Vijaya Mehta Death : भारतीय रंगमंच और समांतर सिनेमा की दुनिया में एक गहरा शून्य पैदा हो गया है। मराठी थिएटर की दिग्गज कलाकार और निर्देशक विजया मेहता अब हमारे बीच नहीं रहीं। 92 वर्ष की आयु में, लंबे समय से बीमारी से जूझने के बाद, उन्होंने 30 जून 2026 की रात लगभग 10 से 10:30 बजे के बीच अपनी अंतिम सांस ली। विजया मेहता केवल एक नाम नहीं, बल्कि भारतीय कला जगत का एक सशक्त हस्ताक्षर थीं। उन्होंने अपने पीछे एक ऐसी अमूल्य विरासत छोड़ी है, जो आने वाली कई पीढ़ियों के अभिनेताओं और निर्देशकों के लिए मार्गदर्शन का काम करती रहेगी।

अनुपम खेर ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
विजया मेहता के निधन से फिल्म जगत स्तब्ध है। अभिनेता अनुपम खेर ने सोशल मीडिया पर एक भावनात्मक वीडियो के माध्यम से उन्हें नमन किया। खेर ने ‘राव साहब’ और ‘पेस्टोनजी’ जैसी फिल्मों में उनके साथ काम करने के अनुभव को साझा करते हुए लिखा कि विजया बाई के साथ हर रिहर्सल उन्हें सिखाती थी कि अभिनय की कला कितनी अथाह है। उन्होंने कहा, “विजया बाई ने कभी ज्ञान थोपा नहीं, बल्कि उसे रोशन किया। वे एक बेहतरीन इंसान और शानदार फिल्ममेकर थीं।” अनुपम खेर ने उनके अनुशासन, विनम्रता और सादगी को याद करते हुए कहा कि उन्होंने हमें सिखाया कि एक्टिंग केवल परफॉर्म करना नहीं, बल्कि जीवन को गहराई से समझना है।

‘रंगायन’ से लेकर शिखर तक का सफर
विजया मेहता का कलात्मक सफर अत्यंत प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने मंच और पर्दे दोनों पर अपनी अमिट छाप छोड़ी। मुंबई के प्रतिष्ठित ‘रंगायन’ थिएटर ग्रुप की स्थापना में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण थी। इस ग्रुप की स्थापना उन्होंने मशहूर नाटककार विजय तेंदुलकर, अरविंद देशपांडे और श्रीराम लागू जैसे दिग्गजों के साथ मिलकर की थी। उन्होंने दिल्ली में इब्राहिम अल्काजी और मुंबई में आदि मर्जबान जैसे थिएटर जगत के दिग्गजों से प्रशिक्षण प्राप्त किया था। इसी मजबूत नींव ने उन्हें एक ऐसी निर्देशक और अभिनेत्री के रूप में स्थापित किया, जिसकी समझ और संवेदनशीलता की मिसाल दी जाती है।
सम्मान और पुरस्कारों से भरा शानदार करियर
उनके योगदान को न केवल दर्शकों ने सराहा, बल्कि प्रतिष्ठित पुरस्कारों ने भी उनके काम को सम्मान दिया। थिएटर निर्देशन के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य के लिए उन्हें 1975 में ‘संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार’ से नवाजा गया। फिल्म जगत में भी उन्होंने अपनी छाप छोड़ी। 1986 में फिल्म ‘राव साहब’ में शानदार अभिनय के लिए उन्हें ‘सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री’ के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्होंने न केवल अभिनय किया, बल्कि ‘पेस्टोनजी’ और ‘राव साहेब’ जैसी कालजयी फिल्मों का निर्देशन भी किया। विजया मेहता का जाना भारतीय संस्कृति के एक अध्याय के समाप्त होने जैसा है। उनका काम और उनकी सीख हमेशा उन कलाकारों के दिलों में जीवित रहेगी, जिनके जीवन को उन्होंने अपने मार्गदर्शन से निखारा है।
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