Father kills daughter: उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। यहां एक पिता ने अपनी 14 वर्षीय बेटी की केवल इस बात पर गला घोंटकर हत्या कर दी कि उसने जेब खर्च के लिए घर से 500 रुपये चुरा लिए थे। आरोपी पिता ने हत्या के बाद बेटी का शव पास की नहर में फेंक दिया।

कहां और कैसे हुई घटना?
यह मामला बुलंदशहर जिले के अनूपशहर कोतवाली क्षेत्र का है। मृतका 14 साल की नाबालिग थी और स्कूल यूनिफॉर्म में थी, जब उसका शव शुक्रवार को नहर में तैरता हुआ मिला। शव मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की और अगले ही दिन आरोपी पिता अजय शर्मा को हिरासत में ले लिया।

आरोपी पिता ने कबूला गुनाह
पुलिस पूछताछ में अजय शर्मा ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है। एसपी (ग्रामीण) तेजवीर सिंह के अनुसार, आरोपी ने बताया कि गुरुवार को वह अपनी बेटी को स्कूल से लेने गया, लेकिन उसे घर न ले जाकर सीधे खेत में ले गया। वहां उसने दुपट्टे से बेटी का गला घोंट दिया और शव को नहर में फेंक दिया।
पिता का दावा: बेटी करती थी रुपये चोरी
पुलिस को दिए बयान में अजय शर्मा ने कहा कि उसकी बेटी अक्सर पैसे चुराया करती थी। उसने कई बार समझाने के बावजूद हाल ही में 500 रुपये चुरा लिए थे, जिससे वह बेहद नाराज हो गया। इसी गुस्से में उसने यह क्रूर कदम उठाया।
मां को गुमराह करता रहा आरोपी
मृतका की मां सुमन देवी ने बताया कि घटना के बाद आरोपी पति ने उन्हें गुमराह करते हुए कहा कि वह बेटी को पढ़ाई के लिए किसी रिश्तेदार के घर छोड़ आया है। लेकिन अगले ही दिन एक पड़ोसी ने उन्हें सूचना दी कि एक लड़की की लाश नहर में मिली है, जो बाद में उनकी बेटी निकली।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
मृत बच्ची चार भाई-बहनों में सबसे बड़ी थी। उसकी दर्दनाक मौत ने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया है। स्थानीय लोग भी इस जघन्य वारदात से स्तब्ध हैं और आरोपी के लिए सख्त सजा की मांग कर रहे हैं।
कानूनी कार्रवाई
पुलिस ने आरोपी अजय शर्मा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत हत्या और सबूत मिटाने का मामला दर्ज किया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और जांच जारी है।महज 500 रुपये की चोरी पर एक मासूम की जान ले लेना यह दिखाता है कि गुस्सा और मानसिक असंतुलन कैसे एक पिता को हैवान में बदल सकता है। यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है कि पारिवारिक समस्याओं और बच्चों की गलतियों से निपटने के लिए संवेदनशीलता और संवाद जरूरी है, न कि हिंसा।











