Ram Mandir Donation Row : अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी का मामला अब एक नए मोड़ पर है। जांच के दौरान सामने आई तस्वीरों और वीडियो फुटेज ने रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि कागजों पर टिन्नू ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का ड्राइवर था, लेकिन मंदिर परिसर के भीतर उसका प्रभाव किसी बड़े अधिकारी से कम नहीं था। मंदिर निर्माण से लेकर वीआईपी आयोजनों तक उसकी उपस्थिति और बेरोकटोक आवाजाही यह दर्शाती है कि वह महज एक चालक नहीं, बल्कि ट्रस्ट के भीतर एक प्रभावशाली शख्सियत था। उसकी सक्रियता और मंदिर की गोपनीय जगहों तक पहुंच ने उन दावों को पुख्ता कर दिया है कि उसकी पहुंच ट्रस्ट के फैसलों तक थी, जो अब जांच का एक अहम हिस्सा बन चुका है।

SIT रिपोर्ट: अविनाश शुक्ला और चोरी का ‘नेटवर्क’
विशेष जांच दल (SIT) द्वारा 23 जून को गृह विभाग को सौंपी गई प्रारंभिक रिपोर्ट इस पूरे घोटाले की परतें खोलती है। रिपोर्ट के अनुसार, 30 वर्षीय अविनाश शुक्ला इस चोरी के नेटवर्क का मुख्य ‘मास्टरमाइंड’ है। जांच टीम का मानना है कि पिछले 40 दिनों के दौरान मंदिर के दान गणना कक्ष (Counting Room) में लगभग 70 बार चोरी की घटनाएं हुईं। अविनाश शुक्ला के खिलाफ सबसे मजबूत सबूत हाथ लगे हैं, जिसके आधार पर उसे मामले का प्राथमिक आरोपी बनाया गया है। SIT ने पाया है कि गणना कक्ष के भीतर दान राशि के साथ छेड़छाड़ करने का पूरा तंत्र शुक्ला के इशारे पर ही काम कर रहा था। उसी से हुई पूछताछ के आधार पर अन्य पांच आरोपियों की पहचान सुनिश्चित हुई है।

70 बार चोरी, लेकिन रसूख के पीछे का सच
जांच एजेंसियों को संदेह है कि गणना कक्ष में जिस तरह की हेराफेरी की गई, वह बिना किसी उच्च-स्तरीय संरक्षण के संभव नहीं थी। टिन्नू यादव की मंदिर परिसर में बेरोकटोक पहुंच और अविनाश शुक्ला का व्यवस्थित चोरी नेटवर्क—ये दोनों कड़ियां मिलकर एक बड़ी साजिश की ओर इशारा करती हैं। रिपोर्ट में स्पष्ट है कि दान राशि की गिनती के दौरान अपनाए गए तरीके अत्यंत संदिग्ध थे। एसआईटी फिलहाल इस बात की तहकीकात कर रही है कि क्या इन आरोपियों को ट्रस्ट के किसी बड़े पदाधिकारी का मौन समर्थन प्राप्त था, या फिर उन्होंने अपनी स्थिति का फायदा उठाकर मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया था।

जांच का दायरा और भविष्य की चुनौतियां
फिलहाल इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जहां एक ओर मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला से जुड़े वित्तीय लेन-देन और उसकी आय से अधिक संपत्ति की जांच चल रही है, वहीं दूसरी ओर रमाशंकर उर्फ टिन्नू यादव जैसे किरदारों की मंदिर में असली हैसियत को उजागर करना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती है। SIT ने अपनी सिफारिशों में मंदिर की मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था में सुधार और ट्रस्ट के खातों के ऑडिट पर जोर दिया है। अयोध्या का प्रशासन अब इस बात को लेकर सतर्क है कि मंदिर जैसे संवेदनशील स्थान पर भविष्य में ऐसी किसी भी ‘आंतरिक सेंधमारी’ को रोकने के लिए पुख्ता तकनीकी निगरानी और पारदर्शी प्रशासनिक तंत्र की स्थापना की जाए।
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