Kanker Naxal Rehabilitation : कांकेर कलेक्टर पहुंचे नक्सल पुनर्वास केंद्र, आत्मसमर्पित नक्सलियों से जानी जमीनी हकीकत

Kanker में कलेक्टर ने नक्सल पुनर्वास केंद्र का निरीक्षण कर आत्मसमर्पित नक्सलियों से सीधी बातचीत की। इस दौरान उन्होंने उनकी समस्याएं, पुनर्वास की स्थिति और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की। प्रशासन इसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विश्वास बहाली की बड़ी पहल मान रहा है।

Kanker Naxal Rehabilitation :  कांकेर जिले में प्रशासन नक्सलवाद की समस्या से दूर मुख्यधारा में लौटने वाले पूर्व नक्सलियों के पुनर्वास को लेकर बेहद सक्रिय है। इसी क्रम में कांकेर कलेक्टर नीलेश कुमार महादेव क्षीरसागर ने भानुप्रतापपुर स्थित नक्सल पुनर्वास केंद्र का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने वहां रह रहे आत्मसमर्पित नक्सलियों से व्यक्तिगत मुलाकात की और उनके दैनिक जीवन, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी चुनौतियों को करीब से समझा। कलेक्टर ने केंद्र में दी जा रही सुविधाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि शासन की सभी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ इन लोगों तक बिना किसी देरी के पहुँचे।

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स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान

निरीक्षण के दौरान पुनर्वास केंद्र में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने एक विशेष मेडिकल शिविर का आयोजन किया। यहां सभी पूर्व नक्सलियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और उन्हें आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराई गईं। कलेक्टर ने स्वास्थ्य विभाग को हिदायत दी कि केंद्र में रहने वाले लोगों की नियमित स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित की जाए ताकि वे शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहकर एक नई शुरुआत कर सकें। इस दौरान जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे, जिन्होंने पूर्व नक्सलियों को बेहतर जीवन स्तर प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

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34 नक्सलियों का पुनर्वास

कलेक्टर नीलेश महादेव क्षीरसागर ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में इस पुनर्वास केंद्र में 34 पूर्व नक्सली रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रशासन का मुख्य उद्देश्य इन लोगों को सामाजिक मुख्यधारा में सम्मानजनक तरीके से शामिल करना है। कलेक्टर ने बताया, “कल ही 4 पूर्व नक्सली अपने घरों को वापस लौट गए हैं। केंद्र में मौजूद सभी लोगों के लिए सरकारी योजनाओं से जुड़े जरूरी दस्तावेज तैयार करवा लिए गए हैं। उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी दिया जा रहा है, ताकि उनके पास अपना पक्का घर हो। इसके अलावा, उनके आर्थिक उत्थान के लिए उन्हें विभिन्न प्रकार के कौशल प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं, साथ ही शासन की नीति के अनुसार पुरस्कार और प्रोत्साहन राशि भी समय पर दी जा रही है।”

आत्मसम्मान और सुरक्षा

जिला प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले पूर्व नक्सलियों को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करने और उन्हें सामाजिक जीवन में पूरी सुरक्षा के साथ स्थापित करने के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। पुनर्वास प्रक्रिया केवल उन्हें आश्रय देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें समाज का एक उपयोगी अंग बनाने की दिशा में जिला प्रशासन का विशेष जोर है। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि मुख्यधारा में लौटने वाले हर व्यक्ति को शासन की सभी सुरक्षा नीतियों और पुनर्वास पैकेज का पूरा लाभ मिलना चाहिए। कांकेर प्रशासन का यह मानवीय दृष्टिकोण नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हिंसा का रास्ता छोड़ने वालों के लिए एक नई उम्मीद और प्रेरणा बनकर उभर रहा है।

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