Bolivia Emergency : दक्षिण अमेरिकी देश बोलीविया में संभावित भीषण सूखे और बाढ़ के खतरे को देखते हुए सरकार ने देशभर में आपातकाल घोषित कर दिया है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस साल के अंत तक एल नीनो का प्रभाव बेहद शक्तिशाली हो सकता है। इसके कारण देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का मिजाज बिगड़ने और प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ने की आशंका है। सरकार ने हालात से निपटने के लिए संसाधनों और अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती का रास्ता साफ कर दिया है।
राष्ट्रपति रोड्रिगो पाज ने आपातकालीन आदेश पर किए हस्ताक्षर
अल-जजीरा की 1 नवंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, बोलीविया के राष्ट्रपति रोड्रिगो पाज ने शनिवार को देशव्यापी आपातकाल घोषित करने वाले आधिकारिक आदेश पर हस्ताक्षर किए। इसके साथ ही उन्होंने सूखे और बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव दलों की अतिरिक्त तैनाती करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का उद्देश्य प्रभावित लोगों तक जल्द से जल्द सहायता पहुंचाना और संभावित नुकसान को कम करना है।

एल नीनो से सूखे और बाढ़ का गंभीर संकट
राष्ट्रपति पाज ने चेतावनी दी कि एल नीनो के कारण देश में सूखे और बाढ़ की स्थिति बेहद भयावह हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस प्राकृतिक संकट से निपटने के लिए सभी सरकारी संस्थाओं और संबंधित विभागों को मिलकर काम करना होगा। आपातकाल लागू होने से प्रशासन को जरूरत के मुताबिक कर्मचारियों, राहत सामग्री और अन्य जरूरी संसाधनों का इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी।

छह प्रशासनिक विभागों में हजारों परिवार सूखे से प्रभावित
बोलीविया सरकार की ओर से इस सप्ताह जारी रिपोर्ट में सूखे की गंभीर तस्वीर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, देश के कुल नौ प्रशासनिक विभागों में से छह विभाग सूखे की चपेट में हैं। इसके कारण लगभग 78 हजार परिवार प्रभावित हुए हैं। खेती और पशुपालन पर निर्भर लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। सूखे के चलते देश में 75 हजार से ज्यादा मवेशियों की मौत होने की भी जानकारी सामने आई है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है।
पहले भी बाढ़ मचा चुकी है भारी तबाही
बोलीविया के सामने सिर्फ सूखे का ही खतरा नहीं है, बल्कि कई क्षेत्रों में भीषण बाढ़ की आशंका भी बनी हुई है। दिसंबर 2025 में देश के सांता क्रूज क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ के कारण दर्जनों लोगों की जान चली गई थी। पड़ोसी देशों में भी मौसम की चरम परिस्थितियां देखने को मिल रही हैं। चिली की राजधानी सैंटियागो में अक्टूबर के दौरान रिकॉर्ड बारिश दर्ज की गई, जबकि पिछले महीने पेरू में जंगलों में लगी आग के कारण कम से कम 12 लोगों की मौत हुई थी।

क्या है एल नीनो, क्यों बदल जाता है दुनिया का मौसम?
एल नीनो प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान में असामान्य बढ़ोतरी से जुड़ी एक प्राकृतिक जलवायु घटना है। यह सामान्यतः हर दो से सात साल के अंतराल पर विकसित होती है। इसके प्रभाव से समुद्र और वायुमंडल के बीच होने वाली प्रक्रियाओं में बदलाव आता है। नतीजतन दुनिया के विभिन्न हिस्सों में हवा का रुख, वायुदाब और बारिश का सामान्य पैटर्न प्रभावित होता है। कहीं अत्यधिक बारिश और बाढ़ आती है, तो कहीं लंबे समय तक सूखे की स्थिति बन सकती है।
2026 के अंत तक चरम पर पहुंच सकता है एल नीनो
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस बार एल नीनो का प्रभाव काफी शक्तिशाली हो सकता है। इसके 2026 के आखिरी महीनों में अपने अधिकतम स्तर पर पहुंचने की आशंका है। हालांकि, इसका असर 2027 के दौरान भी जारी रह सकता है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस जलवायु घटना के कारण दुनिया के कई देशों में गंभीर मानवीय संकट पैदा हो सकता है।
गरीब देशों पर सबसे ज्यादा पड़ सकता है असर
पूर्वानुमानों में आशंका जताई गई है कि एल नीनो से जुड़ी चरम मौसमी परिस्थितियों के कारण दुनिया भर में 4.5 लाख से अधिक लोगों की मौत हो सकती है। विशेष रूप से गरीब और विकासशील देशों के लोग सबसे ज्यादा जोखिम में रहेंगे, क्योंकि उनके पास प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होते।
विश्व मौसम संगठन ने भी दी थी गंभीर चेतावनी
इससे पहले सितंबर की शुरुआत में विश्व मौसम संगठन (WMO) ने संकेत दिया था कि फरवरी 2027 तक एल नीनो का प्रभाव बने रहने की संभावना लगभग 100 प्रतिशत हो सकती है। ऐसे में बोलीविया सरकार का देशव्यापी आपातकाल घोषित करना आने वाले महीनों में संभावित जलवायु संकट की गंभीरता को दर्शाता है।


