PM Modi Brussels Visit : भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच आर्थिक रिश्तों को नई ऊंचाई मिलने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिसंबर में बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स का दौरा कर सकते हैं। इस दौरान भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जाने की संभावना है। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने इसकी जानकारी दी है। इस समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद इसे लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और दोनों पक्षों के आर्थिक सहयोग को मजबूती मिल सकती है।

एंटोनियो कोस्टा ने प्रधानमंत्री मोदी के दौरे की दी जानकारी
कनाडा के मॉन्ट्रियल में मॉन्ट्रियल काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के एक कार्यक्रम में एंटोनियो कोस्टा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिसंबर में समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए ब्रुसेल्स आएंगे। उनके बयान के मुताबिक, यह दौरा 17 दिसंबर को होने वाली यूरोपीय नेताओं की बैठक से ठीक पहले हो सकता है। हालांकि, यात्रा और हस्ताक्षर से जुड़ी अंतिम आधिकारिक जानकारी का इंतजार रहेगा।

दो अरब से अधिक लोगों के बाजार को मिलेगा नया अवसर
भारत और यूरोपीय संघ के बीच होने वाला यह समझौता दुनिया के सबसे बड़े व्यापारिक समझौतों में शामिल हो सकता है। इसके जरिए भारत और EU के 27 सदस्य देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। अनुमान है कि इस समझौते से दो अरब से अधिक लोगों का बाजार एक साथ जुड़ेगा। यह बाजार वैश्विक अर्थव्यवस्था के लगभग एक चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में इसका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश पर भी पड़ सकता है।
भारतीय निर्यात को यूरोपीय बाजार में मिलेगी बड़ी राहत
समझौते का प्रमुख उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच व्यापारिक बाधाओं को कम करना और कंपनियों के लिए बाजार तक पहुंच आसान बनाना है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत भारत के 99 प्रतिशत से अधिक निर्यात को यूरोपीय बाजार में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलने की उम्मीद है। इससे भारतीय टेक्सटाइल, कपड़ा, चमड़ा, आभूषण और रत्न उद्योग को लाभ मिल सकता है। इन क्षेत्रों के कारोबारियों को यूरोप में अपने उत्पाद प्रतिस्पर्धी कीमतों पर बेचने का अवसर मिलेगा।
यूरोपीय कंपनियों को भी भारत में मिलेगा फायदा
इस समझौते से यूरोपीय संघ को भी भारतीय बाजार में व्यापार बढ़ाने का अवसर मिलेगा। EU से भारत आने वाले सामानों के बड़े हिस्से पर आयात शुल्क में कटौती या छूट दिए जाने का प्रस्ताव है। इससे यूरोपीय कंपनियों के लिए भारत में कारोबार करना आसान हो सकता है। दोनों पक्षों को उम्मीद है कि व्यापारिक नियमों में सरलता आने से निवेश, उत्पादन और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

ऑटोमोबाइल और संवेदनशील क्षेत्रों पर चरणबद्ध राहत
समझौते में सभी क्षेत्रों को एक जैसी छूट नहीं दी गई है। ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में आयात शुल्क कम करने की प्रक्रिया धीरे-धीरे लागू की जाएगी। भारत ने घरेलू कृषि और डेयरी उद्योग को इस समझौते से बाहर रखा है। इसका उद्देश्य किसानों, दुग्ध उत्पादकों और घरेलू बाजार के हितों की सुरक्षा करना है।
IT और प्रोफेशनल सेवाओं को भी मिलेगा अवसर
भारत-EU समझौता केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें सूचना प्रौद्योगिकी, पेशेवर सेवाओं, बिजनेस कंसल्टिंग और अनुसंधान एवं विकास जैसे सेवा क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है। इससे भारतीय IT कंपनियों और पेशेवरों को यूरोपीय बाजार में अपनी सेवाएं विस्तार देने के बेहतर अवसर मिल सकते हैं।
136.54 अरब डॉलर तक पहुंचा भारत-EU का व्यापार
भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों पक्षों के बीच वस्तुओं का कुल व्यापार 136.54 अरब डॉलर तक पहुंच गया। प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते से इस कारोबार में और वृद्धि की उम्मीद है। दिसंबर में होने वाले संभावित हस्ताक्षर दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकते हैं।
Read More : INDIA Alliance News : खराब मौसम से टला INDIA गठबंधन का जन महाभियोग कार्यक्रम, अब 31 अक्टूबर को होगा आयोजन

