Opposition Leader : कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition) के रूप में अपने दो वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। इस अवसर पर उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक भावुक और संकल्पपूर्ण संदेश साझा किया। राहुल गांधी ने 26 जून, 2024 को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का दायित्व संभाला था। रायबरेली का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने संसद के भीतर और बाहर सरकार की नीतियों पर तीखे सवाल उठाए हैं और विपक्ष की भूमिका को नई ऊर्जा प्रदान की है। 18वीं लोकसभा में उनका यह कार्यकाल न केवल कांग्रेस पार्टी के लिए, बल्कि समूचे विपक्षी खेमे के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है, क्योंकि पिछले एक दशक से (2014-2024) लोकसभा में आधिकारिक तौर पर कोई नेता प्रतिपक्ष नहीं था।

10 प्रतिशत के आंकड़े से नेता प्रतिपक्ष की बहाली तक
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए किसी विपक्षी दल का कुल सीटों का कम से कम 10 प्रतिशत आंकड़ा प्राप्त करना अनिवार्य होता है। 2014 और 2019 के चुनावों में कोई भी विपक्षी पार्टी इस सीमा को पार करने में असमर्थ रही थी, जिसके कारण नेता प्रतिपक्ष का पद खाली पड़ा था। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनावों में ‘इंडिया’ गठबंधन और विशेष रूप से कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन किया। कांग्रेस की सीटों की संख्या 2019 की 52 से बढ़कर 100 तक पहुंच गई, जिससे राहुल गांधी के लिए नेता प्रतिपक्ष बनने का मार्ग प्रशस्त हुआ। यह नियुक्ति न केवल संसदीय परंपराओं की बहाली का प्रतीक है, बल्कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस के पुनरुत्थान को भी दर्शाती है।

‘सड़क से संसद तक’: हर भारतीय की आवाज बने राहुल
अपने दो साल के कार्यकाल पर टिप्पणी करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि उनका एकमात्र उद्देश्य हर भारतीय की आवाज को सत्ता के गलियारों तक पहुँचाना रहा है। उन्होंने नीट (NEET) परीक्षार्थियों के संघर्ष, चुनावी अनियमितताओं के दावों और संविधान की रक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार को सीधे चुनौती दी है। राहुल ने सोशल मीडिया पर लिखा, “सड़क से संसद तक, आपका भरोसा ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है।” उनका यह संकल्प कि वे हर मोर्चे पर जनता के साथ खड़े रहेंगे, उनकी राजनीतिक रणनीति का केंद्र रहा है। उन्होंने इस सफर को लंबा बताते हुए जनता के हितों के लिए अंतिम लड़ाई तक लड़ने का वादा दोहराया है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में आज दो साल पूरे हुए।
इन दो सालों का हर दिन एक ही काम रहा – हर भारतीय की आवाज़ को सत्ता तक पहुँचाना।
NEET के छात्रों की लड़ाई हो, वोट चोरी का पर्दाफाश हो या संविधान की रक्षा, हर मोर्चे पर आपके साथ खड़ा रहा, आज भी हूं, हमेशा रहूंगा।
सड़क से… pic.twitter.com/mNUWSu3fUG
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) June 26, 2026
संसदीय अधिकार और राहुल गांधी की भूमिका
नेता प्रतिपक्ष के रूप में राहुल गांधी को ‘संसद में विपक्ष के नेता की सैलरी और अलाउंस एक्ट, 1977’ के तहत कैबिनेट मंत्री के बराबर दर्जा, वेतन और अन्य सुविधाएं प्राप्त हैं। यह पद उन्हें सरकार की जवाबदेही तय करने का संवैधानिक अधिकार देता है। रायबरेली सीट को चुनना और वायनाड सीट से अपनी बहन प्रियंका गांधी के चुनावी सफर को आगे बढ़ाना, राहुल गांधी की हालिया राजनीतिक यात्रा के महत्वपूर्ण निर्णय रहे हैं। सदन के भीतर राहुल गांधी की मुखर शैली और सत्तापक्ष पर उनका लगातार प्रहार यह स्पष्ट करता है कि आगामी भविष्य में वे भारतीय राजनीति के केंद्र बिंदु बने रहेंगे। उनके ये दो साल संसदीय लोकतंत्र में विपक्ष के मजबूत और मुखर होने के गवाह बने हैं।
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