Bihar Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मी तेज हो गई है और इसी बीच महागठबंधन ने एक बड़ा दांव खेलते हुए “अति पिछड़ा न्याय संकल्प” की घोषणा की है। इस संकल्प के जरिए कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने EBC यानी अति पिछड़ा वर्ग को अपने पक्ष में करने की रणनीति अपनाई है। लेकिन अब यही दांव उनके लिए परेशानी का कारण बनता दिख रहा है।

क्या है EBC कार्ड और क्यों बना सिरदर्द?
महागठबंधन ने अति पिछड़ा वर्ग के लिए 10 सूत्रीय कार्यक्रम की घोषणा की है, जिसमें शिक्षा, रोजगार, आरक्षण और प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी गई है। राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की मौजूदगी में किए गए इस ऐलान को राजनीतिक विश्लेषक “EBC सेंधमारी” के रूप में देख रहे हैं, ताकि नीतीश कुमार के मजबूत वोट बैंक में सेंध लगाई जा सके।

लेकिन यही कार्ड अब महागठबंधन के लिए मुश्किल खड़ी कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, महागठबंधन के घटक दल जैसे मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी (VIP), पशुपति पारस का लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और वाम दलों ने साफ संकेत दे दिए हैं कि अगर EBC को लेकर गंभीरता है तो उन्हें सीट बंटवारे और उम्मीदवारों में उचित भागीदारी मिलनी चाहिए।
वोट बैंक की सच्चाई
बिहार की राजनीति में EBC की अहमियत को कोई नजरअंदाज नहीं कर सकता। यह वर्ग राज्य की कुल आबादी का करीब 36% है और कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता है। यही वजह है कि नीतीश कुमार ने अपनी पूरी राजनीति इसी वर्ग के इर्द-गिर्द बुनी है — पंचायतीराज में आरक्षण से लेकर नौकरियों में हिस्सेदारी तक।
महागठबंधन के भीतर उठने लगे सवाल
महागठबंधन की ओर से EBC कार्ड का ऐलान तो कर दिया गया, लेकिन कांग्रेस और राजद के भीतर ही अब आवाजें उठने लगी हैं कि इस वर्ग को लेकर केवल घोषणाएं काफी नहीं हैं। अगर वाकई गंभीरता है, तो सीट बंटवारे और उम्मीदवारों के चयन में भी उसे झलकना चाहिए।
तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राजद जहां खुद को पिछड़ा वर्ग का सबसे बड़ा प्रतिनिधि मानता है, वहीं कांग्रेस भी अपने कोर वोट बैंक को बनाए रखने की जद्दोजहद में है। लेकिन अगर सहयोगी दलों की मांगों को अनदेखा किया गया, तो अंदरूनी नाराजगी खुलकर सामने आ सकती है।
महागठबंधन ने भले ही EBC कार्ड के जरिए एक बड़ी राजनीतिक चाल चली हो, लेकिन अब वही चाल उसके लिए गले की फांस बनती जा रही है। सीट बंटवारे से पहले इस मुद्दे पर स्पष्ट नीति न बनाई गई, तो यह न केवल गठबंधन की एकता को नुकसान पहुंचा सकता है, बल्कि EBC वोटरों के बीच संदेश भी गलत जा सकता है।











