Trinamool Congress Row : असली तृणमूल कांग्रेस पर सियासी संग्राम, चुनाव आयोग ने ममता और ऋतब्रता गुट को नोटिस भेजा

Trinamool Congress Row : पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर छिड़ा सत्ता संघर्ष अब निर्वाचन आयोग की चौखट पर पहुंच चुका है। चुनाव आयोग ने गुरुवार को ममता बनर्जी और ऋतब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को औपचारिक नोटिस जारी कर दिया है। यह विवाद मुख्य रूप से ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के संगठनात्मक चुनावों, पार्टी के आधिकारिक चिन्ह, बैंक खातों और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं पर नियंत्रण को लेकर है। दोनों गुटों ने पार्टी पर अपना दावा ठोकते हुए आयोग के समक्ष परस्पर विरोधी याचिकाएं दायर की हैं। आयोग ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों पक्षों से विस्तृत जवाब तलब किया है और उन्हें 6 जुलाई की शाम 5:30 बजे तक अपनी दलीलें पेश करने का निर्देश दिया है।

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बागी गुट का दावा: 65 से अधिक विधायकों का समर्थन

हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व के खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद करने वाले ऋतब्रता बनर्जी का गुट अब खुलकर सामने आ गया है। बागी गुट का दावा है कि उनके पास पार्टी के कुल 80 विधायकों में से 65 से अधिक विधायकों का समर्थन हासिल है, जिसके आधार पर उन्होंने ऋतब्रता बनर्जी को पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष का नेता भी घोषित कर दिया है। ऋतब्रता बनर्जी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों से मुलाकात की थी, जिसमें उन्होंने अपने गुट को ही ‘असली तृणमूल कांग्रेस’ के रूप में मान्यता देने की मांग रखी है।

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ममता बनर्जी को पद से हटाने का विवादित कदम

इस सत्ता संघर्ष की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बागी गुट ने कुछ सप्ताह पूर्व एक विशेष संगठनात्मक बैठक आयोजित कर संस्थापक ममता बनर्जी को पार्टी अध्यक्ष के पद से ही हटा दिया था। इतना ही नहीं, इस गुट ने अरूप रॉय को नया पार्टी अध्यक्ष नामित किया और अभिषेक बनर्जी को पार्टी से निलंबित करने का भी दावा किया है। ऋतब्रता बनर्जी का तर्क है कि 22 जून को बुलाई गई यह बैठक पार्टी के संविधान और नियमों के अनुरूप थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि न केवल विधायक, बल्कि बड़ी संख्या में पार्षद और जिला परिषद के सदस्य भी उनके साथ खड़े हैं, इसलिए वे ही वास्तविक अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस हैं।

संगठन बनाम संख्याबल: ममता गुट का तर्क

जहां बागी गुट बहुमत का हवाला दे रहा है, वहीं ममता बनर्जी के वफादारों का कहना है कि पार्टी का वास्तविक स्वरूप विधायकों की संख्या से नहीं, बल्कि संगठनात्मक शक्ति और निष्ठा से तय होता है। ममता समर्थक गुट का दावा है कि पार्टी की जमीनी पकड़ और संगठन पर नियंत्रण अब भी पूर्व मुख्यमंत्री के पास ही मजबूती से है। चुनाव आयोग की इस हस्तक्षेप ने स्थिति को और अधिक पेचीदा बना दिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आयोग 6 जुलाई को दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद संगठनात्मक शक्ति और वैधानिक दावों के बीच किस प्रकार संतुलन बिठाता है। यह निर्णय न केवल पार्टी के भविष्य, बल्कि राज्य की आगामी राजनीतिक दिशा भी तय करेगा।

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Chandan Das

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