Liquor Shop Protest : छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के दरिमा क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां हाल ही में खोली गई एक नई अंग्रेजी शराब दुकान को लेकर स्थानीय महिलाओं ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस शराब दुकान के विरोध में भारी संख्या में ग्रामीण महिलाएं एकजुट होकर सड़कों पर उतर आई हैं। महिलाओं का गुस्सा इस कदर फूट पड़ा है कि उन्होंने साफ शब्दों में कह दिया है कि यदि शराब दुकान की कमाई से उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है, तो उन्हें ऐसी कोई योजना नहीं चाहिए। सोमवार को महिलाओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने सरगुजा कलेक्टर को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपकर शराब दुकान को हटाने के लिए 3 दिनों का कड़ा अल्टीमेटम दिया है और मांग पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।

आबकारी मंत्री के बयान पर भड़का महिलाओं का गुस्सा, महतारी वंदन योजना का किया बहिष्कार
दरअसल, यह पूरा विवाद तब और गरमा गया जब छत्तीसगढ़ के आबकारी मंत्री लखनलाल देवांगन ने एक सार्वजनिक बयान दिया था। मंत्री ने कहा था कि आबकारी विभाग (शराब बिक्री) से मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल राज्य सरकार द्वारा ‘महतारी वंदन योजना’, एमएससी और गरीबों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान बनाने में किया जा रहा है। इस बयान के सामने आने के बाद दरिमा की महिलाओं का गुस्सा भड़क उठा। महिलाओं ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे ऐसी किसी भी योजना का लाभ नहीं लेना चाहती हैं, जिसकी कीमत किसी दूसरे का घर बर्बाद करके चुकाई जा रही हो।

कलेक्टर कार्यालय के जनदर्शन में सुनवाई न होने पर दोबारा आंदोलन की राह पर महिलाएं
सरगुजा के दरिमा में स्थानीय एयरपोर्ट के ठीक बाहर ग्रामीण इलाके में आबकारी विभाग द्वारा इस अंग्रेजी शराब दुकान को संचालित किया जा रहा है। इसके विरोध में महिलाएं पिछले कुछ दिनों से लगातार शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही थीं। यह दूसरी बार है जब ग्रामीण महिलाएं अपनी मांगों को लेकर अंबिकापुर स्थित जिला मुख्यालय पहुंची हैं। इससे ठीक एक सप्ताह पहले भी महिलाओं ने कलेक्टर के साप्ताहिक ‘जनदर्शन’ कार्यक्रम में पहुंचकर शराब दुकान को तुरंत प्रभाव से स्थानांतरित करने या बंद करने का लिखित आवेदन दिया था। प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई न होते देख महिलाओं ने सोमवार को दोबारा कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया।
आशा दास का सरकार पर तीखा हमला, कहा- किसी का घर उजाड़कर भला नहीं होता
आंदोलन का नेतृत्व कर रही स्थानीय महिला नेता आशा दास ने सरकार की आर्थिक नीतियों पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने आबकारी मंत्री लखनलाल देवांगन के बयान का हवाला देते हुए कहा, “अगर सरकार की वित्तीय स्थिति इतनी ज्यादा खराब हो चुकी है कि उसे माताओं और बहनों को महतारी वंदन योजना का पैसा देने के लिए शराब बेचनी पड़ रही है, तो हमें यह स्वाभिमान से समझौता करने वाला पैसा बिल्कुल नहीं चाहिए।” उन्होंने आगे कहा कि किसी के आंसुओं और हाय के पैसे से कभी किसी का भविष्य उज्जवल नहीं हो सकता और न ही किसी का घर उजाड़कर सरकार अपनी योजनाएं चला सकती है।
शराब के कारण होने वाले सामाजिक और स्वास्थ्य नुकसान का गिनाया आंकड़ा
महिलाओं ने आबकारी मंत्री को नसीहत देते हुए कहा कि मंत्री जी ने शराब से मिलने वाली सरकारी आय का वित्तीय आंकड़ा तो जोड़ लिया, लेकिन उन्हें उन सामाजिक नुकसानों का भी आंकड़ा लगाना चाहिए जो इस लत के कारण समाज भुगत रहा है। महिलाओं ने भावुक होते हुए पूछा कि मंत्री जी यह बताएं कि इस शराब के कारण अब तक कितनी बहनों का सुहाग उजड़ गया? कितनी माताएं अपने बेटों की असमय मौत पर तरस रही हैं? शराब पीकर वाहन चलाने से कितने युवाओं की सड़क दुर्घटनाओं में जान चली गई और कितने लोग गंभीर बीमारियों जैसे लिवर और किडनी खराब होने से अपनी जान गंवा रहे हैं।

युवाओं के भविष्य पर मंडराया खतरा
प्रदर्शनकारी महिलाओं ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पहले इस ग्रामीण इलाके के होनहार युवा पढ़-लिखकर सरकारी नौकरियों और सैन्य भर्तियों में चयनित हो रहे थे। लेकिन गांव के मुहाने पर शराब दुकान खुल जाने से अब युवाओं को बेहद आसानी से शराब उपलब्ध होने लगी है, जिससे वे नशे की गर्त में डूब रहे हैं और उनका पूरा भविष्य अंधकारमय हो रहा है। सरगुजा कलेक्टर कार्यालय पहुंची करीब 30 महिलाओं के समूह ने दृढ़ता से कहा कि वे अपने बच्चों और गांव के भविष्य को बचाने के लिए किसी भी शर्त पर दरिमा में इस शराब दुकान को संचालित नहीं होने देंगी और जब तक इसे हटाया नहीं जाता, तब तक उनका यह अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन और आंदोलन जारी रहेगा।












