Fatehpur Murder Suicide: फतेहपुर में घरेलू विवाद ने ली पत्नी की जान, पति ने खुद को भी मारी गोली

Fatehpur Murder Suicide:  उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। गाजीपुर थाना क्षेत्र के लमेहटा गांव में शनिवार देर रात एक पति ने घरेलू विवाद के चलते पहले अपनी पत्नी की गोली मारकर हत्या कर दी और फिर खुद को भी गोली मारकर आत्महत्या कर ली। इस दर्दनाक हादसे में दंपति की दो मासूम बेटियां अनाथ हो गई हैं।

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पति-पत्नी के बीच बढ़ते तनाव ने ली जान

घटना की जानकारी रविवार सुबह तब हुई जब परिजन बच्चों के रोने की आवाज सुनकर जागे। उन्होंने कमरे का दरवाजा खोला तो भीतर का मंजर देखकर होश उड़ गए। 35 वर्षीय मुकेश निषाद और उसकी 30 वर्षीय पत्नी गुड़िया देवी खून से लथपथ मृत अवस्था में तख्त पर पड़े थे। दोनों के शव के पास ही 315 बोर का तमंचा और दो खोखा कारतूस बरामद हुए हैं।

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पुलिस जांच में सामने आया घरेलू कलह का मामला

घटना की सूचना मिलते ही गाजीपुर थाना प्रभारी हनुमान प्रताप सिंह मौके पर पहुंचे और फॉरेंसिक टीम के साथ साक्ष्य जुटाए। CO दुर्गेशदीप ने बताया कि, “प्रथम दृष्टया मामला घरेलू विवाद का है। आशंका है कि पति ने पहले पत्नी को गोली मारी और फिर खुदकुशी कर ली। जांच के लिए शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और मामले की जांच सभी संभावित पहलुओं से की जा रही है।”

गांव में पसरा मातम, बच्चियों के भविष्य को लेकर चिंता

घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसर गया है। दो मासूम बच्चियां, जिनकी उम्र महज 6 और 3 साल है, अचानक अनाथ हो गईं। परिजन और गांववाले बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और पुनर्वास की समुचित व्यवस्था की जाए।

समाज के लिए गंभीर चेतावनी

यह घटना न सिर्फ एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि समाज के लिए भी गंभीर चेतावनी है। घरेलू कलह, संवाद की कमी, और गुस्से पर नियंत्रण न होना आज की सबसे बड़ी सामाजिक समस्याएं बनती जा रही हैं। अक्सर लोग मामूली बातों को बातचीत के जरिए सुलझाने की बजाय हिंसक रास्ता चुन लेते हैं, जिसका खामियाजा पूरे परिवार को भुगतना पड़ता है।

क्या कहता है मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ?

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में काउंसलिंग, समय रहते हस्तक्षेप, और समाज की सजगता से कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। परिवारों को आपसी विवादों को बातचीत और समझदारी से सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए। मानसिक तनाव की स्थिति में पेशेवर मदद लेना जरूरी है।फतेहपुर की यह घटना एक मानव त्रासदी है, जो समाज को आत्ममंथन के लिए मजबूर करती है। बच्चों का भविष्य अंधकारमय न हो, इसके लिए प्रशासन, समाजसेवी संगठनों और पंचायतों को आगे आकर जिम्मेदारी निभानी होगी। इसके साथ ही घरेलू हिंसा और मानसिक तनाव के प्रति समाज को अधिक संवेदनशील और सजग बनना होगा।

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