Sitapur Solar Project : भारतीय रक्षा क्षेत्र को आत्मनिर्भर और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उत्तर प्रदेश के सीतापुर में सैन्य (रक्षा) भूमि पर देश के पहले और सबसे बड़े सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस महापरियोजना के तहत सीतापुर में स्थित करीब 850 एकड़ खाली पड़ी रक्षा भूमि का उपयोग किया जाएगा। इस विशाल भूभाग पर 250 मेगावाट (MW) की भारी क्षमता वाला सोलर पावर प्लांट और अत्याधुनिक बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) स्थापित किया जाएगा। रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी बयान के मुताबिक, यह भारतीय सैन्य इतिहास की अपनी तरह की पहली अनूठी परियोजना है, जहां रक्षा भूमि पर इतने बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा उत्पादन और ऊर्जा भंडारण की एकीकृत सुविधा विकसित की जा रही है।

सैन्य प्रतिष्ठानों की ऊर्जा सुरक्षा होगी मजबूत और कम होगी पारंपरिक बिजली पर निर्भरता
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य भारतीय रक्षा प्रतिष्ठानों की ऊर्जा सुरक्षा को दीर्घकालिक रूप से मजबूत और अचूक बनाना है। इसके माध्यम से सैन्य अड्डों की पारंपरिक ग्रिड और कोयले से बनने वाली बिजली पर निर्भरता को पूरी तरह से कम किया जाएगा। परियोजना के धरातल पर उतरने के बाद उत्तर प्रदेश और उसके आसपास के राज्यों में स्थित कई महत्वपूर्ण सेना मुख्यालयों, छावनियों और रक्षा प्रतिष्ठानों को निर्बाध रूप से स्वच्छ व हरित ऊर्जा (क्लीन एनर्जी) की आपूर्ति की जाएगी। इसके अतिरिक्त, इस सौर ऊर्जा के उपयोग से सरकारी खजाने पर बिजली खरीद के मद में होने वाले भारी-भरकम खर्च में भी लंबे समय में बहुत बड़ी बचत देखने को मिलेगी।

एनटीपीसी संभालेगी विकास की कमान, आधुनिकीकरण में सेना भी करेगी पूर्ण सहयोग
इस देशव्यापी महत्व की परियोजना को विकसित करने और समय पर पूरा करने की जिम्मेदारी सार्वजनिक क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एनटीपीसी (NTPC) को सौंपी गई है। एनटीपीसी इस पूरे प्रोजेक्ट को एक अत्यंत पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया (Competitive Bidding Process) के जरिए लागू करेगी। इस तकनीकी प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के रक्षा प्रतिष्ठानों को सबसे कम और किफायती लागत पर बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जा सके। इस पूरी परियोजना के सफल क्रियान्वयन और समन्वय में रक्षा मंत्रालय के साथ-साथ भारतीय सेना मुख्यालय और रक्षा संपदा महानिदेशालय (DGDE) भी कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग कर रहे हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण का बेजोड़ उदाहरण: आत्मनिर्भर भारत की नई मिसाल
रक्षा मंत्रालय ने इस परियोजना की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह प्रोजेक्ट राष्ट्रीय सुरक्षा, ऊर्जा आत्मनिर्भरता, तकनीकी नवाचार और वैश्विक पर्यावरण संरक्षण का एक बेहतरीन व बेजोड़ उदाहरण है। यह प्रधानमंत्री के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘हरित ऊर्जा’ के संकल्प को सीधे तौर पर गति प्रदान करता है। इस पावर प्लांट के चालू होने से न केवल भारतीय सेना की आधुनिक ऊर्जा जरूरतें पर्यावरण को बिना नुकसान पहुंचाए पूरी होंगी, बल्कि देश में कार्बन उत्सर्जन को बड़े पैमाने पर कम करने में भी मदद मिलेगी, जो ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ भारत की लड़ाई को मजबूत करेगा।
भविष्य के सैन्य प्रोजेक्ट्स के लिए मील का पत्थर और रोल मॉडल बनेगी सीतापुर परियोजना
रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, सीतापुर सोलर परियोजना केवल एक पावर प्लांट नहीं है, बल्कि यह भविष्य में देश की अन्य खाली रक्षा भूमियों पर विकसित होने वाली सौर और उन्नत ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं के लिए एक आदर्श मॉडल (ब्लूप्रिंट) का काम करेगी। एक बार जब यह परियोजना पूरी तरह से चालू हो जाएगी, तब यह भारतीय रक्षा भूमि पर स्थापित देश की सबसे महत्वपूर्ण, विशाल और मील का पत्थर साबित होने वाली नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) परियोजनाओं में शुमार हो जाएगी। इससे भविष्य में अन्य राज्यों में भी ऐसे सैन्य ग्रीन प्रोजेक्ट्स के रास्ते खुलेंगे।













