Frank Caprio : दुनियाभर में मशहूर और ‘सबसे दयालु जज’ कहलाने वाले फ्रैंक कैप्रियो का 88 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे पैनक्रियाटिक कैंसर से लंबे समय से जूझ रहे थे। दिसंबर 2023 में उन्हें इस बीमारी का पता चला था और मई 2024 तक उन्होंने कीमोथेरेपी व रेडिएशन का पूरा कोर्स भी कराया। लेकिन उम्र और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के चलते वे रिकवर नहीं कर पाए। उनके निधन की जानकारी उनके आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर दी गई।

अनोखे अंदाज से दुनिया भर में पाई लोकप्रियता
फ्रैंक कैप्रियो को अदालत में उनके मानवीय और संवेदनशील फैसलों के लिए जाना जाता था। उनका लोकप्रिय शो Caught in Providence दुनियाभर में देखा गया, जिसमें वे हंसी-मजाक और सहानुभूतिपूर्ण लहजे में लोगों की सुनवाई करते थे। इसी वजह से उन्हें ‘दुनिया का सबसे दयालु जज’ कहा जाता था। पिछले कई सालों से कैप्रियो के कोर्टरूम वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल होते रहे। इन वीडियोज़ में वे लोगों के साथ बेहद आत्मीयता से बातचीत करते और इंसाफ के साथ मानवीय संवेदनशीलता का संतुलन दिखाते थे। उनके निधन के बाद दुनियाभर से लोग उन्हें याद कर श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

अमेरिका में शोक, कोर्टरूम का नाम बदला गया
कैप्रियो के निधन के बाद अमेरिका के रोड आइलैंड में सभी सरकारी भवनों पर झंडे आधे झुका दिए गए। साथ ही प्रोविडेंस म्यूनिसिपल कोर्ट का नाम बदलकर ‘द चीफ जज फ्रैंक कैप्रियो कोर्टरूम’ रख दिया गया है, ताकि उनकी दयालुता और इंसाफ की मिसाल हमेशा याद रखी जा सके। फ्रैंक कैप्रियो ने 1985 से 2023 तक अमेरिका की न्यायपालिका में सेवा दी। वे प्रोविडेंस म्यूनिसिपल कोर्ट के मुख्य जज रहे। 38 साल के लंबे कार्यकाल में उन्होंने हजारों केसों की सुनवाई की और अपने अनोखे फैसलों से न्याय व्यवस्था में मानवीय दृष्टिकोण का नया आयाम जोड़ा।
इटली से अमेरिका तक का सफर
कैप्रियो का जन्म रोड आइलैंड के प्रोविडेंस में हुआ था, उनका परिवार मूल रूप से इटली से था। उनके पिता एंटोनियो कैप्रियो फल और दूध बेचते थे, जबकि मां फिलामेना गृहिणी थीं। स्कूली दिनों में कैप्रियो कुश्ती के अच्छे खिलाड़ी रहे और 1953 में स्टेट रेसलिंग चैंपियन भी बने। 1958 में ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने बोस्टन यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई की। लॉ की पढ़ाई के दौरान उन्होंने बर्तन धोने, जूते पॉलिश करने और अखबार बांटने जैसे काम किए, ताकि अपनी पढ़ाई का खर्च निकाल सकें। दिनभर काम करने और रात को पढ़ाई करने की उनकी लगन ने ही उन्हें अमेरिकी न्यायपालिका तक पहुंचाया।
राजनीति और शिक्षा में भी सक्रिय
फ्रैंक कैप्रियो 1962 से 1968 तक प्रोविडेंस सिटी काउंसिल के सदस्य रहे। 1970 में उन्होंने रोड आइलैंड के अटॉर्नी जनरल पद के लिए चुनाव भी लड़ा, हालांकि वे हार गए। बाद में वे रोड आइलैंड बोर्ड ऑफ गवर्नर्स फॉर हायर एजुकेशन के अध्यक्ष बने और बोस्टन लॉ यूनिवर्सिटी में ‘कैप्रियो स्कॉलरशिप फंड’ की स्थापना की। फरवरी 2025 में उनकी किताब Compassion in the Court: Life-Changing Stories from America’s Nicest Judge प्रकाशित हुई। इसमें उन्होंने अपने जीवन और कोर्टरूम के अनुभव साझा किए, जो इंसाफ के साथ दया और करुणा के महत्व को उजागर करते हैं।
पारिवारिक जीवन और विरासत
फ्रैंक कैप्रियो की पत्नी जोयस ई. कैप्रियो के साथ उनका 60 साल लंबा साथ रहा। उनके पांच बच्चे फ्रैंक टी., डेविड, मारिसा, जॉन और पॉल हैं। उनके 7 पोते-पोतियां और 2 परपोते भी हैं। अपने फैसलों और जीवन के जरिए वे न केवल अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया में हमेशा ‘दयालु न्यायाधीश’ के रूप में याद किए जाएंगे। कैप्रियो के कोर्टरूम फैसले लोगों को हमेशा याद रहेंगे। चाहे कैंसर से जूझ रहे बेटे को डॉक्टर के पास ले जाने वाले 96 वर्षीय बुजुर्ग का जुर्माना माफ करना हो या अकेली मां की आर्थिक मदद करना—उन्होंने हर बार इंसाफ को इंसानियत से जोड़ा। यही वजह है कि उन्हें इतिहास में हमेशा ‘सबसे दयालु जज’ के तौर पर याद किया जाएगा।
Read More : Dream11 ban : ऑनलाइन गेमिंग बिल पास, ड्रीम 11 पर मंडरा रहा बैन का खतरा










