Owaisi on Mamata : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के अप्रत्याशित और चौंकाने वाले नतीजों के बाद देश भर के राजनीतिक गलियारों में समीक्षाओं का दौर जारी है। इस बीच, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की इस ऐतिहासिक पराजय को लेकर ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला है। ओवैसी ने टीएमसी की लुटिया डूबने के पीछे चार सबसे बड़े और बुनियादी कारणों का खुलासा किया है। समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) को दिए एक विशेष इंटरव्यू में ओवैसी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार पूरी तरह से जनता की बुनियादी समस्याओं से कट चुकी थी। अहंकार और जमीनी हकीकत से दूरी के कारण ही टीएमसी ने बंगाल की जनता का भरोसा पूरी तरह खो दिया, जिसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ा।

चौतरफा भ्रष्टाचार के आरोपों से बढ़ा जनता के भीतर भारी आक्रोश
असदुद्दीन ओवैसी ने टीएमसी की हार का पहला और सबसे प्रमुख कारण राज्य में व्याप्त संस्थागत भ्रष्टाचार को बताया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के शासनकाल में सरकारी तंत्र के शीर्ष पदों पर बैठे लोगों से लेकर निचले स्तर तक भ्रष्टाचार के गंभीर और लगातार आरोप लगते रहे। नौकरियों में धांधली से लेकर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में हुए घोटालों ने आम जनता के भीतर सरकार के प्रति भारी असंतोष और नाराजगी भर दी थी। ओवैसी के अनुसार, यह संचित आक्रोश चुनाव के दौरान एक सुनामी बनकर उभरा, जिसने टीएमसी के अभेद्य किले को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया।

कमजोर प्रशासनिक व्यवस्था और कुशासन से बेपटरी हुआ पूरा सूबा
एआईएमआईएम सुप्रीमो ने अपने हमले को आगे बढ़ाते हुए ममता सरकार के प्रशासनिक मॉडल पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में पश्चिम बंगाल के भीतर कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक नियंत्रण पूरी तरह से पंगु हो चुका था। सरकार जनता की उम्मीदों, सुरक्षा और विकास की आकांक्षाओं पर खरी उतरने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई। ओवैसी के अनुसार, सरकारी मशीनरी का राजनीतिकरण और चारों तरफ फैला कुशासन ही तृणमूल कांग्रेस के पतन की दूसरी सबसे बड़ी वजह बना, जिसने आम वोटरों को विकल्प तलाशने पर मजबूर कर दिया।
मुस्लिम समुदाय के साथ हुआ राजनीतिक विश्वासघात और उनकी घोर उपेक्षा
ओवैसी ने तृणमूल कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक रहे मुस्लिम समुदाय की स्थिति पर बेहद तल्ख टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में एक बहुत बड़ी आबादी मुस्लिम समुदाय की है, जिसने हमेशा ममता बनर्जी को बिना शर्त समर्थन दिया। इसके बावजूद, सरकार ने सत्ता में आने के बाद उनकी बुनियादी समस्याओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की जरूरतों पर कोई ध्यान नहीं दिया। ओवैसी ने आरोप लगाया कि टीएमसी ने मुस्लिमों के साथ केवल विश्वासघात किया और उन्हें सिर्फ एक ‘वोट बैंक’ की तरह इस्तेमाल किया। उन्होंने देश के सभी राजनीतिक दलों को नसीहत देते हुए कहा कि मुस्लिमों को केवल चुनाव जीतने का जरिया समझना बंद होना चाहिए; उन्हें समान अधिकारों वाले सम्मानित नागरिक के रूप में देखा जाना चाहिए।
SIR विवाद ने टीएमसी के खिलाफ तैयार किया नकारात्मक माहौल
ओवैसी के विश्लेषण के अनुसार, राज्य में उपजा ‘एसआईआर’ (SIR) का विवाद भी तृणमूल कांग्रेस की लुटिया डुबोने में एक बड़ा और निर्णायक कारक साबित हुआ। इस संवेदनशील मुद्दे ने बंगाल के स्थानीय नागरिकों और विभिन्न वर्गों के बीच सरकार के खिलाफ गहरा अविश्वास और असंतोष पैदा करने का काम किया। ममता बनर्जी इस विवाद को सही समय पर सुलझाने और जनता के संशयों को दूर करने में पूरी तरह प्रशासनिक रूप से विफल रहीं, जिसका सीधा असर चुनाव के दौरान मतदान केंद्रों पर देखने को मिला और पार्टी ताश के पत्तों की तरह ढह गई।
ओबीसी सर्टिफिकेट का बड़ा मुद्दा
इंटरव्यू के दौरान असदुद्दीन ओवैसी ने कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा वर्ष 2010 के बाद जारी किए गए करीब पांच लाख ओबीसी (OBC) प्रमाणपत्रों को रद्द किए जाने के संवेदनशील कानूनी विवाद का भी विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने डेटा साझा करते हुए दावा किया कि इन रद्द किए गए पांच लाख प्रमाणपत्रों में से लगभग 3 लाख प्रमाणपत्र अकेले मुस्लिम समुदाय के पिछड़े वर्ग के लोगों के थे। ओवैसी ने ममता सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि राज्य सरकार के पास इस कानूनी पेचदगी और समस्या का सही समय पर समाधान निकालने के पर्याप्त अवसर थे, लेकिन अपनी सुस्ती और इच्छाशक्ति की कमी के कारण उसने कोई ठोस कदम नहीं उठाए, जिससे यह बड़ा वर्ग पूरी तरह नाराज हो गया।
बंगाल में भाजपा का अभूतपूर्व उदय
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के आंकड़ों पर नजर डालें तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सूबे में अब तक का सबसे ऐतिहासिक और शानदार प्रदर्शन किया है। भाजपा ने सूबे की कुल 294 विधानसभा सीटों में से रिकॉर्ड 206 सीटों पर प्रचंड जीत हासिल कर स्पष्ट बहुमत की सरकार बनाई। इसके बाद फलता सीट पर हुए उपचुनाव में भी भाजपा ने बाजी मारकर अपनी सीटों की संख्या को 207 तक पहुंचा दिया। दूसरी तरफ, पिछले विधानसभा चुनाव में 212 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत का आनंद लेने वाली ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस इस बार महज 80 सीटों पर सिमटकर इतिहास के सबसे बुरे दौर में पहुंच गई। नतीजों के तुरंत बाद टीएमसी के भीतर ऐसी भगदड़ मची कि उसके अधिकांश विधायकों ने बगावत का रास्ता चुन लिया।
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