Ram Mandir Donation Case: अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चंदे की कथित चोरी का मामला अब सर्वोच्च न्यायालय की दहलीज पर है। इस संवेदनशील प्रकरण की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें मामले को सीबीआई (CBI) को सौंपने और एक विशेष जांच दल (SIT) के गठन की मांग की गई है।

इससे पहले, 29 जून को सुप्रीम कोर्ट की अवकाशकालीन बेंच ने इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने से इंकार करते हुए कहा था कि गर्मी की छुट्टियों के बाद इसे नियमित बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। अब चूंकि 13 जुलाई से अदालत की नियमित कार्रवाई फिर से शुरू हो रही है, ऐसे में याचिका के स्टेटस से संकेत मिल रहे हैं कि इस पर सुनवाई उसी दिन हो सकती है। हालांकि, अंतिम सूची आने तक इस पर संशय बना हुआ है।

SIT की शुरुआती रिपोर्ट: अविनाश शुक्ला और 70 बार चोरी का खुलासा
इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट ने मंदिर प्रशासन के भीतर व्याप्त भ्रष्टाचार की कई परतें खोल दी हैं। रिपोर्ट में 30 वर्षीय अविनाश शुक्ला को इस पूरी साजिश का मुख्य सूत्रधार बताया गया है। जांचकर्ताओं के अनुसार, मंदिर के दान गणना कक्ष (Counting Room) में लगभग 40 दिनों के भीतर दान राशि की चोरी की 70 घटनाएं सामने आई हैं। SIT का मानना है कि पूरा चोरी का नेटवर्क अविनाश शुक्ला के इर्द-गिर्द ही घूम रहा था। उसकी गिरफ्तारी और पूछताछ के बाद ही पांच अन्य संदिग्ध आरोपियों की पहचान संभव हो सकी और जांच टीम उस तरीके को समझ पाई, जिसका इस्तेमाल दान राशि में हेराफेरी करने के लिए किया जाता था।

आय से अधिक संपत्ति का रहस्य और ट्रस्ट की पारदर्शिता पर सवाल
जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है, जो आरोपी के भ्रष्टाचार को और स्पष्ट करता है। ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ द्वारा दान राशि की गिनती के लिए नियुक्त कर्मचारियों को मासिक वेतन के रूप में 15 हजार रुपये से कुछ अधिक राशि ही मिलती है। इसके बावजूद, गिरफ्तारी से पूर्व अविनाश शुक्ला की बैंकिंग गतिविधियों में भारी मात्रा में धन का लेन-देन पाया गया, जो उसकी ज्ञात आय के स्रोतों से कहीं अधिक है। यह विसंगति सीधे तौर पर ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
क्या CBI जांच से खुलेंगी बड़ी साजिश की परतें?
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि मंदिर जैसे पवित्र और संवेदनशील संस्थान में इतने बड़े पैमाने पर गबन बिना किसी उच्च-स्तरीय मिलीभगत के संभव नहीं है। स्थानीय स्तर पर हो रही जांच के बावजूद, लोग अब सीबीआई द्वारा व्यापक जांच की मांग कर रहे हैं ताकि इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य प्रभावशाली लोगों के चेहरे बेनकाब हो सकें। अयोध्या में चंदा चोरी का यह मामला न केवल मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली के लिए एक अग्निपरीक्षा है, बल्कि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और उनके द्वारा दिए गए दान की सुरक्षा से भी जुड़ा है। 13 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट का रुख इस मामले में भविष्य की जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित होगा।
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