Crude oil Price Drop : अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में पिछले एक सप्ताह के दौरान उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। भले ही शुक्रवार के अंतिम कारोबारी सत्र में कीमतों में मामूली उछाल देखने को मिला हो, लेकिन यदि पूरे सप्ताह के आंकड़ों का विश्लेषण करें, तो ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी क्रूड (WTI) दोनों में लगभग 8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इस गिरावट का मुख्य कारण इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच युद्धविराम पर सहमति और अमेरिका-ईरान के बीच हुए हालिया समझौते को माना जा रहा है। मध्य-पूर्व में शांति की बढ़ती संभावनाओं ने वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर व्याप्त चिंताओं को काफी हद तक कम कर दिया है, जिसका सीधा असर कच्चे तेल के भाव पर पड़ा है।

इजरायल-हिजबुल्लाह युद्धविराम और होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति
हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच शांति समझौते के बाद से खाड़ी देशों में तेल निर्यात को सामान्य करने की कवायद तेज हो गई है। मरीन ट्रैफिक के आंकड़ों के अनुसार, कच्चे तेल और एलपीजी से भरे कई टैंकर होर्मुज स्ट्रेट के जरिए इराकी बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं। हालांकि, ईरान ने जहाजों की आवाजाही पर कड़ी निगरानी रखने के संकेत दिए हैं। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने स्पष्ट किया है कि जहाजों को उनके साथ समन्वय बनाकर ही गुजरना होगा। स्ट्रेट अथॉरिटी ने भी एक कड़ा परामर्श जारी किया है कि बिना वैध परमिट के किसी भी जहाज को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह स्थिति यह दर्शाती है कि शांति के बावजूद समुद्री सुरक्षा को लेकर ईरान अपनी शर्तों पर अडिग है।

वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और 85 मिलियन बैरल तेल का प्रभाव
ईरान और अमेरिका के बीच हुए इस समझौते ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में नई उम्मीदें जगाई हैं। खबरों के अनुसार, इस डील से मध्य-पूर्व के खाड़ी देशों में फंसा करीब 8.5 करोड़ (85 मिलियन) बैरल कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार में आ सकेगा। अमेरिका ने इस समझौते के तहत ईरानी तेल पर लगे कुछ प्रतिबंधों को हटाने पर भी सहमति जताई है, जिससे भविष्य में वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति में पर्याप्त वृद्धि होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान और अमेरिका के बीच सहयोग इसी प्रकार बना रहता है, तो जहाजों का आवागमन काफी तेजी से सामान्य हो जाएगा और बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ेगी।
कीमतों का भविष्य: विशेषज्ञों का क्या है पूर्वानुमान?
बाजार के जानकारों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतें आने वाले 6 से 12 महीनों में और नीचे आ सकती हैं। सिटीग्रुप की एक रिपोर्ट के अनुसार, तेल के फ्लो में धीरे-धीरे सामान्य स्थिति लौटने और बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति (सरप्लस) होने से कीमतें गिरकर 2027 की शुरुआत तक 60 से 65 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक आ सकती हैं। कॉमर्जबैंक ने भी अपने अनुमानों को संशोधित करते हुए वर्ष के अंत तक ब्रेंट क्रूड की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल रहने की उम्मीद जताई है। वहीं, इराक के तेल मंत्री बासिम मोहम्मद ने पुष्टि की है कि इराक अपने तेल क्षेत्रों से उत्पादन धीरे-धीरे सामान्य स्तर पर ले जाने के लिए तैयार है, जो वैश्विक कीमतों को नियंत्रित करने में सहायक होगा।
भारत में ईंधन की कीमतों का गणित और आम जनता की उम्मीदें
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की दर पर निर्भर करती हैं। जून के महीने में कच्चे तेल की कीमतों में 15 प्रतिशत से अधिक की गिरावट ने आम उपभोक्ताओं के मन में उम्मीद जगा दी है कि शायद पेट्रोल और डीजल सस्ता हो जाएगा। पिछले महीने मई में, अंतरराष्ट्रीय दरों में उछाल के चलते भारत में ईंधन की कीमतों में 7 से 8 प्रतिशत की वृद्धि की गई थी। हालांकि, जानकारों का कहना है कि अभी कीमतों में कटौती की संभावना कम है। इसका मुख्य कारण पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा पिछले कुछ महीनों में हुए भारी नुकसान की भरपाई करना है।
अनुमान के मुताबिक, जब तक कच्चे तेल की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल के नीचे स्थिर नहीं हो जाती, तब तक कंपनियां अपने घाटे को कवर करने में जुटी रहेंगी। यदि कच्चे तेल के दाम 75 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक आते हैं, तभी उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिलने की वास्तविक उम्मीद की जा सकती है।
प्रमुख महानगरों में पेट्रोल और डीजल के ताजा भाव
फिलहाल, देश के चार प्रमुख महानगरों में ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं देखा गया है। दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है। वहीं, मुंबई में पेट्रोल की कीमत 111.21 रुपये और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर है। कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये और डीजल 99.02 रुपये प्रति लीटर की दर से बिक रहा है, जबकि चेन्नई में पेट्रोल 107.77 रुपये और डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार की हलचल और सरकारी नीति ही यह तय करेगी कि आम जनता को पेट्रोल-डीजल की महंगाई से कब तक राहत मिल पाएगी।











