें और अन्य बुनियादी सुविधाएं प्रभावित होने की आशंका है। तेज बहाव के साथ आने वाला मलबा और गाद नुकसान को और गंभीर बना सकता है। प्रशासन की प्राथमिकता लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना और संभावित जनहानि को रोकना है।

हिमालय में क्यों बढ़ रही हैं GLOF जैसी घटनाएं?
ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF ऐसी स्थिति है, जब ग्लेशियर के पास बनी झील का प्राकृतिक या मोरेन से बना बांध टूट जाता है। इसके बाद झील में जमा पानी अचानक तेज गति से नीचे की ओर बहने लगता है। हिमालयी क्षेत्र में तापमान बढ़ने और ग्लेशियरों के पीछे हटने से ऐसी झीलों का आकार बढ़ रहा है। कई झीलों के प्राकृतिक बांध अस्थिर हो रहे हैं। यही वजह है कि GLOF की घटनाएं पहाड़ी और मैदानी दोनों क्षेत्रों के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं।
नेपाल-तिब्बत बाढ़ के बाद फिर बढ़ी हिमालयी आपदाओं की चिंता
यह अलर्ट अगस्त 2026 में नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास आई भीषण बाढ़ की घटना के बाद आया है। उस दौरान पहाड़ी ढलानों के धंसने और ग्लेशियर झीलों से पानी निकलने के कारण भारी मात्रा में मलबा बह गया था। सीमावर्ती बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा और बाढ़ का असर भारत की ओर भी महसूस किया गया। भूटान की ताजा घटना ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि हिमालयी क्षेत्र में आने वाली प्राकृतिक आपदाएं किसी एक देश तक सीमित नहीं रहतीं। ऐसे में समय रहते चेतावनी, आपसी समन्वय और राहत-बचाव की तैयारी बेहद जरूरी है।
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