Dhanteras 2026 : दीपावली का पांच दिवसीय महापर्व धनतेरस से शुरू होता है। इस दिन सोना, चांदी, बर्तन और अन्य शुभ वस्तुओं की खरीदारी करना बेहद मंगलकारी माना जाता है। इसके अलावा भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की नई मूर्तियां खरीदने की भी सदियों पुरानी परंपरा है। मान्यता है कि दीपावली की रात विधि-विधान से इनकी पूजा करने पर घर में सुख, शांति, समृद्धि और धन-धान्य का आगमन होता है। हालांकि, मूर्ति खरीदते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना जरूरी है। धार्मिक मान्यताओं और वास्तु शास्त्र के अनुसार, मूर्ति का आकार, बनावट, धातु और भगवान की मुद्रा का विशेष महत्व होता है। आइए जानते हैं धनतेरस पर गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
प्लास्टर ऑफ पेरिस और प्लास्टिक की मूर्तियां खरीदने से बचें
धनतेरस के मौके पर बाजारों में गणेश-लक्ष्मी की आकर्षक और रंग-बिरंगी मूर्तियों की भरमार रहती है। इनमें कई मूर्तियां प्लास्टर ऑफ पेरिस, प्लास्टिक और अन्य सिंथेटिक सामग्री से तैयार की जाती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा के लिए ऐसी मूर्तियों को प्राथमिकता नहीं देनी चाहिए। इसके बजाय मिट्टी, पीतल, चांदी या अष्टधातु से बनी मूर्तियां खरीदना बेहतर माना जाता है। विशेष रूप से मिट्टी की मूर्तियों को पवित्रता और प्राकृतिक शुद्धता का प्रतीक माना जाता है।

खंडित मूर्ति खरीदना माना जाता है अशुभ
भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की मूर्ति खरीदते समय उसकी बनावट को अच्छी तरह जांचना चाहिए। मूर्ति कहीं से टूटी, दरार वाली या खंडित नहीं होनी चाहिए। धार्मिक मान्यताओं में खंडित मूर्ति को पूजा के लिए उचित नहीं माना गया है। इसलिए दुकान से मूर्ति लेते समय उसके हाथ, पैर, मुकुट, आभूषण और अन्य हिस्सों को ध्यान से देख लें। मूर्ति पूरी तरह सुरक्षित और सुंदर होनी चाहिए।

गणेश जी और माता लक्ष्मी की बैठी हुई मुद्रा चुनें
मूर्ति खरीदते समय भगवान की मुद्रा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। मान्यता के अनुसार, माता लक्ष्मी की बैठी हुई मूर्ति घर में स्थापित करना शुभ माना जाता है। इसे धन और समृद्धि में स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। वहीं भगवान गणेश की मूर्ति में उनकी सूंड बाईं तरफ मुड़ी हुई होनी चाहिए। माता लक्ष्मी को कमल के फूल पर विराजमान दिखाने वाली मूर्ति को भी शुभ माना जाता है।
मूर्ति में मूषक और उल्लू का होना भी जरूरी
गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति खरीदते समय उनके वाहनों पर भी ध्यान देना चाहिए। भगवान गणेश के साथ उनका वाहन मूषक और माता लक्ष्मी के साथ उनका वाहन उल्लू बना होना शुभ माना जाता है। इसके अलावा माता लक्ष्मी के हाथों से स्वर्ण मुद्राओं की वर्षा होती हुई दिखाई दे, तो ऐसी मूर्ति को भी विशेष रूप से शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इससे घर में धन-धान्य और खुशहाली का प्रतीकात्मक संदेश मिलता है।

घर के मंदिर के अनुसार ही खरीदें मूर्ति का आकार
कई बार लोग बाजार में बड़ी और आकर्षक मूर्तियां देखकर उन्हें खरीद लेते हैं। हालांकि, घर के मंदिर में मूर्ति स्थापित करने के लिए उसके आकार का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। वास्तु संबंधी मान्यताओं के अनुसार, घर के पूजा स्थल के अनुरूप मध्यम आकार की मूर्तियां रखना उचित माना जाता है। मूर्ति इतनी बड़ी नहीं होनी चाहिए कि उसे मंदिर में व्यवस्थित तरीके से स्थापित करने में परेशानी हो।
धनतेरस पर मूर्ति घर लाने के बाद अपनाएं ये नियम
गणेश-लक्ष्मी की नई मूर्तियां घर लाने के बाद उनकी साफ-सफाई और स्थापना का विशेष ध्यान रखना चाहिए। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, मूर्तियों को घर लाने के बाद सीधे पूजा स्थल पर रखना उचित माना जाता है। दीपावली की पूजा से पहले उन्हें बार-बार एक स्थान से दूसरे स्थान पर रखने से बचना चाहिए।पूजा के दिन मूर्तियों को गंगाजल से शुद्ध करके विधि-विधान से स्थापित करें। इसके बाद भगवान गणेश और माता लक्ष्मी का आह्वान करते हुए दीप, धूप, फूल, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें। ध्यान रखें कि पूजा के दौरान श्रद्धा और स्वच्छता का विशेष महत्व होता है।


