India Ukraine Fuel Trade: यूक्रेन भारत से डीजल आयात पर लगाएगा प्रतिबंध, रूस से तेल खरीद को बताया कारण

India Ukraine Fuel Trade:  रूस-यूक्रेन युद्ध की आंच अब भारत-यूक्रेन व्यापार संबंधों तक पहुंच गई है। यूक्रेनी ऊर्जा कंसल्टेंसी एनकोर (Enkorr) ने सोमवार को घोषणा की कि यूक्रेन 1 अक्टूबर 2025 से भारत से डीजल आयात पर प्रतिबंध लगाएगा। इस कदम के पीछे तर्क दिया गया है कि भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है, जिससे यूक्रेन की राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा है।

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क्या है पूरा मामला?

एनकोर ने कहा है कि रूस द्वारा यूक्रेनी तेल रिफाइनरियों पर किए जा रहे ड्रोन और मिसाइल हमलों के बीच यह जरूरी हो गया है कि तेल आयात के स्रोतों की गंभीरता से जांच हो। रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन की सुरक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि भारत से आने वाले हर डीजल की खेप की जांच की जाए ताकि उसमें रूसी मूल के कंपोनेंट्स की पहचान की जा सके।

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भारत से क्यों हो रही है नाराज़गी?

रूस-यूक्रेन युद्ध (2022 से जारी) के बाद भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद में बढ़ोतरी की है। भारत इस तेल को रिफाइन करके वैश्विक बाजार में डीजल और पेट्रोल के रूप में निर्यात करता है। यूक्रेन को संदेह है कि भारत से आ रहा डीजल परोक्ष रूप से रूस के आर्थिक हितों को बढ़ावा दे रहा है। Enkorr के मुताबिक:“भारत अगस्त 2025 में यूक्रेन को 119,000 टन डीजल भेज चुका है, जो यूक्रेन के कुल डीजल आयात का 18% है।”

यूक्रेन पहले कहां से लाता था डीजल?

युद्ध से पहले: रूस और बेलारूस से

2025 की गर्मियों में: यूक्रेन की एक बड़ी रिफाइनरी बंद हो गई, जिससे भारत से डीजल मंगवाया गया

A-95 कंसल्टेंसी के अनुसार: इस साल की पहली छमाही में डीजल आयात 13% घटकर 2.74 मिलियन मीट्रिक टन रह गया है

भारत का डीजल क्यों था उपयोगी?

यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने भी भारत से डीजल खरीदा था क्योंकि वह सोवियत मानकों पर खरा उतरता है। यह तेल यूक्रेन की सैन्य मशीनों के लिए उपयुक्त था। लेकिन अब सुरक्षा और रणनीतिक कारणों से इस पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय दबाव में भारत?

अमेरिका और नाटो पहले से भारत के रूस से तेल खरीद पर सवाल उठा रहे हैं। अब यूक्रेन की यह नई घोषणा भारत के ऊर्जा निर्यात को झटका दे सकती है, खासकर ऐसे समय में जब भारत वैश्विक तेल बाजार में प्रमुख रिफाइनिंग और निर्यात केंद्र बनता जा रहा है।

यूक्रेन का यह कदम भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक दोनों स्तर पर एक चेतावनी है। जहां भारत अपनी ऊर्जा नीति को लेकर स्वतंत्र रुख रखता आया है, वहीं रूस-यूक्रेन युद्ध के वैश्विक प्रभाव अब भारतीय व्यापार पर भी पड़ने लगे हैं। आने वाले समय में भारत को अपने ऊर्जा कूटनीति और निर्यात रणनीति पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।

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