Political Fashion : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर उनकी खास पहनावे की शैली भी चर्चा में है। आधी बांह का कुर्ता, पायजामा और उसके ऊपर स्लीवलेस जैकेट उनकी सार्वजनिक पहचान का हिस्सा बन चुके हैं। पिछले करीब डेढ़ दशक में यह जैकेट राजनीतिक गलियारों से निकलकर फैशन, कॉर्पोरेट और आम लोगों के पहनावे तक पहुंची है।
नेहरू जैकेट से शुरू हुआ सफर
बिना आस्तीन वाली जैकेट का भारत में पुराना इतिहास है। पंडित जवाहरलाल नेहरू इसे अक्सर पहनते थे, जिसके बाद यह पहनावा ‘नेहरू जैकेट’ के नाम से लोकप्रिय हुआ। शुरुआती दौर में जैकेट का इस्तेमाल मुख्य रूप से खादी और सीमित रंगों में होता था। समय के साथ इसके डिजाइन और उपयोग में बदलाव आया।
फिटिंग ने दिया आधुनिक अंदाज
आज जिसे ‘मोदी जैकेट’ कहा जाता है, उसमें पारंपरिक डिजाइन के साथ आधुनिक कटिंग दिखाई देती है। इसकी फिटिंग अपेक्षाकृत शार्प और सलीकेदार होती है। कुर्ते-पायजामे के साथ यह पारंपरिक लुक देती है, जबकि शर्ट और ट्राउजर के साथ इसे इंडो-वेस्टर्न अंदाज में भी पहना जा सकता है।
रंगों और फैब्रिक में आया बदलाव
मोदी जैकेट अब केवल सफेद, काले या स्लेटी रंगों तक सीमित नहीं है। बाजार में लाल, नीला, पीला, मैरून और पेस्टल जैसे कई रंग उपलब्ध हैं। इसी तरह खादी के अलावा सिल्क, लिनेन, ऊनी और कॉटन जैसे अलग-अलग फैब्रिक में भी जैकेट तैयार की जाती है। बटन, कॉलर और पॉकेट की डिजाइन इसे अलग पहचान देती है।
कूटनीति में भी दिखी जैकेट
प्रधानमंत्री मोदी के पहनावे में यह जैकेट कई बार कूटनीतिक प्रतीक के तौर पर भी नजर आई है। विदेशी नेताओं को भारतीय परंपरा से जुड़े परिधान उपहार में देने की परंपरा के तहत कई मौकों पर मोदी जैकेट चर्चा में रही। जापान और दक्षिण कोरिया के नेताओं सहित कई विदेशी हस्तियों को ऐसी जैकेट पहने देखा गया है।
स्थानीय कपड़ों को मिला नया बाजार
मोदी जैकेट के लोकप्रिय होने के साथ खादी और भारतीय टेक्सटाइल को भी नए उपभोक्ता वर्ग तक पहुंचने का अवसर मिला। पहले जहां खादी को पारंपरिक पहनावे से जोड़कर देखा जाता था, वहीं अब युवा इसे त्योहारों, शादियों और औपचारिक कार्यक्रमों में भी पहनते हैं। इससे स्थानीय बुनकरों, दर्जियों और कारीगरों के उत्पादों की मांग को बढ़ावा मिला है।
सूट का देसी विकल्प बनी जैकेट
भारतीय पुरुषों के फॉर्मल और फेस्टिव पहनावे में मोदी जैकेट ने एक अतिरिक्त विकल्प तैयार किया है। इसे कुर्ते-पायजामे के साथ पहनने पर पारंपरिक लुक मिलता है, जबकि शर्ट और ट्राउजर के साथ आधुनिक इंडो-वेस्टर्न अंदाज दिखाई देता है। यही वजह है कि अलग-अलग उम्र के लोग इसे अपने हिसाब से अपना रहे हैं।
सस्टेनेबल फैशन से भी जुड़ी
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा संसद में रीसाइकिल्ड प्लास्टिक बोतलों से तैयार हल्के नीले रंग की जैकेट पहनने का मामला भी काफी चर्चित रहा था। इंडियन ऑयल द्वारा तैयार इस जैकेट के लिए इस्तेमाल की गई प्लास्टिक बोतलों को प्रोसेस कर फैब्रिक बनाया गया था। इससे रिसाइक्लिंग और पर्यावरण अनुकूल फैशन पर चर्चा बढ़ी।
शादियों और आयोजनों में बढ़ा चलन
आज मोदी जैकेट केवल राजनीतिक मंचों तक सीमित नहीं है। भारतीय शादियों, त्योहारों, ऑफिस कार्यक्रमों और अन्य सामाजिक आयोजनों में भी इसका इस्तेमाल बढ़ा है। कई फैशन और पारंपरिक परिधान ब्रांड अलग-अलग रंग, डिजाइन और फैब्रिक में ऐसी जैकेट पेश कर रहे हैं।
राजनीति से फैशन तक बनी पहचान
बॉलीवुड, क्रिकेट और कॉर्पोरेट जगत में भी अलग-अलग अवसरों पर इस तरह की जैकेट नजर आती है। इस तरह नेहरू जैकेट की पारंपरिक पहचान समय के साथ बदलकर एक आधुनिक भारतीय परिधान में विकसित हुई है। आज यह जैकेट भारतीय पुरुषों के फॉर्मल और फेस्टिव फैशन का चर्चित हिस्सा बन चुकी है।
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