Portland protests 2025: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए 27 सितंबर 2025 को पोर्टलैंड में तत्काल सेना भेजने के निर्देश दिए हैं। ट्रंप ने कहा कि एंटिफा और घरेलू आतंकवादियों द्वारा की जा रही हिंसा और अराजकता को रोकने के लिए वह किसी भी हद तक जा सकते हैं। उन्होंने यह फैसला होमलैंड सिक्योरिटी की मंत्री क्रिस्टी नोएम के अनुरोध पर लिया।

ट्रंप का आदेश और सोशल मीडिया पोस्ट
ट्रंप ने Truth Social पर अपनी पोस्ट में लिखा,”मैं रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को निर्देश दे रहा हूं कि वे एंटिफा और अन्य घरेलू आतंकवादियों के हमलों से युद्धग्रस्त पोर्टलैंड और हमारे ICE फेसिलिटीज़ की रक्षा के लिए जितनी ज़रूरत हो, उतनी सैन्य ताकत मुहैया कराएं। यदि जरूरी हो, तो सेना को पूरी ताकत का इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाए।”

क्यों दिया गया यह आदेश?
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब हाल के दिनों में पोर्टलैंड में हिंसा, आगजनी और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की कई घटनाएं सामने आई हैं। ट्रंप ने इसे “हर रात होने वाली संगठित अराजकता” बताया है। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग यह सब कर रहे हैं, वे “पेशेवर अराजकतावादी” हैं और जानबूझकर हिंसा को उकसाते हैं।
ट्रंप की पुरानी चेतावनियां
सितंबर की शुरुआत में भी ट्रंप ने पोर्टलैंड की तुलना “नरक” से की थी और वहां संघीय बलों की उपस्थिति को और बढ़ाने की बात कही थी। उन्होंने शिकागो, बाल्टीमोर और वॉशिंगटन डीसी जैसे शहरों को भी चेतावनी दी थी कि अगर वहां अपराध दर नहीं घटी, तो संघीय हस्तक्षेप किया जाएगा। ट्रंप इन कदमों को अपनी “अपराध पर नियंत्रण की व्यापक योजना” का हिस्सा बता रहे हैं।
राजनीतिक विवाद भी गहराया
ट्रंप का यह फैसला अब एक राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। जहां एक ओर उनके समर्थक इसे कानून व्यवस्था की बहाली के लिए जरूरी कदम मानते हैं, वहीं विरोधियों का कहना है कि ट्रंप आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक लाभ लेने के लिए देश में तनाव और डर का माहौल बना रहे हैं।
क्या है पोर्टलैंड की स्थिति?
पोर्टलैंड, ओरेगन राज्य का प्रमुख शहर है, जो पिछले कुछ वर्षों से प्रदर्शनों और पुलिस कार्रवाई को लेकर चर्चा में रहा है। खासकर ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन के दौरान यहां बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए थे। अब एक बार फिर, शहर में संघीय बनाम स्थानीय प्रशासन के टकराव की स्थिति बनती दिख रही है।
डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले से पोर्टलैंड में कानून व्यवस्था बनाए रखने को लेकर नई बहस छिड़ गई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि सेना की तैनाती से शांति बहाल होती है या राजनीतिक और सामाजिक विवाद और गहराते हैं।










