Nimisha Priya case : यमन में हत्या की दोषी करार दी गईं केरल की नर्स निमिषा प्रिया को लेकर एक बार फिर तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई है। मृतक अलाल अब्दु मेहदी के भाई अब्देलफत्ताह मेहदी ने तीसरी बार यमन के उप-अटॉर्नी जनरल को पत्र लिखकर निमिषा की तत्काल फांसी की मांग की है। उन्होंने यह पत्र सोशल मीडिया पर भी साझा किया, जिसमें कहा गया है कि “यमन के इतिहास में इतनी दर्दनाक हत्या पहले कभी नहीं हुई।”

“माफ़ नहीं किया जाएगा”
अब्देलफत्ताह ने पत्र में स्पष्ट किया कि उनके परिवार के लिए माफ़ी का कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि निचली अदालत पहले ही निमिषा को मौत की सज़ा दे चुकी है और अब देर किए बिना फांसी दी जानी चाहिए। उन्होंने ‘रक्तमूल्य’ के बदले माफ़ी की संभावनाओं को भी फिर से सिरे से खारिज कर दिया है।

कौन हैं निमिषा प्रिया?
निमिषा, केरल के पलक्कड़ की रहने वाली हैं और 2008 से यमन के एक अस्पताल में बतौर नर्स कार्यरत थीं। उनके पति और बेटी 2014 में भारत लौट आए थे, लेकिन वे यमन में ही रहीं। वर्ष 2017 में उन पर एक यमनी नागरिक अलाल की हत्या कर शव के टुकड़े करने का आरोप लगा।
2018 में, यमन की अदालत ने उन्हें मौत की सज़ा सुनाई। प्रिया के परिवार ने भारत में और यमन में उनकी जान बचाने के लिए कानूनी और कूटनीतिक स्तर पर प्रयास किए। भारत सरकार ने भी उनकी सज़ा को टालने की कोशिशें कीं, जिसके चलते फिलहाल फांसी पर अस्थायी रोक लगी हुई है।
‘रक्तमूल्य’ से भी नहीं बनी बात
यमन की शरीया आधारित कानूनी प्रणाली में, पीड़ित परिवार चाहें तो ‘दिया’ (रक्तमूल्य) लेकर दोषी को माफ़ कर सकते हैं। इसी के तहत, भारत से सुन्नी धर्मगुरु कंदपुरम एपी अबू बकर मुसलियार ने यमन के धर्मगुरु शेख उमर हाफिज से संपर्क किया। शेख उमर ने मृतक के परिवार से माफी की संभावनाएं टटोलने की कोशिश की, लेकिन परिवार ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया कि वे किसी कीमत पर माफ़ नहीं करेंगे।
भारत की चिंता, रास्ते सीमित
भारत सरकार और सामाजिक कार्यकर्ता इस कोशिश में लगे हैं कि किसी तरह निमिषा की फांसी को टालकर माफ़ी या सज़ा में राहत का मार्ग निकाला जाए। लेकिन अब्देलफत्ताह के इस तीसरे पत्र के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है। कूटनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि अगर पीड़ित परिवार अपनी जिद पर अड़ा रहा तो भारत के पास विकल्प सीमित रह जाएंगे।
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