H1B visa : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीजा को लेकर बड़ा फैसला लिया है, जो हजारों भारतीय पेशेवरों को प्रभावित कर सकता है। नए आदेश के अनुसार, अब H-1B वीजा के लिए आवेदन करने पर एक बार की अनिवार्य फीस 1,00,000 अमेरिकी डॉलर (करीब 90 लाख रुपये) देनी होगी। यह नियम 21 सितंबर 2025 से लागू हो गया है। किन्हें देना होगा यह शुल्क? व्हाइट हाउस के अनुसार यह भारी-भरकम फीस सिर्फ नए H-1B वीजा आवेदकों के लिए लागू होगी। यानी, जो लोग पहली बार वीजा के लिए आवेदन करेंगे, उन्हीं को यह शुल्क देना होगा। जिनके पास पहले से H-1B वीजा है, या जो उसका रिन्यूअल करवा रहे हैं, उन्हें इस शुल्क से छूट दी गई है। 2025 की लॉटरी में चयनित आवेदकों पर भी यह नियम लागू नहीं होगा। नया नियम 2026 के H-1B लॉटरी चक्र से प्रभावी होगा। H-1B वीजा क्या है? H-1B एक ग़ैर-आप्रवासी कार्य वीजा है, जिसके तहत अमेरिकी कंपनियाँ विदेशों से योग्य तकनीकी पेशेवरों को नियुक्त कर सकती हैं। यह वीजा मुख्यतः सॉफ़्टवेयर इंजीनियर, वैज्ञानिक, प्रोग्रामर, डेटा एनालिस्ट और अन्य तकनीकी विशेषज्ञों को दिया जाता है। यह वीजा शुरुआत में तीन साल के लिए मान्य होता है और आवश्यकता पड़ने पर इसे छह साल तक बढ़ाया जा सकता है। ट्रंप प्रशासन की दलील राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मानना है कि H-1B वीजा प्रणाली का दुरुपयोग हो रहा है। उनका कहना है कि “कई आउटसोर्सिंग कंपनियां इस वीजा का उपयोग करके अमेरिकी नौकरियों पर कब्जा कर रही हैं, जिससे स्थानीय प्रतिभा को नुकसान हो रहा है और यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी एक खतरा बनता जा रहा है।”उन्होंने कहा कि यह शुल्क इस प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और नियंत्रित बनाएगा। टेक कंपनियों में मचा हड़कंप नए नियमों की घोषणा के बाद अमेरिकी टेक इंडस्ट्री में हलचल मच गई है। माइक्रोसॉफ्ट ने अपने भारतीय कर्मचारियों को सलाह दी है कि वे अमेरिका में ही रहें और अनावश्यक यात्रा से बचें। गूगल, मेटा और अमेजन जैसी कंपनियों ने विदेश गए अपने कर्मचारियों से जल्द अमेरिका लौटने को कहा है। जेपी मॉर्गन सहित कई वित्तीय कंपनियों ने भी कर्मचारियों के लिए विशेष परामर्श जारी किया है। नए नियमों का सारांश बिंदु विवरण लागू तिथि 21 सितंबर 2025 नया शुल्क 1,00,000 अमेरिकी डॉलर (एक बार) किस पर लागू सिर्फ नए H-1B आवेदकों पर किस पर नहीं पुराने वीजा धारकों, रिन्यूअल, 2025 लॉटरी विजेताओं पर नहीं दस्तावेज़ अनिवार्यता कंपनियों को फीस भुगतान प्रमाण पत्र सुरक्षित रखना होगा क्या कहती है भारतीय आईटी इंडस्ट्री? भारतीय आईटी सेक्टर, जो H-1B वीजा पर सबसे ज्यादा निर्भर है, इस नियम से चिंतित है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय टेक कंपनियों की अमेरिकी बाजार में उपस्थिति कमजोर हो सकती है और छोटे स्टार्टअप्स के लिए विदेशी प्रतिभा लाना लगभग असंभव हो जाएगा। H-1B वीजा पर ट्रंप का यह नया कदम अमेरिकी नौकरियों को बचाने की दिशा में उठाया गया प्रतीत होता है, लेकिन इसका सीधा असर भारत जैसे देशों के हजारों पेशेवरों और कंपनियों पर पड़ेगा। हालांकि, यह राहत की बात है कि नियम केवल नए आवेदनों पर लागू होगा, और मौजूदा वीजा धारकों को इससे चिंता करने की जरूरत नहीं है। Read More: EMRS Recruitment 2025: 10वीं पास से पोस्ट ग्रेजुएट तक के लिए सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका, ऐसे करें आवेदन
















