Election Commission Action: 6 साल से चुनाव न लड़ने पर 474 पार्टियां डीलिस्ट, 359 पर कार्रवाई शुरू चुनाव आयोग की सख्त कार्रवाई जारी

Election Commission Action : चुनाव आयोग (ECI) ने राजनीतिक दलों की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने पिछले 6 वर्षों से कोई भी चुनाव न लड़ने वाली 474 रजिस्टर्ड गैर-मान्यता प्राप्त पार्टियों को डीलिस्ट कर दिया है। इसके साथ ही पिछले दो महीने में कुल 808 पार्टियों को रजिस्टर से हटाया जा चुका है। चुनाव आयोग की यह कार्रवाई देश में राजनीतिक दलों की संख्या और उनके कामकाज पर निगरानी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ी पहल मानी जा रही है। तीन साल से रिपोर्ट न देने पर 359 दलों पर कार्रवाई शुरू चुनाव आयोग ने 23 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की 359 पार्टियों को चिन्हित किया है जिन्होंने वित्त वर्ष 2021-22, 2022-23 और 2023-24 के लिए अपने ऑडिटेड अकाउंट्स और चुनावी खर्च की रिपोर्ट जमा नहीं की है। हालांकि इन दलों ने चुनावों में भाग लिया, लेकिन उन्होंने नियमों के तहत जरूरी दस्तावेज समय पर नहीं दिए, जिससे इन पर अब नियमानुसार कार्रवाई शुरू की गई है। पक्ष रखने का मिलेगा मौका ECI ने साफ किया है कि सभी चिन्हित दलों को शो-कॉज नोटिस भेजे जाएंगे और उन्हें अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया जाएगा। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन दलों की सुनवाई कर अंतिम निर्णय लें। 4300 करोड़ चंदा, सिर्फ 43 उम्मीदवार एक और हैरान करने वाली रिपोर्ट सामने आई है। 26 अगस्त को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात में रजिस्टर्ड 10 गुमनाम राजनीतिक दलों ने 2019-20 से 2023-24 के बीच ₹4300 करोड़ का चंदा प्राप्त किया। चौंकाने वाली बात यह है कि इन दलों ने इस दौरान सिर्फ 43 उम्मीदवार मैदान में उतारे, जिन्हें कुल मिलाकर केवल 54,069 वोट ही मिले। यह मामला दर्शाता है कि कुछ पार्टियां केवल चंदा लेने के लिए पंजीकरण करवा सकती हैं, जिससे राजनीतिक व्यवस्था में काले धन के प्रवेश की संभावना बढ़ जाती है। चुनाव आयोग की यह कार्रवाई राजनीतिक दलों की जवाबदेही तय करने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है। डीलिस्टिंग और रिपोर्ट न देने वाले दलों पर कार्रवाई से यह साफ संकेत मिलता है कि आयोग अब केवल नाम के दलों को बर्दाश्त नहीं करेगा। इस कदम से राजनीतिक व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और चुनाव प्रक्रिया में लोगों का भरोसा और भी मजबूत होगा। Read More: सामूहिक दुष्कर्म प्रकरण : चार आरोपियों को 20-20 वर्ष कारावास, 50-50 हजार जुर्माना

Election Commission Action : चुनाव आयोग (ECI) ने राजनीतिक दलों की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने पिछले 6 वर्षों से कोई भी चुनाव न लड़ने वाली 474 रजिस्टर्ड गैर-मान्यता प्राप्त पार्टियों को डीलिस्ट कर दिया है। इसके साथ ही पिछले दो महीने में कुल 808 पार्टियों को रजिस्टर से हटाया जा चुका है। चुनाव आयोग की यह कार्रवाई देश में राजनीतिक दलों की संख्या और उनके कामकाज पर निगरानी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ी पहल मानी जा रही है।

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तीन साल से रिपोर्ट न देने पर 359 दलों पर कार्रवाई शुरू

चुनाव आयोग ने 23 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की 359 पार्टियों को चिन्हित किया है जिन्होंने वित्त वर्ष 2021-22, 2022-23 और 2023-24 के लिए अपने ऑडिटेड अकाउंट्स और चुनावी खर्च की रिपोर्ट जमा नहीं की है। हालांकि इन दलों ने चुनावों में भाग लिया, लेकिन उन्होंने नियमों के तहत जरूरी दस्तावेज समय पर नहीं दिए, जिससे इन पर अब नियमानुसार कार्रवाई शुरू की गई है।

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पक्ष रखने का मिलेगा मौका

ECI ने साफ किया है कि सभी चिन्हित दलों को शो-कॉज नोटिस भेजे जाएंगे और उन्हें अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया जाएगा। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन दलों की सुनवाई कर अंतिम निर्णय लें।

4300 करोड़ चंदा, सिर्फ 43 उम्मीदवार

एक और हैरान करने वाली रिपोर्ट सामने आई है। 26 अगस्त को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात में रजिस्टर्ड 10 गुमनाम राजनीतिक दलों ने 2019-20 से 2023-24 के बीच ₹4300 करोड़ का चंदा प्राप्त किया। चौंकाने वाली बात यह है कि इन दलों ने इस दौरान सिर्फ 43 उम्मीदवार मैदान में उतारे, जिन्हें कुल मिलाकर केवल 54,069 वोट ही मिले। यह मामला दर्शाता है कि कुछ पार्टियां केवल चंदा लेने के लिए पंजीकरण करवा सकती हैं, जिससे राजनीतिक व्यवस्था में काले धन के प्रवेश की संभावना बढ़ जाती है।

चुनाव आयोग की यह कार्रवाई राजनीतिक दलों की जवाबदेही तय करने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है। डीलिस्टिंग और रिपोर्ट न देने वाले दलों पर कार्रवाई से यह साफ संकेत मिलता है कि आयोग अब केवल नाम के दलों को बर्दाश्त नहीं करेगा। इस कदम से राजनीतिक व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और चुनाव प्रक्रिया में लोगों का भरोसा और भी मजबूत होगा।

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Read More: सामूहिक दुष्कर्म प्रकरण : चार आरोपियों को 20-20 वर्ष कारावास, 50-50 हजार जुर्माना

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