Tamil Nadu Politics : तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में डीएमके की करारी हार के बाद अब उसके ‘सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस’ (SPA) का अस्तित्व संकट में नजर आ रहा है। गठबंधन की पांच सहयोगी पार्टियां पहले ही साथ छोड़कर विजय के खेमे में शामिल हो चुकी हैं। अब वाइको के नेतृत्व वाली एमडीएमके (MDMK) भी गठबंधन से बाहर निकलने की पूरी तैयारी कर चुकी है। पार्टी की उच्च स्तरीय बैठक में इस मुद्दे पर मंथन हुआ है, जिसके बाद आज होने वाली जनरल काउंसिल की बैठक में गठबंधन से नाता तोड़ने का आधिकारिक ऐलान होने की प्रबल संभावना है।

गठबंधन में उपेक्षा का आरोप: दुरई वाइको ने बयां किया दर्द
एमडीएमके के प्रिंसिपल सेक्रेटरी दुरई वाइको ने गठबंधन में अपनी पार्टी के साथ हुए व्यवहार पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि डीएमके ने गठबंधन के सिद्धांतों का पालन नहीं किया, जिससे पार्टी के आत्म-सम्मान को ठेस पहुंची है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के विधायक सेंथिल सेल्वन की उच्च स्तरीय बैठक से अनुपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में इस चर्चा को जन्म दिया है कि वह पार्टी से इस्तीफा देकर थलपति विजय की पार्टी टीवीके (TVK) में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, पार्टी नेताओं का कहना है कि गठबंधन से बाहर निकलने का अंतिम निर्णय आज की जनरल काउंसिल मीटिंग में ही लिया जाएगा।

आत्म-सम्मान और गरिमा की लड़ाई: डीएमके पर लगाए गंभीर आरोप
विरुधुनगर में आयोजित बैठक के दौरान वाइको ने डीएमके नेतृत्व पर पक्षपात का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान डीएमके ने एमडीएमके को अपने ही चुनाव चिन्ह पर लड़ने को मजबूर किया, जबकि अन्य छोटे दलों को छूट दी गई थी। वाइको ने परोक्ष रूप से अन्य दलों का जिक्र करते हुए कहा कि सहयोगी दलों को राज्यसभा सीटें तक दी गईं, लेकिन एमडीएमके की लगातार अनदेखी की गई। नौ वर्षों तक गठबंधन में बने रहने के लिए पार्टी ने अपनी गरिमा से समझौता किया, लेकिन अब और नहीं।
स्टालिन के सामने अस्तित्व का संकट: सिकुड़ रहा है डीएमके का गठबंधन
यदि एमडीएमके गठबंधन से बाहर निकलती है, तो विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद डीएमके के नेतृत्व वाले SPA से अलग होने वाली यह छठी पार्टी होगी। कांग्रेस पहले ही डीएमके से रिश्ते तोड़कर थलपति विजय की टीवीके सरकार का हिस्सा बन चुकी है। इसके अलावा, वीसीके (VCK) और आईयूएमएल (IUML) भी विजय सरकार में शामिल हो गए हैं, जबकि सीपीआई और सीपीएम ने नई सरकार को बिना शर्त समर्थन देने का फैसला किया है। अब स्टालिन के गठबंधन में केवल कमल हासन की एमएनएम (MNM) और कुछ अन्य छोटी पार्टियां ही बची हैं।
तमिलनाडु की राजनीति में विजय का बढ़ता प्रभाव
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के लिए आज का दिन काफी सुखद होने वाला है। एक तरफ जहां डीएमके अपना कुनबा बचाने में नाकाम साबित हो रही है, वहीं विजय के खेमे में लगातार दलों का जुड़ना उनके बढ़ते जनाधार को दर्शाता है। राज्य की राजनीति में यह बड़ा बदलाव आने वाले समय में नए समीकरणों को जन्म देगा। फिलहाल, सबकी नजरें एमडीएमके की आज होने वाली महत्वपूर्ण जनरल काउंसिल की बैठक पर टिकी हैं, जो तमिलनाडु के राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करेगी।











