Commonwealth Games 2026 : दो बार के ओलंपिक पदक विजेता और भारतीय जैवलिन थ्रो के स्टार एथलीट नीरज चोपड़ा ने लंबे अंतराल के बाद ट्रैक और फील्ड पर एक धमाकेदार वापसी की है। पीठ की गंभीर चोट के कारण पिछले लगभग एक साल से खेल से दूर रहे नीरज ने दोहा डायमंड लीग में अपनी फिटनेस और कौशल का उत्कृष्ट प्रमाण दिया है। स्विट्जरलैंड में लगभग एक महीने के गहन प्रशिक्षण के बाद, नीरज ने अंतिम समय में इस लीग में भाग लेने का निर्णय लिया। उनके इस फैसले पर पूरे देश की निगाहें टिकी थीं। शुरुआती घबराहट के बावजूद, नीरज ने अपनी लय को वापस हासिल किया और 82.77 मीटर के थ्रो के साथ आगामी कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए निर्धारित 82.61 मीटर के क्वालिफिकेशन मार्क को पार कर लिया।

उतार-चढ़ाव भरी शुरुआत और तीसरे थ्रो का जादू
नीरज चोपड़ा की शुरुआत इस इवेंट में थोड़ी चुनौतीपूर्ण रही। उनका पहला थ्रो फाउल हो गया, जिससे दर्शकों में थोड़ी चिंता देखी गई। हालांकि, एक अनुभवी खिलाड़ी की तरह उन्होंने धैर्य बनाए रखा और दूसरे ही प्रयास में बेहतरीन थ्रो करते हुए क्वालिफिकेशन की बाधा पार कर ली। नीरज का असली जलवा उनके तीसरे थ्रो में देखने को मिला, जब उन्होंने भाले को 85.69 मीटर की दूरी तक फेंककर अपनी पुरानी लय और फॉर्म की झलक पेश की। लंबे समय बाद वापसी कर रहे किसी भी खिलाड़ी के लिए यह स्कोर बेहद प्रभावशाली माना जा रहा है, जिसने उनके प्रशंसकों और खेल विशेषज्ञों में एक नई उम्मीद जगा दी है कि नीरज आगामी बड़े टूर्नामेंट्स में पदक जीतने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

अंतिम प्रयास और भविष्य की राह
तीसरे प्रयास के बाद नीरज के प्रदर्शन में थोड़ा ठहराव देखा गया। उनका चौथा थ्रो 83.45 मीटर का रहा, जबकि पांचवां थ्रो एक बार फिर फाउल में तब्दील हो गया। इस लीग में श्रीलंका के रुमेश पाथिरांगे ने शानदार फॉर्म दिखाते हुए 88.68 मीटर के थ्रो के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया। पांचवां राउंड समाप्त होने तक नीरज चौथे स्थान पर रहे और इसी के साथ उनका दोहा डायमंड लीग का सफर संपन्न हुआ। हालांकि, उनके परिणामों से ज्यादा उनकी फिटनेस पर चर्चा हो रही है। लंबे समय से पीठ की चोट से जूझ रहे नीरज के लिए इस इवेंट में निरंतरता बनाए रखना ही सबसे बड़ी जीत है।
फिटनेस पर विश्वास और बड़े टूर्नामेंट्स का इंतजार
दोहा डायमंड लीग में नीरज चोपड़ा का प्रदर्शन उनकी फिटनेस के लिहाज से काफी सकारात्मक रहा है। हाल ही में उन्हें एशियन गेम्स के भारतीय स्क्वाड में भी शामिल किया गया है, जिसके चलते उनकी शारीरिक स्थिति पर सबकी नजरें टिकी हुई थीं। इस लीग में मिली सफलता ने साबित कर दिया है कि वे न केवल चोट से उबर चुके हैं, बल्कि अपनी तकनीक पर भी पकड़ बनाए हुए हैं। अब खेल जगत की निगाहें नीरज की अगली प्रतियोगिताओं पर हैं, जहाँ वे अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को दोहराने के लिए तैयार हैं। एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ जैसे बड़े मंचों पर नीरज से एक बार फिर स्वर्ण पदक की उम्मीद करना स्वाभाविक है।
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