Hormuz Strait Crisis : मिडिल ईस्ट में लंबे समय से जारी बारूद की महक और तनाव के बीच क्या अब आखिरकार शांति का नया सवेरा होने वाला है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि दुनिया की ‘ऑयल आर्टरी’ कहे जाने वाले होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को दोबारा पूरी तरह खोलने के संकेत मिलने लगे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को इस बात का साफ हिंट दिया कि इस समुद्री रास्ते को जल्द ही सुचारू किया जा सकता है. हालांकि, इस सकारात्मक घोषणा के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डर के बादल पूरी तरह छंटते दिखाई नहीं दे रहे हैं. जानकारों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट के पानी के नीचे कई ऐसे ‘सोए हुए मॉन्स्टर’ यानी खतरनाक समुद्री बम बिखरे पड़े हैं, जो किसी भी वक्त भयानक तबाही मचा सकते हैं.

ईरान की नाकेबंदी और समुद्र में बिछाया गया बारूदी जाल
दरअसल, ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था चरमरा गई थी. तेहरान ने इस सैन्य कार्रवाई के जवाब में कड़ा रुख अपनाते हुए होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक कर दिया था. इतना ही नहीं, रणनीतिक बढ़त हासिल करने के लिए ईरान ने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग के भीतर भारी मात्रा में घातक समुद्री माइंस (Naval Mines) और विस्फोटक बिछा दिए थे, जिन्हें अभी तक पूरी तरह से साफ नहीं किया जा सका है. वर्तमान समय में, केवल कुछ चुनिंदा कमर्शियल जहाजों को एक बेहद सीमित और सुरक्षित घोषित किए गए रास्ते से ही निकाला जा रहा है. लेकिन स्ट्रेट के बाकी हिस्सों में मौत का खतरा जस का तस बना हुआ है.

ट्रंप का शांति समझौता
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में सीनियर अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि वाशिंगटन का प्राथमिक उद्देश्य फिलहाल ईरान के साथ जल्द से जल्द एक कूटनीतिक शांति समझौता करना और होर्मुज स्ट्रेट के व्यापारिक मार्ग को चालू करना है. योजना के मुताबिक, पानी में तैर रही इन घातक माइंस को हटाने का जोखिम भरा काम बाद में किया जाएगा. अमेरिकी समयानुसार डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका रविवार को ईरान के साथ एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने जा रहा है. लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि जब तक पूरे जलमार्ग से एक-एक माइन को निष्क्रिय नहीं कर दिया जाता, तब तक वैश्विक तेल आपूर्ति के इस सबसे बड़े केंद्र में स्थितियां कभी भी सामान्य नहीं मानी जा सकतीं.
सोए हुए राक्षसों का खौफ: रातों-रात माइंस को हटाना नामुमकिन
सैन्य मामलों के विशेषज्ञों का दृढ़ता से मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच कागजों पर समझौता हो भी जाता है, तो भी होर्मुज में बिछाए गए बारूदी जाल को रातों-रात हटाना या निष्क्रिय करना तकनीकी रूप से बिल्कुल असंभव है. अमेरिकी नौसेना काफी समय से इन अदृश्य खतरों को भांपने और बेअसर करने की कोशिशों में जुटी हुई है, लेकिन उन्हें अब तक कोई बड़ी कामयाबी हाथ नहीं लगी है. अमेरिकी खुफिया अधिकारियों ने मीडिया आउटलेट ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ को दिए एक इंटरव्यू में खुलासा किया है कि खुद ईरान के पास भी इन आधुनिक समुद्री माइंस को सटीकता से बिछाने या उन्हें सुरक्षित रूप से वापस निकालने के लिए आवश्यक उन्नत रणनीति और तकनीकी विशेषज्ञता की भारी कमी है.
अनियंत्रित बहाव और लापता रिकॉर्ड
इस पूरे मामले में सबसे बड़ी और डरावनी समस्या यह है कि ईरान ने इन माइंस को बिना किसी निश्चित रिकॉर्ड या मैपिंग के बेहद बेतरतीब ढंग से पानी में डाल दिया था. समुद्र की तेज लहरों और पानी के प्राकृतिक बहाव के कारण ये माइंस अब अपनी मूल जगहों से काफी दूर खिसक चुकी हैं. अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि तेहरान के पास इन भटकते हुए खतरनाक बमों की लाइव लोकेशन ट्रैक करने का कोई डिजिटल सिस्टम मौजूद नहीं है. ऐसे में ये अज्ञात माइन किसी भी अनजाने कमर्शियल शिप को पल भर में जलसमाधि दे सकती हैं. यही वजह है कि ट्रंप के शांति समझौते के दावों के बाद भी होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह सुरक्षित और खुला मानने पर पूरी दुनिया सस्पेंस में है.
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