Jamui police raid: बिहार के जमुई जिले के कद्दुआ तरी गांव में शुक्रवार को देसी शराब के खिलाफ कार्रवाई करने पहुंची पुलिस टीम पर ग्रामीणों ने दौड़ा-दौड़ाकर हमला कर दिया। लाठी-डंडों से लैस करीब 50 से ज्यादा ग्रामीणों ने पुलिसकर्मियों की जमकर पिटाई की, जिसमें महिला सब-इंस्पेक्टर (SI) उर्मिला कुमारी, SI शुभम झा सहित 6 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हो गए। इस घटना का वीडियो शनिवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसने प्रशासन को हिलाकर रख दिया है।

क्या है पूरा मामला?
जमुई पुलिस को सूचना मिली थी कि कद्दुआ तरी गांव में बड़े पैमाने पर देसी शराब बनाई जा रही है। इसी सूचना के आधार पर पुलिस टीम गांव में छापेमारी करने पहुंची। गांव में छापा पड़ते ही ग्रामीण उग्र हो गए और लाठी-डंडों से लैस भीड़ ने पुलिस टीम पर हमला बोल दिया।

वीडियो में क्या दिखा?
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि महिला और पुरुष ग्रामीणों की भीड़ ने एक सिपाही को पकड़ लिया और उसे डंडों से बेरहमी से पीटा। एक युवक पुलिसकर्मी के हथियार को छीनने की कोशिश करता नजर आ रहा है, जबकि सिपाही हाथ जोड़कर जान बख्शने की मिन्नतें करता है। वहीं, SI शुभम झा को 200 मीटर तक दौड़ाया गया, और महिला SI उर्मिला कुमारी को भी भीड़ ने घेर लिया। डर के मारे महिला अधिकारी रोने लगीं, जिससे हालात और संवेदनशील हो गए।
धार्मिक आयोजन बना टकराव की वजह?
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कद्दुआ तरी गांव आदिवासी बहुल इलाका है, और घटना के वक्त करमा पर्व को लेकर पूजा-पाठ चल रही थी। पुलिस की रेड को ग्रामीणों ने धार्मिक आयोजन में बाधा के रूप में देखा, जिससे आक्रोश भड़क उठा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने बिना जानकारी दिए छापा मारा, जिससे भावनाएं आहत हुईं।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
घटना के बाद जमुई पुलिस अधीक्षक ने बताया कि हमले में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है, और जल्द ही कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। मामले में अज्ञात ग्रामीणों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है और वीडियो फुटेज के आधार पर पहचान की प्रक्रिया जारी है।
क्या कहता है कानून?
बिहार में शराबबंदी कानून पहले से लागू है और इसके तहत घरेलू या देसी शराब का निर्माण, भंडारण और बिक्री पूरी तरह से प्रतिबंधित है। ऐसे में पुलिस की कार्रवाई कानून के अनुरूप थी, लेकिन भीड़ द्वारा कानून के रक्षकों पर हमला गंभीर चिंता का विषय है।
जमुई की यह घटना न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि शराबबंदी कानून को लागू करना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। साथ ही, यह मामला दर्शाता है कि स्थानीय जनभावनाओं और धार्मिक आयोजनों को नजरअंदाज कर की गई कार्रवाई कभी-कभी हिंसक रूप भी ले सकती है।
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