TMC Rebels : पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्ता के संघर्ष के बीच अब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर आंतरिक कलह चरम पर पहुँच गई है। शुक्रवार को ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी के बागी गुट ने कोलकाता स्थित टीएमसी मुख्यालय पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया। इस कार्यवाही में फिरहाद हाकिम, संदीपन साहा, जावेद खान और पार्टी के कोषाध्यक्ष अकरुज्जमां समेत कई वरिष्ठ विधायक शामिल रहे। बागी गुट ने दफ्तर के दरवाजों पर ताले जड़ दिए, पुराने पोस्टरों को हटाकर नए पोस्टर लगाए और मुख्यालय के भीतर ही अपने गुट की एक महत्वपूर्ण बैठक भी आयोजित की।

अधिकार का दावा: बागी गुट ने मुख्यालय को बताया अपना आधार
मुख्यालय पर कब्जा करने के बाद बागी गुट ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि अब टीएमसी की सभी सांगठनिक गतिविधियाँ इसी दफ्तर से संचालित होंगी। कोषाध्यक्ष अकरुज्जमां ने स्पष्ट किया कि इस दफ्तर के साथ पार्टी का एक भावनात्मक जुड़ाव है और वर्तमान प्रबंधन ने इसके मालिकों के साथ नया समझौता कर लिया है। इस गुट ने कार्यालय के बाहर वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय के नाम का पोस्टर लगाकर उन्हें टीएमसी का नया चेयरमैन घोषित कर दिया है। ऋतब्रत बनर्जी ने मीडिया से बातचीत में ऐलान किया कि शनिवार से इस मुख्यालय से बागी गुट अपना औपचारिक कामकाज पूरी तरह शुरू कर देगा।

चुनावी रस्साकशी: चुनाव आयोग की ओर से दोनों गुटों को नोटिस
यह मुख्यालय 2022 से ही टीएमसी का प्रमुख केंद्र रहा है। इस घटनाक्रम से एक दिन पहले ही ऋतब्रत बनर्जी और उनके सहयोगियों ने दिल्ली जाकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात की थी। इस राजनीतिक उठापटक के बीच चुनाव आयोग ने हस्तक्षेप करते हुए दोनों गुटों को नोटिस जारी किया है। आयोग ने निर्देश दिए हैं कि दोनों पक्ष 6 जुलाई तक यह स्पष्ट करें कि पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और सांगठनिक ढांचे पर उनका दावा किस आधार पर वैध है। आयोग दोनों गुटों से प्राप्त दस्तावेजों और दलीलों का गहन अध्ययन करने के बाद ही अपना अंतिम निर्णय सुनाएगा।
संपत्ति और सांगठनिक वर्चस्व को लेकर दो गुटों के बीच खींचतान
बागी गुट का दावा है कि पार्टी के नाम पर दर्ज सभी संपत्तियां, उसका सिंबल और ढांचा अब उनके अधीन होना चाहिए क्योंकि वे ही असली टीएमसी हैं। वहीं, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला धड़ा इस पूरे घटनाक्रम को अवैध करार दे रहा है। ममता गुट का कहना है कि जिन नेताओं को पार्टी से पहले ही निष्कासित किया जा चुका है, उनकी बातों पर आयोग को विचार नहीं करना चाहिए। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विवाद अब केवल दफ्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पार्टी की वैधानिकता के अस्तित्व की लड़ाई बन गया है।
भविष्य की संभावनाएं: आयोग के फैसले पर टिकी बंगाल की राजनीति
टीएमसी के इस आंतरिक विभाजन ने बंगाल की राजनीति को एक अनिश्चित मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। जहाँ एक तरफ बागी गुट ने पूरी ताकत के साथ मुख्यालय का प्रबंधन अपने हाथ में लेने का प्रयास किया है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी आलाकमान इस कब्जे को कानूनी और सांगठनिक स्तर पर चुनौती देने की तैयारी कर रहा है। चुनाव आयोग का आगामी निर्णय ही यह तय करेगा कि तृणमूल कांग्रेस की कमान अंततः किसके हाथों में रहेगी। फिलहाल, दोनों गुटों के बीच की यह रस्साकशी पार्टी समर्थकों और कार्यकर्ताओं के बीच भारी असमंजस की स्थिति पैदा कर रही है।
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