Barren Island Volcano: अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में स्थित भारत के एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी बेरन आइलैंड (Barren Island Volcano) में बीते आठ दिनों के भीतर दो बार हल्के ज्वालामुखीय विस्फोट दर्ज किए गए हैं। यह विस्फोट क्रमश: 13 और 20 सितंबर 2025 को हुए, हालांकि दोनों घटनाएं कम तीव्रता की थीं और किसी प्रकार की जनहानि या क्षति की सूचना नहीं है।

बेरन आइलैंड, पोर्ट ब्लेयर से समुद्र के रास्ते लगभग 140 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और यह ज्वालामुखी भारत में एकमात्र ऐसा स्थान है जो अब भी सक्रिय है। यह द्वीप पूरी तरह निर्जन है और आम नागरिकों का यहां जाना प्रतिबंधित है।

वैज्ञानिक निगरानी बढ़ी
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) और नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) ने दोनों विस्फोटों के बाद निगरानी और सैटेलाइट ऑब्जरवेशन तेज कर दिए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह गतिविधि प्राकृतिक ज्वालामुखीय चक्र का हिस्सा है और फिलहाल इससे किसी बड़े खतरे की आशंका नहीं है।
NCS के अनुसार, दोनों विस्फोटों के दौरान हल्का धुआं और राख का गुबार आसमान में उठा, लेकिन यह जल्दी ही शांत हो गया। समुद्री क्षेत्र में नेविगेशन को लेकर भी फिलहाल कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है।
बेरन आइलैंड: एक नजर में
स्थिति: पूर्वी अंडमान सागर में स्थित
दूरी: पोर्ट ब्लेयर से 140 किमी
पहला दर्ज विस्फोट: 1787 में
बार-बार सक्रियता: 1991 से समय-समय पर विस्फोट होते रहे हैं
जनसंख्या: पूरी तरह निर्जन
भूगर्भीय महत्व: इंडो-ऑस्ट्रेलियन और बर्मी टेक्टोनिक प्लेट की सीमा पर स्थित होने के कारण सक्रिय
पर्यावरण और पर्यटन पर प्रभाव
हालांकि बेरन आइलैंड पर आम लोगों को जाने की अनुमति नहीं है, लेकिन यह स्थान साइंटिफिक रिसर्च और एडवेंचर टूरिज्म के लिए प्रसिद्ध है। स्कूबा डाइविंग और समुद्री जैव विविधता के लिए आसपास का क्षेत्र बेहद समृद्ध है। ज्वालामुखीय गतिविधियों के चलते यहां वैज्ञानिकों की रुचि और भी बढ़ गई है।
हाल के हल्के विस्फोट यह दर्शाते हैं कि बेरन आइलैंड अब भी सक्रिय ज्वालामुखीय क्षेत्र है और भविष्य में भी इस प्रकार की गतिविधियां संभव हैं। हालांकि कोई बड़ा खतरा नहीं है, फिर भी वैज्ञानिक संस्थाएं निगरानी बनाए हुए हैं।यह घटनाक्रम न सिर्फ भारत के भूगर्भीय परिदृश्य की सक्रियता को दर्शाता है, बल्कि समुद्री और पर्यावरणीय शोध के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।
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