Stock Market Crash: पिछला हफ्ता (22 से 26 सितंबर 2025) भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों के लिए बेहद दर्दनाक रहा। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई, जिससे केवल 5 दिनों में निवेशकों के 16 लाख करोड़ रुपये से अधिक डूब गए। शुक्रवार को ही बाजार में करीब 7 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। सेंसेक्स 733 अंक टूटकर 80,426.46 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 236 अंकों की गिरावट के साथ 24,654.70 पर आ गया।

शेयर बाजार में गिरावट की प्रमुख वजहें:
1. आईटी सेक्टर पर अमेरिकी वीजा पॉलिसी का असर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा H-1B वीजा फीस में वृद्धि का ऐलान भारतीय आईटी कंपनियों पर भारी पड़ा। TCS, Infosys और HCLTech जैसे दिग्गज कंपनियों के शेयरों में लगातार गिरावट आई। नतीजतन, निफ्टी आईटी इंडेक्स में 8% की गिरावट दर्ज की गई। TCS का शेयर 52 हफ्तों के निचले स्तर पर पहुंच गया।

2. फार्मा सेक्टर पर टैरिफ का दबाव
ट्रंप प्रशासन द्वारा 1 अक्टूबर से ब्रांडेड और पेटेंट दवाओं पर 100% टैरिफ लगाने के ऐलान ने फार्मा शेयरों में भूचाल ला दिया। डर यह भी है कि जेनेरिक दवाएं भी टैरिफ के दायरे में आ सकती हैं। इसके चलते सन फार्मा, सिप्ला, ल्यूपिन जैसी कंपनियों के शेयरों में 10% तक गिरावट देखी गई।
3. विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली
शुक्रवार को ही विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 16,057 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। वहीं घरेलू निवेशकों ने भी 11,464 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जिससे बाजार पर और दबाव बना।
4. बैंकिंग इंडेक्स से सपोर्ट की कमी
निफ्टी बैंक इंडेक्स, जो हाल ही में बाजार को ऊपर ले जा रहा था, इस बार 55,000 और 54,500 के महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर को नहीं बचा पाया। इससे broader market पर नकारात्मक असर पड़ा।
5. रुपये में गिरावट
डॉलर के मुकाबले रुपया 88 के स्तर तक कमजोर हुआ, जिससे विदेशी निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा और बाजार में और बिकवाली देखी गई।
आगे क्या?
आने वाला हफ्ता बाजार के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।
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1 अक्टूबर से ऑटो बिक्री के आंकड़े आएंगे।
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दूसरी तिमाही के नतीजों की शुरुआत 9 अक्टूबर को TCS के रिजल्ट से होगी।
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RBI की मौद्रिक नीति समिति की बैठक भी अगले हफ्ते होनी है, जिसमें रेपो रेट को लेकर बड़ा फैसला आ सकता है।
इसके अलावा गुरुवार को अवकाश होने के चलते हफ्ता ट्रेडिंग के लिहाज से छोटा होगा, जिससे वॉल्यूम में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।पिछले हफ्ते की गिरावट कई वैश्विक और घरेलू कारकों का नतीजा थी। आईटी और फार्मा सेक्टर पर अमेरिका की नीति का सीधा असर पड़ा, जबकि विदेशी निवेशकों की बिकवाली और रुपये में कमजोरी ने हालात को और खराब कर दिया। निवेशकों को अब आगामी कारोबारी अपडेट्स और RBI के फैसलों पर नजर रखनी चाहिए।










