Amit Shah Targets Rahul Gandhi : तेलंगाना में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) प्रक्रिया को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस पर कथित तौर पर एसआईआर को लेकर गलत प्रचार करने का आरोप लगाते हुए तेलंगाना बीजेपी ने पदयात्रा निकाली। इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हुए। पदयात्रा के बाद उन्होंने कांग्रेस और विपक्षी इंडी गठबंधन पर जमकर निशाना साधा। अमित शाह ने विपक्ष की ओर से आयोजित मॉक पार्लियामेंट और राहुल गांधी की राजनीतिक रणनीति को लेकर कई तीखी टिप्पणियां कीं।
राहुल गांधी पर तंज, मॉक पार्लियामेंट में प्रधानमंत्री बनने की सलाह
अमित शाह ने राहुल गांधी को संबोधित करते हुए कहा कि दो दिन पहले विपक्ष ने मॉक पार्लियामेंट आयोजित की थी। अगर राहुल गांधी उनसे सलाह लेते तो वह उन्हें कम से कम एक बार इस प्रतीकात्मक संसद में प्रधानमंत्री बनने का सुझाव देते। शाह ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी वास्तविक संसद में कभी प्रधानमंत्री नहीं बन पाएंगे, इसलिए मॉक पार्लियामेंट में प्रधानमंत्री बनकर कम से कम सोनिया गांधी को थोड़ी शांति मिल सकती थी।

गृह मंत्री की यह टिप्पणी कांग्रेस और गांधी परिवार पर उनके राजनीतिक हमले का हिस्सा रही। उन्होंने विपक्ष के इस आयोजन को लेकर सवाल उठाए और राहुल गांधी की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं पर भी कटाक्ष किया।

अमित शाह बोले- विदेश दौरे से नहीं जीते जाते चुनाव
राहुल गांधी की राजनीति पर हमला जारी रखते हुए अमित शाह ने कहा कि केवल इस तरह चुनाव नहीं जीते जा सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी तीन-चार महीने देश में रहते हैं और इसके बाद विदेश चले जाते हैं। शाह ने कहा कि चुनाव जीतने के लिए देश में रहकर मेहनत करनी होगी और जनता के बीच समय बिताना होगा।
उन्होंने राहुल गांधी को सलाह देते हुए कहा कि उन्हें लोगों के साथ जुड़कर उनकी समस्याओं को समझना और समाधान के लिए काम करना चाहिए। शाह के मुताबिक, राजनीति में सफलता के लिए जनता के बीच लगातार सक्रिय रहना जरूरी है।

संसद के विशेष सत्र को लेकर राहुल गांधी को चुनौती
अमित शाह ने संसद की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि देश की संसद के माध्यम से संविधान के प्रति जिम्मेदारियां निभाई जाती हैं। उन्होंने राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वह संसद को सुचारू रूप से चलने नहीं देते। हैदराबाद की सभा से उन्होंने राहुल गांधी को खुली चुनौती देते हुए कहा कि सरकार संसद का विशेष सत्र बुलाने के लिए तैयार है और विपक्ष को चर्चा में हिस्सा लेना चाहिए।
शाह ने दावा किया कि राहुल गांधी इस चर्चा में शामिल नहीं होंगे, क्योंकि उनके अनुसार कांग्रेस केवल हंगामे और अव्यवस्था के जरिए सुर्खियों में बने रहना चाहती है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि यदि संसद में चर्चा होगी तो सरकार विपक्ष के सवालों का जवाब देगी।
कांग्रेस को बताया वेंटिलेटर पर चल रही पार्टी
गृह मंत्री ने कांग्रेस पर हमला करते हुए पार्टी की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस खुद वेंटिलेटर पर है और क्या ऐसी पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ राजनीतिक मुकाबले में टिक सकती है?
अमित शाह ने राहुल गांधी को चुनौती देते हुए कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री मोदी से मुकाबले की बात छोड़ देनी चाहिए। यहां तक कि तेलंगाना युवा मोर्चा के अध्यक्ष भी उन्हें हरा सकते हैं। उनके इस बयान को कांग्रेस नेतृत्व पर सीधा राजनीतिक हमला माना जा रहा है।
क्या था विपक्ष की मॉक पार्लियामेंट का एजेंडा?
दरअसल, कांग्रेस और विपक्षी इंडी गठबंधन ने 31 अक्टूबर 2026 को मॉक पार्लियामेंट का आयोजन किया था। इसका उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जनता की अदालत में प्रतीकात्मक महाभियोग की प्रक्रिया चलाना था।
इस आयोजन के जरिए विपक्ष ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और एसआईआर यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर सवाल उठाए थे। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया में कई तरह की अनियमितताएं हो सकती हैं। वहीं बीजेपी इस प्रक्रिया का बचाव करते हुए कांग्रेस पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगा रही है।
SIR को लेकर बीजेपी और विपक्ष के बीच बढ़ी राजनीतिक तकरार
एसआईआर का मुद्दा अब केवल मतदाता सूची के पुनरीक्षण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का बड़ा विषय बन चुका है। एक ओर विपक्ष चुनाव आयोग की निष्पक्षता और प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है, वहीं बीजेपी विपक्ष के विरोध को राजनीतिक प्रचार बता रही है।
हैदराबाद में अमित शाह के बयान के बाद यह विवाद और तेज होने के संकेत हैं। अब देखना होगा कि राहुल गांधी और कांग्रेस इस चुनौती का क्या जवाब देते हैं और संसद के विशेष सत्र को लेकर आगे क्या राजनीतिक घटनाक्रम सामने आता है।
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