Donald Trump Statement: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर विवादों में हैं। इस बार उन्होंने गर्भवती महिलाओं और बच्चों की दवाइयों व वैक्सीनेशन को लेकर ऐसे बयान दिए हैं जो चिकित्सा विशेषज्ञों को चिंतित कर सकते हैं। ट्रंप ने टायलिनॉल (Tylenol) को लेकर दोहराया कि गर्भवती महिलाएं इसे “बिलकुल ज़रूरत हो तभी” लें, और बच्चों को “लगभग किसी भी कारण से” यह दवा न दी जाए। MMR वैक्सीन को तोड़कर देने की सलाह ट्रंप ने Truth Social पर एक पोस्ट में लिखा, “MMR शॉट को तीन अलग-अलग शॉट्स में बांटें – मिक्स न करें। चिकन पॉक्स की वैक्सीन अलग से लें, हेपेटाइटिस B वैक्सीन 12 साल या उससे ज़्यादा उम्र में लें और सभी वैक्सीनेशन 5 अलग-अलग मेडिकल विज़िट्स में करवाएं।” MMR वैक्सीन आम तौर पर एक ही इंजेक्शन में मीज़ल्स, मम्प्स और रुबेला से सुरक्षा देती है, लेकिन ट्रंप इसके अलग-अलग शॉट्स की सलाह दे रहे हैं। चिकन पॉक्स और हेपेटाइटिस B को लेकर भी उन्होंने उम्र और प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। टायलिनॉल और ऑटिज्म का संबंध? ट्रंप का कहना है कि टायलिनॉल का सक्रिय घटक एसिटामिनोफेन (Acetaminophen) गर्भावस्था के दौरान ऑटिज्म के बढ़ते मामलों से जुड़ा हो सकता है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार इस पर अध्ययन कर रही है और “गर्भावस्था के दौरान किसी भी स्तर पर” इस दवा से परहेज की सलाह दे रही है। ट्रंप ने स्वास्थ्य सचिव रॉबर्ट एफ केनेडी जूनियर के तर्कों का समर्थन करते हुए कहा कि कई वर्षों से एसिटामिनोफेन और ऑटिज्म के बीच संबंध की संभावना को नजरअंदाज किया गया है। ल्यूकोवोरिन को बताया संभावित इलाज इसके अलावा ट्रंप ने यह भी घोषणा की कि उनकी सरकार Leucovorin Calcium टैबलेट्स को ऑटिज्म संबंधित एक स्थिति के संभावित इलाज के रूप में मंज़ूरी देने की प्रक्रिया शुरू कर रही है। व्हाइट हाउस का बयान व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा, “ट्रंप प्रशासन मानता है कि हर बीमारी की दवा गोली में नहीं होती। हम वैकल्पिक दृष्टिकोणों की जांच कर रहे हैं और लाखों अमेरिकियों को बेहतर स्वास्थ्य विकल्प देने की दिशा में काम कर रहे हैं।” चिकित्सा विशेषज्ञों की चिंता हालांकि, ट्रंप के इन बयानों पर चिकित्सा विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने चिंता जताई है। अभी तक टायलिनॉल और ऑटिज्म के बीच कोई ठोस वैज्ञानिक संबंध साबित नहीं हुआ है, और MMR वैक्सीन को अलग-अलग देने से इसकी प्रभावशीलता पर असर पड़ सकता है। ट्रंप के ताज़ा बयान ने एक बार फिर मेडिकल कम्युनिटी में बहस छेड़ दी है। जहां कुछ लोग उनके “सावधानीपूर्वक दृष्टिकोण” का स्वागत कर रहे हैं, वहीं विशेषज्ञ बिना प्रमाण के इस तरह की सलाह को खतरनाक मान रहे हैं। Read More : AFSPA Eextended: मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल में AFSPA छह महीने के लिए बढ़ाया गया, कानून व्यवस्था की स्थिति पर चिंता बरकरार
















