Gaza Peace Plan: इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका के मध्यस्थता वाले गाजा शांति प्रस्ताव को आगे बढ़ाते हुए मिस्र में शांति वार्ता के लिए विशेष प्रतिनिधिमंडल भेज दिया है। अधिकारी सूत्रों के अनुसार मिस्र में दोनों पक्षों — इजरायल और हमास — के प्रतिनिधि मौजूद हैं और बातचीत का लक्ष्य गाजा में लगभग दो साल से जारी युद्ध को समाप्त कराना और बंधकों की रिहाई सुनिश्चित करना है।

नेतन्याहू ने राष्ट्र के नाम संदेश में बताया कि मिस्र भेजे गए इजरायली दल में सामरिक मामलों के मंत्री रॉन डर्मर, सरकारी बंधकों के प्रमुख गैल हिर्श, विदेश नीति सलाहकार ओफिर फॉक तथा शिन बेट और मोसाद के वरिष्ठ अधिकारियों शामिल हैं। वहीं हमास की ओर से भी प्रतिनिधि मिस्र पहुंच गए हैं और दोनों दलों के बीच औपचारिक वार्ता की उम्मीद जताई जा रही है। मिस्र सरकार ने दोनों प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी की पुष्टि की है, जिससे वार्ता का स्थान काहिरा‑सूडान की अपेक्षा शेख नक़दार मिस्र ही माना जा रहा है।

मुख्य मकसद बंधकों की रिहाई और संघर्ष विराम लागू कराना है। अधिकारियों का कहना है कि वार्ता में विशेष जोर इजरायली बंधकों की जल्द से जल्द रिहाई पर होगा और कोशिश रहेगी कि यह कदम यहूदी त्योहार सूकोत (Sukkot) से पहले पूरा हो जाए। अमेरिका के राष्ट्रपति ने भी अपने मंच से हमास पर दबाव बनाने की बात कही है और बताया गया है कि ट्रंप की टीम द्वारा तैयार 21‑सूत्रीय शांति योजना के अनुपालन पर जोर दिया जा रहा है।
ट्रंप की 21‑सूत्रीय योजना में बुनियादी बातें शामिल हैं — बंधकों की रिहाई, गाजा का पुनर्निर्माण, अस्थायी शासकीय व्यवस्था और हमास के सशस्त्र ढांचे का निराकरण। योजना के अनुसार यदि हमास हथियार छोड़ता है तो उसके कुछ सदस्यों को माफी दी जा सकती है और गाजा में आतंकवाद मुक्त पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू होगी। ट्रंप ने योजना की अध्यक्षता स्वयं करने का संकेत दिया है और कहा है कि अमेरिका इस प्रक्रिया में सक्रिय मध्यस्थ बनेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि वार्ता का सफल होना दोनों पक्षों के राजनैतिक इच्छाशक्ति और अंतरराष्ट्रीय दबाव पर निर्भर करेगा। अगर हमास और इजरायल दोनों शांति प्रस्ताव के प्रमुख बिंदुओं पर सहमति कर लेते हैं तो गाजा में देहाती व शहरी पुनर्वास और दीर्घकालिक शांति की राह खुल सकती है; वर्ना संघर्ष की स्थिति बनी रह सकती है।
अब सभी की निगाहें मिस्र में चल रही वार्ता पर टिकी हैं — क्या यह प्रयास वास्तविक स्थायी शांति की शुरुआत साबित होगा या एक अल्पकालिक संघर्ष विराम ही रहेगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।











