योग में ॐ का उच्चारण केवल एक ध्वनि नहीं बल्कि गहरे आध्यात्मिक और मानसिक प्रभाव से जुड़ा माना जाता है। इसे योग साधना का आधार बताया जाता है। आखिर क्यों ॐ को अनिवार्य माना गया है और यह मन, शरीर और ऊर्जा पर कैसे असर डालता है, यह जानना बेहद रोचक है?
योग में ॐ का उच्चारण केवल एक ध्वनि नहीं बल्कि गहरे आध्यात्मिक और मानसिक प्रभाव से जुड़ा माना जाता है। इसे योग साधना का आधार बताया जाता है। आखिर क्यों ॐ को अनिवार्य माना गया है और यह मन, शरीर और ऊर्जा पर कैसे असर डालता है, यह जानना बेहद रोचक है?

Yoga Meditation : हर साल 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में पूरी दुनिया भारतीय संस्कृति के इस अनमोल उपहार को मनाती है। योग केवल शारीरिक व्यायाम का नाम नहीं है, बल्कि यह शरीर, मन और आत्मा के मिलन की एक प्राचीन विधा है। योग के किसी भी सत्र की शुरुआत या समाप्ति प्रायः ‘ॐ’ के गुंजायमान उच्चारण के साथ होती है। क्या आपने कभी विचार किया है कि इस एक ध्वनि में ऐसा क्या जादू है? वास्तव में, योग में ॐ का महत्व केवल एक परंपरा नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा वैज्ञानिक, दार्शनिक और आध्यात्मिक आधार छिपा है। यह ध्वनि साधक को बाहरी दुनिया से काट कर उसकी आंतरिक चेतना से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है।

सनातन धर्म में ‘ॐ’ को केवल एक शब्द नहीं, बल्कि ब्रह्मांड की ‘मूल ध्वनि’ या ‘प्रणव मंत्र’ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह पवित्र ध्वनि तीन मुख्य अक्षरों—’अ’, ‘उ’, और ‘म’—से मिलकर बनी है। ‘अ’ सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा का, ‘उ’ जगत के पालनकर्ता भगवान विष्णु का और ‘म’ संहारकर्ता भगवान शिव का प्रतीक है। इस प्रकार, ॐ का उच्चारण संपूर्ण ब्रह्मांड की त्रिमूर्ति और उसकी ऊर्जा को अपने भीतर समाहित करने जैसा है। इसे संपूर्ण सृष्टि की चेतना का प्रतिनिधित्व करने वाली ध्वनि माना गया है, जो ब्रह्मांड के हर कण में स्पंदित हो रही है।

योग का मूल उद्देश्य मन की चंचलता को शांत करना और स्वयं की अंतरात्मा से जुड़ना है। जब हम योग की शुरुआत ॐ के उच्चारण से करते हैं, तो यह हमारे मस्तिष्क में एक विशेष प्रकार का कंपन उत्पन्न करता है। यह कंपन मन को बाहरी तनाव, चिंताओं और कोलाहल से हटाकर एकाग्रता की स्थिति में ले आता है। योग से पहले ॐ का जाप व्यक्ति को वर्तमान क्षण में स्थिर करता है। इससे मन शांत होता है, सांसें व्यवस्थित होती हैं और शरीर योग के गहन अभ्यासों को स्वीकार करने के लिए तैयार हो जाता है। यह मानसिक संतुलन योग को और अधिक प्रभावी और लाभप्रद बना देता है।
हिंदू धर्मग्रंथों जैसे वेद, उपनिषद और भगवद्गीता में ॐ की महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है। वेदों के अनुसार, सृष्टि की उत्पत्ति के समय गूंजने वाली यह पहली ध्वनि थी। आध्यात्मिक दृष्टि से, ॐ का नियमित जाप व्यक्ति के भीतर सुप्त पड़ी आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने में सहायक होता है। यह साधक को ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण की भावना से भर देता है। योगियों का मानना है कि ॐ का उच्चारण हृदय चक्र को खोलने और शरीर के भीतर ऊर्जा के प्रवाह (प्राण) को शुद्ध करने का कार्य करता है, जिससे आत्मिक शांति प्राप्त होती है।
ॐ का उच्चारण न केवल व्यक्ति के मन को शांत करता है, बल्कि यह आसपास के संपूर्ण वातावरण में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। यह नकारात्मक विचारों और भारीपन को दूर करने में अत्यंत प्रभावी है। आज के इस व्यस्त युग में, जहाँ मानसिक तनाव आम है, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस हमें ॐ के माध्यम से आंतरिक शांति खोजने का संदेश देता है। यह ध्वनि हमें याद दिलाती है कि हम बाहरी भागदौड़ के बीच भी अपने भीतर की शांति को सुरक्षित रख सकते हैं। वास्तव में, ॐ का जाप ही वह सरल साधन है जो व्यक्ति को स्वयं से, समाज से और अंततः ब्रह्मांड से जोड़ने में सक्षम है।


© 2026 | All Rights Reserved | Thetarget365.com | Made By Top News Portal Development Company.
Call Us At – +91-:9406130006
WhatsApp – +91 62665 68872
Mail Us At – thetargetweb@gmail.com
Meet Us At – Shitla Ward, Ambikapur Dist. Surguja Chhattisgarh.497001.
