NEET-UG मामले की सुनवाई को सुप्रीम कोर्ट ने 19 अगस्त तक टाल दिया है। अब केंद्र और संबंधित पक्षों की ओर से दाखिल हलफनामों पर विस्तृत सुनवाई होगी। कोर्ट के अगले कदम पर छात्रों और अभ्यर्थियों की नजर बनी हुई है।
NEET-UG मामले की सुनवाई को सुप्रीम कोर्ट ने 19 अगस्त तक टाल दिया है। अब केंद्र और संबंधित पक्षों की ओर से दाखिल हलफनामों पर विस्तृत सुनवाई होगी। कोर्ट के अगले कदम पर छात्रों और अभ्यर्थियों की नजर बनी हुई है।

NEET-UG Case : NEET-UG विवाद को लेकर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। परीक्षा से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि इस मामले में एक हलफनामा दाखिल किया गया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संबंधित हलफनामा अभी तक रिकॉर्ड पर उपलब्ध नहीं है। अदालत ने साफ किया कि हलफनामे में दर्ज कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर आगे विचार और चर्चा की आवश्यकता है।


सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे पहले दाखिल किए गए हलफनामे का अध्ययन कर लें। अदालत ने कहा कि दस्तावेज में कई ऐसे तथ्य हैं, जिन पर विस्तार से विचार किया जाएगा। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त को निर्धारित की गई है। कोर्ट ने संकेत दिया कि परीक्षा प्रक्रिया और सुधारों से जुड़े सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।

इससे पहले 4 अगस्त को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर NEET परीक्षा व्यवस्था में किए गए सुधारों की जानकारी दी थी। सरकार ने कहा कि राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के संचालन में व्यापक बदलाव किए गए हैं, ताकि प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं और परीक्षा व्यवस्था से जुड़ी कमियों को दूर किया जा सके।
शिक्षा मंत्रालय ने अपने हलफनामे में कहा कि सरकार का उद्देश्य एक ऐसी मजबूत और संस्थागत परीक्षा प्रणाली तैयार करना है, जो भविष्य की चुनौतियों से निपटने में सक्षम हो। सरकार के अनुसार, इन सुधारों का मकसद परीक्षा सुरक्षा को मजबूत करना, संस्थागत अनुभव को बनाए रखना और प्रश्नपत्र लीक या अन्य अनियमितताओं की संभावनाओं को खत्म करना है।
सुप्रीम कोर्ट ने 29 मई को केंद्र सरकार से पूछा था कि भविष्य में NEET परीक्षा का आयोजन किस तरह किया जाएगा और परीक्षा प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जाएंगे। अदालत के निर्देश के बाद शिक्षा मंत्रालय ने यह हलफनामा दाखिल किया। इसमें परीक्षा संचालन से जुड़ी नई व्यवस्था और सुधारों की जानकारी दी गई।

केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि शिक्षा मंत्रालय राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी NTA के कामकाज की निगरानी करता है। वहीं NEET परीक्षा का आयोजन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से NTA के माध्यम से कराया जाता है। सरकार ने कहा कि दोनों संस्थाएं मिलकर परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए काम कर रही हैं।
सरकार ने अपने हलफनामे में स्पष्ट किया कि NEET-UG 2026 प्रश्नपत्र लीक मामले में चल रही सीबीआई जांच को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की गई है। सरकार ने कहा कि जांच एजेंसी अपनी प्रक्रिया के अनुसार मामले की जांच कर रही है और अदालत में दाखिल हलफनामा केवल परीक्षा सुधारों और भविष्य की व्यवस्था पर केंद्रित है।
हलफनामे में सरकार ने कहा कि परीक्षा की विश्वसनीयता और निष्पक्षता से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कड़े कदम उठाए जाएंगे। सरकार ने बताया कि नए सुधारों के तहत परीक्षा प्रणाली में सुरक्षा मानकों को और मजबूत किया जा रहा है, ताकि छात्रों के हितों की रक्षा की जा सके।
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि परीक्षा सुधारों के लिए एक उच्च स्तरीय कार्यबल (HPTF) का गठन किया गया है। इस कार्यबल की अध्यक्षता इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि कर रहे हैं। सरकार के अनुसार, यह समूह परीक्षा व्यवस्था में संरचनात्मक सुधारों की सिफारिश करेगा और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से परीक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने का काम करेगा।
NEET-UG मामले में अब सुप्रीम कोर्ट 19 अगस्त को आगे की सुनवाई करेगा। अदालत के सामने केंद्र सरकार के सुधारों, परीक्षा सुरक्षा और याचिकाकर्ताओं की आपत्तियों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। लाखों छात्रों से जुड़े इस मामले पर सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश पर टिकी हैं।
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